Last Updated on June 17, 2026 12:34 am by INDIAN AWAAZ

अशफाक कायमखानी | जयपुर

राजस्थान की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े बदलावों की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदेश की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों—भाजपा और कांग्रेस—के भीतर संगठन और नेतृत्व स्तर पर संभावित परिवर्तन की अटकलों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी राजस्थान दौरों के बाद राजनीतिक समीकरण और स्पष्ट हो सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस में नेतृत्व की नई दिशा तय किए जाने की संभावना जताई जा रही है। चर्चा है कि पार्टी हाईकमान राजस्थान में संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने के लिए नई रणनीति पर काम कर सकता है। इस क्रम में पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की भूमिका बढ़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं, जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की जिम्मेदारियों में बदलाव की संभावना व्यक्त की जा रही है। साथ ही, राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा के स्थान पर नए प्रभारी की नियुक्ति की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व राज्य इकाई की गतिविधियों और संगठनात्मक रिपोर्टों के आधार पर आगे की रणनीति तैयार कर रहा है। पार्टी के भीतर भविष्य की राजनीतिक संरचना को लेकर कई स्तरों पर मंथन जारी बताया जा रहा है।

वहीं दूसरी ओर भाजपा में भी संगठनात्मक पुनर्गठन के संकेत मिल रहे हैं। लंबे समय तक संगठन महामंत्री का पद खाली रहने के बाद नए संगठन महामंत्री की नियुक्ति के साथ संगठन में सक्रियता बढ़ी है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी चल रही है कि सरकार और संगठन स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

मुख्यमंत्री पद को लेकर भी विभिन्न नामों की चर्चा राजनीतिक हलकों में की जा रही है, हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। साथ ही, केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की स्थिति बनने पर राजस्थान से जुड़े प्रतिनिधित्व में बदलाव की संभावनाओं पर भी नजर रखी जा रही है।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद को लेकर भी अटकलें जारी हैं। हालिया राज्यसभा चुनावों में विभिन्न सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने के प्रयासों को पार्टी की व्यापक राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही परंपरागत मतदाता वर्गों के बीच संतुलन साधने की कोशिशों पर भी चर्चा हो रही है।

कुल मिलाकर, राजस्थान की राजनीति में अगले कुछ समय में बड़े राजनीतिक और संगठनात्मक बदलावों की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि इन संभावनाओं पर अंतिम निर्णय संबंधित दलों के नेतृत्व और आधिकारिक घोषणाओं के बाद ही स्पष्ट होगा।