Last Updated on March 9, 2026 8:09 pm by INDIAN AWAAZ

Staff Reporter BIZ DESK
सोमवार को भारतीय शेयर बाजारों में भारी हाहाकार मच गया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है, जिसका सीधा असर भारतीय इक्विटी इंडेक्स पर पड़ा। सोमवार का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। बेंचमार्क निफ्टी-50 ने अपने जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से 10% से अधिक की गिरावट दर्ज की है, जिसके साथ ही यह आधिकारिक तौर पर ‘तकनीकी सुधार’ (Technical Correction) जोन में प्रवेश कर चुका है।
बाजार का हाल: भारी बिकवाली
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 1,352.74 अंक यानी 1.71% की बड़ी गिरावट के साथ 77,566.16 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबारी सत्र के दौरान एक समय स्थिति और भी भयावह थी, जब सेंसेक्स 2,494.35 अंक तक टूट गया था और 76,424.55 के निचले स्तर तक पहुँच गया था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 भी 422.40 अंक (1.73%) गिरकर 24,028.05 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में निफ्टी 752 अंक से ज्यादा फिसलकर 23,697.80 के स्तर तक चला गया था। व्यापक बाजारों (Broader Markets) की स्थिति और भी खराब रही, जहाँ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में क्रमशः 1.97% और 2.22% की गिरावट दर्ज की गई।
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
शेयर बाजार के साथ-साथ विदेशी मुद्रा बाजार में भी भारतीय मुद्रा बुरी तरह प्रभावित हुई। डॉलर के मुकाबले रुपया 53 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ 92.35 के अपने अब तक के सबसे निचले (ऑल-टाइम लो) स्तर पर बंद हुआ। अंतरबैंकिंग विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.22 पर खुला और सत्र के दौरान कमजोरी दर्ज करते हुए 92.35 पर जा गिरा। रुपये की यह कमजोरी आयातित मुद्रास्फीति (imported inflation) को बढ़ा सकती है, जिससे देश में ईंधन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी चीजें और महंगी होने का डर है।
सेक्टर-वार विश्लेषण: बैंकिंग और सीमेंट में भारी गिरावट
बाजार की गिरावट में उन सेक्टरों का बड़ा हाथ रहा जो अर्थव्यवस्था के विकास के इंजन माने जाते हैं:
- पीएसयू बैंक: सरकारी बैंकों का इंडेक्स 3.97% लुढ़क गया और यह आज का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा।
- सीमेंट और इंफ्रा: अल्ट्राटेक सीमेंट 5.23% की भारी गिरावट के साथ सेंसेक्स का सबसे बड़ा लूजर रहा। इसी तरह अडानी पोर्ट्स और अन्य बुनियादी ढांचा कंपनियां भी दबाव में रहीं।
- ऑटो और एविएशन: मारुति, महिंद्रा एंड महिंद्रा और इंडिगो (InterGlobe Aviation) जैसी कंपनियां ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण भारी गिरावट की शिकार हुईं।
- आईटी सेक्टर: बाजार में मची तबाही के बीच आईटी सेक्टर ने थोड़ी राहत दी। निफ्टी आईटी इंडेक्स 0.08% की मामूली बढ़त के साथ 30,162.05 पर बंद हुआ, जिससे यह बाजार में एक ‘डिफेंसिव हेज’ के रूप में उभरा।
कच्चे तेल में उछाल का असर
बाजार में गिरावट का प्रमुख कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आग लगना था। वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड 12.34% उछलकर 104.1 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। सत्र के दौरान यह 120 डॉलर प्रति बैरल के उच्चतम स्तर तक भी गया था। हालांकि बाद में कीमतों में मामूली नरमी आई, लेकिन 100 डॉलर से ऊपर की कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) के लिए बड़ी चिंता का विषय बनी हुई हैं।
| सेक्टर | प्रभाव | मुख्य कारण |
| PSU बैंक | -3.97% | सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर। SBI समेत अन्य सरकारी बैंकों में भारी बिकवाली। |
| सीमेंट और इंफ्रा | -5.23% | अल्ट्राटेक सीमेंट सेंसेक्स का सबसे बड़ा लूज़र रहा। बढ़ती ऊर्जा लागत से मार्जिन पर असर। |
| ऑटो सेक्टर | भारी गिरावट | मारुति और M&M के शेयरों में गिरावट; ईंधन की कीमतों में वृद्धि से मांग घटने का डर। |
| एविएशन | भारी गिरावट | इंडिगो (InterGlobe Aviation) के शेयर लुढ़के क्योंकि जेट ईंधन के दाम क्रूड से जुड़े हैं। |
| IT सेक्टर | +0.08% | एकमात्र सेक्टर जो हरे निशान में रहा। आईटी शेयरों ने गिरावट के बीच बचाव का काम किया। |
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी-50 का अपने रिकॉर्ड हाई (26,373) से 10% से अधिक नीचे आना संकेत है कि निवेशकों का भरोसा डगमगाया है। अब बाजार में ‘बाय ऑन डिप्स’ (गिरावट पर खरीदारी) की रणनीति के बजाय ‘सेल ऑन राइज’ (तेजी पर बिकवाली) का रुझान हावी हो सकता है। आने वाले दिनों में आरबीआई के हस्तक्षेप और भू-राजनीतिक मोर्चे पर शांति की उम्मीद ही बाजार को सहारा दे सकती है।
