
हमारे संवाददाता / नई दिल्ली
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर की गई टिप्पणी पर उठे विवाद के बीच विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को राजनीतिक नेताओं से विदेशी नेताओं के संदर्भ में सार्वजनिक बयान देते समय संयम और मर्यादा बरतने की अपील की। मंत्रालय ने कहा कि भारत के इटली के साथ मजबूत और महत्वपूर्ण संबंध हैं तथा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्तों को और मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि राजनीतिक मुद्दों और मतभेदों को उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन विदेशी नेताओं के बारे में टिप्पणी करते समय सम्मान और शिष्टाचार बनाए रखना जरूरी है।
जायसवाल ने कहा, “भारत के इटली के साथ मजबूत संबंध हैं। हम इन संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं। किसी भी मुद्दे को सम्मान के साथ सामने रखा जाना चाहिए।”
विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर किए गए हमले के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के संदर्भ का इस्तेमाल किए जाने के बाद आई है।
राहुल गांधी ने रचनात्मक कांग्रेस राष्ट्रीय सम्मेलन, जिसे पहले कांग्रेस आउटरीच सेल के नाम से जाना जाता था, में प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की विदेश नीति को कई बार विदेशी नेताओं के साथ प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत संबंधों और मुलाकातों तक सीमित करके पेश किया जाता है।
अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने मंच पर रचनात्मक कांग्रेस के प्रमुख संदीप दीक्षित को गले लगाकर प्रधानमंत्री मोदी की विदेशी नेताओं के साथ मुलाकातों और गले मिलने की शैली पर सवाल उठाया।
राहुल गांधी ने कहा, “कल्पना कीजिए कि कितनी अज्ञानता है… उन्हें यह विचार कहां से मिला कि विदेश नीति नेताओं को गले लगाने के बारे में है?”
इसी दौरान संदीप दीक्षित ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का संदर्भ देते हुए राहुल गांधी से सवाल किया। उन्होंने पूछा, “एक चीज पूछ सकता हूं? मेलोनी समझ के तो नहीं पकड़ा था?”
इस पर राहुल गांधी ने जवाब दिया, “मैं अभी वहां तक नहीं पहुंचा हूं।”
इस बातचीत का वीडियो और टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गई। कुछ लोगों ने राहुल गांधी और संदीप दीक्षित की बातचीत को अनुचित बताते हुए आलोचना की और इसे महिला विरोधी टिप्पणी के तौर पर भी देखा। वहीं, कांग्रेस समर्थकों ने इसे प्रधानमंत्री की विदेश नीति पर राहुल गांधी के राजनीतिक तंज के संदर्भ में लिया।
हालांकि विदेश मंत्रालय ने राहुल गांधी या संदीप दीक्षित की टिप्पणी पर सीधे कोई राजनीतिक प्रतिक्रिया देने के बजाय विदेशी नेताओं के प्रति सार्वजनिक संवाद में मर्यादा बनाए रखने पर जोर दिया।
भारत और इटली के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग सहित कई क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करने के प्रयास हुए हैं। ऐसे में विदेश मंत्रालय की टिप्पणी को दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर सरकार की संवेदनशीलता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राहुल गांधी की टिप्पणी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और उनकी व्यक्तिगत कूटनीति को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। सरकार प्रधानमंत्री के विदेशी नेताओं के साथ व्यक्तिगत संपर्क और नियमित संवाद को भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव तथा सक्रिय कूटनीति का हिस्सा बताती रही है।
विपक्ष, हालांकि, कई मौकों पर इस बात पर सवाल उठाता रहा है कि क्या विदेश नीति को व्यक्तिगत संबंधों और नेताओं के बीच सार्वजनिक मेलजोल के बजाय व्यापक राष्ट्रीय हितों, संस्थागत कूटनीति और रणनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर देखा जाना चाहिए।
‘मेलोनी’ टिप्पणी से पैदा हुआ विवाद इसी व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। विदेश मंत्रालय के संयम बरतने के संदेश के बाद अब यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी, कूटनीतिक मर्यादा और विदेशी नेताओं के प्रति सम्मान को लेकर नई चर्चा को जन्म दे सकता है।
