Last Updated on March 26, 2026 2:00 pm by INDIAN AWAAZ


लोक-धर्मोत्सव 2026: 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव पर उमड़ा जनसैलाब, ‘लोक सेवा रत्न’ से सम्मानित हुईं विभूतियां

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता

राजधानी के मावलंकर सभागार में आयोजित ‘लोक-धर्मोत्सव 2026’ में भगवान महावीर के 2625वें जन्म कल्याणक के अवसर पर मानवता और शांति का जयघोष गूंजा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि आज जब पूरी दुनिया युद्ध, हिंसा और बढ़ती असहिष्णुता के दौर से गुजर रही है, तब भगवान महावीर का अहिंसा और शांति का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है।

बिहार बने वैश्विक शांति की भूमि

चिराग पासवान ने कहा कि भगवान महावीर की जन्मस्थली बिहार की पवित्र धरा में वह शक्ति है, जो अशांत विश्व को शांति की राह दिखा सकती है। उन्होंने जैन समुदाय से आह्वान किया कि बिहार को ‘शांति और अहिंसा की वैश्विक भूमि’ के रूप में स्थापित करने और महावीर की जन्मस्थली को एक भव्य अंतर्राष्ट्रीय तीर्थ केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए संगठित प्रयास किए जाएं।

‘जियो और जीने दो’ ही वैश्विक समाधान

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने महावीर के सिद्धांतों—अहिंसा, अनेकांत (विचारों की बहुलता), और अपरिग्रह—को वर्तमान वैश्विक संकट का एकमात्र समाधान बताया।

  • अरुण सिंह (सांसद व भाजपा महासचिव): “महावीर का दर्शन विश्व शांति की नींव बन सकता है। युद्ध के युग में उनका ‘अनेकांत’ का सिद्धांत वैचारिक मतभेदों को सुलझाने का सबसे बड़ा सूत्र है।”
  • मनोज तिवारी (सांसद व कलाकार): उन्होंने सुरीली प्रस्तुति के साथ कहा कि आज बिहार से अहिंसा और नैतिकता की ऐसी क्रांति की जरूरत है, जो राजनीति ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को नई दिशा दे सके।
  • सुरेश जैन (महासचिव, भारत विकास परिषद): उन्होंने महावीर के सिद्धांतों को वैश्विक स्तर पर अनिवार्य रूप से लागू करने पर जोर दिया।

विज्ञान ने दुनिया जीती, महावीर ने मन जीतना सिखाया

महावीरायतन फाउंडेशन के संस्थापक स्वामी देवेंद्र ब्रह्मचारी (गुरुजी) ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा, “आज इंसान ने विज्ञान के जरिए दुनिया को तो जीत लिया है, लेकिन अपने मन को नहीं जीत पाया। यही अशांति का मूल कारण है। महावीर का मार्ग आत्म-विजय और आंतरिक शांति का मार्ग है।” इस अवसर पर सुखी परिवार फाउंडेशन के संस्थापक गणि राजेंद्र विजय जी महाराज भी उपस्थित रहे।

पुस्तक विमोचन और सम्मान समारोह

समारोह के दौरान प्रसिद्ध लेखक और पत्रकार ललित गर्ग द्वारा स्वामी देवेंद्र ब्रह्मचारी पर लिखित पुस्तक ‘निर्गुण चदरिया’ का विमोचन किया गया। श्री गर्ग ने कहा कि यह पुस्तक केवल एक जीवनी नहीं, बल्कि आत्म-बोध और मानवीय मूल्यों का दस्तावेज है।

समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को ‘लोक सेवा रत्न सम्मान’ से नवाजा गया। सम्मानित होने वालों में प्रमुख रूप से धर्मेंद्र जैन, चंद्र कुमार जाजोदिया, माणिकलाल मूलचंद शाह, सुरेश पूनमिया, मनोज जैन इशिता, सोहन गिरी और ललित गर्ग शामिल रहे।

सांस्कृतिक छटा और सफल संचालन

कार्यक्रम का कुशल संचालन ‘आवाज के जादूगर’ अनुराग जैन ने किया। समारोह में अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भारत की ‘विविधता में एकता’ और महावीर के दर्शन को जीवंत किया गया। अंततः, लोक-धर्मोत्सव 2026 केवल एक धार्मिक आयोजन न रहकर मानवीय मूल्यों, पारिवारिक संस्कृति और अहिंसा के एक राष्ट्रीय उत्सव के रूप में संपन्न हुआ।