आर. सूर्यामूर्ति / नई दिल्ली

संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने रेल सुरक्षा को लेकर नई चिंताएँ जताई हैं और कहा है कि पहले की सिफारिशों पर लगभग पूर्ण अनुपालन का दावा किए जाने के बावजूद निरीक्षण, निगरानी और जवाबदेही से जुड़ी कई महत्वपूर्ण खामियाँ अभी भी बनी हुई हैं।

रेल मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों पर अपनी ताज़ा रिपोर्ट में पीएसी ने ट्रैक मॉनिटरिंग, मशीनीकरण और अग्नि सुरक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति को स्वीकार किया है, लेकिन सुरक्षा प्रणालियों के क्रियान्वयन की समय-सीमा और स्वतंत्र ऑडिट जैसे महत्वपूर्ण सुधारों पर अधूरी प्रतिक्रियाओं को लेकर चिंता जताई है।

रेलवे ने समिति को बताया कि ट्रैक में खामियों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाली ट्रैक रिकॉर्डिंग कार (TRC) ने 2023–24 में लगभग 100 प्रतिशत कवरेज हासिल कर ली और 2024–25 में निर्धारित लक्ष्य से भी आगे निकल गई।

हालाँकि पीएसी ने यह भी रेखांकित किया कि पहले कुछ सेक्शनों में 100 प्रतिशत तक की कमी पाई गई थी और आधिकारिक आँकड़ों तथा ज़ोनल ऑडिट के बीच अंतर भी सामने आया है। इससे समिति ने प्रस्तुत आँकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। साथ ही यह भी कहा गया कि निरीक्षणों के समयबद्ध उपयोग और जवाबदेही तय करने के लिए कोई ठोस प्रणाली मौजूद नहीं है।

समिति ने ट्रैक रखरखाव के मशीनीकरण को लेकर भी चिंता व्यक्त की। रेलवे ने स्वचालित मशीनों की शुरुआत और दीर्घकालिक ब्लॉक योजना लागू करने की जानकारी दी, लेकिन पीएसी ने पाया कि कई स्थानों पर कर्मचारियों की कमी और समन्वय की कमी के कारण उपकरण लंबे समय तक निष्क्रिय पड़े रहे, जिससे दक्षता में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका।

निगरानी व्यवस्था के संबंध में रेल मंत्रालय का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किए जा रहे हैं और उन्हें डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से मॉनिटर किया जाता है। हालांकि पीएसी ने इस जवाब को सामान्य बताते हुए अधिक मजबूत तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि रेल पटरियों का कोई भी हिस्सा बिना जाँच के न रह जाए। समिति ने रेलवे सुरक्षा आयुक्त (Commission of Railway Safety) द्वारा स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट कराने की अपनी मांग भी दोहराई, जिस पर अभी तक स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रेल दुर्घटनाओं, विशेषकर पटरी से उतरने (डिरेलमेंट) की घटनाओं के पीछे मुख्य कारण इंजीनियरिंग संबंधी खामियाँ हैं। इनमें खराब ट्रैक रखरखाव और ट्रैक पैरामीटर में गड़बड़ी प्रमुख हैं, जबकि इसके बाद परिचालन संबंधी त्रुटियाँ जैसे अधिक गति भी जिम्मेदार पाई गई हैं।

रेल मंत्रालय ने ट्रैक नवीनीकरण, सिग्नलिंग उन्नयन और स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली कवच (KAVACH) की तैनाती जैसे कदमों का उल्लेख किया है। हालांकि पीएसी ने कहा कि इस प्रणाली को देशभर में लागू करने के लिए स्पष्ट और समयबद्ध योजना अभी सामने नहीं आई है।

अग्नि सुरक्षा के मामले में मंत्रालय ने बताया कि अब सभी कोचों में फायर एक्सटिंग्विशर लगाए जा चुके हैं, जो पहले की तुलना में एक महत्वपूर्ण सुधार है।

फिर भी समिति ने व्यापक अग्नि जोखिम आकलन और नियमित सुरक्षा ऑडिट के विवरण की मांग की है, जिससे स्पष्ट होता है कि निगरानी की प्रक्रिया अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।

कुल मिलाकर पीएसी का संदेश स्पष्ट है कि सुधार के कुछ संकेत अवश्य दिखाई दे रहे हैं, लेकिन सख्त क्रियान्वयन और जवाबदेही के बिना भारत के विशाल रेल नेटवर्क में मौजूद संरचनात्मक जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।