Staff Reporter नई दिल्ली |

एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को देश की राजधानी में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की।

लगभग एक घंटे तक चली इस बैठक में विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के भविष्य और आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोगी दलों के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करने पर चर्चा होने की खबर है।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब ममता बनर्जी अपनी ही पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और आंतरिक दबाव का सामना कर रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर बदलते समीकरणों के कारण ही ममता बनर्जी नए राजनीतिक विकल्पों की तलाश और विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने के प्रयासों में जुटी हैं।

पार्टी के भीतर बगावत के संकेत

सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी के सामने राजनीतिक रास्ते लगातार सीमित होते जा रहे हैं, क्योंकि पार्टी नेताओं का एक धड़ा लगातार उनके नेतृत्व को चुनौती दे रहा है। सूत्रों का दावा है कि टीएमसी सांसद काकोली दस्तीदार की अगुवाई में एक बागी गुट पार्टी पर अपना दावा ठोकने की तैयारी कर रहा है और यह गुट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन दे सकता है।

बागी गुट की संभावित रणनीति इस प्रकार है:

  • स्पीकर से मुलाकात: सूत्रों के अनुसार, काकोली दस्तीदार बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) से मिलकर अपने गुट को ‘असली’ तृणमूल कांग्रेस घोषित करने की मांग कर सकती हैं।
  • सांसदों का गणित: इस बागी गुट को 17 सांसदों का समर्थन हासिल बताया जा रहा है, जो कि दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत कार्रवाई से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से कम है।

इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद दोनों ही पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। गौर करने वाली बात यह रही कि ममता बनर्जी इस चर्चा के लिए पार्टी के किसी भी अन्य वरिष्ठ नेता को साथ नहीं लाई थीं, वे अकेले ही पहुंची थीं। सूत्रों के मुताबिक, सोनिया गांधी के साथ-साथ राहुल गांधी भी पूरी बातचीत के दौरान मौजूद रहे।