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झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश पर तत्काल रोक लगा दी है, जिसमें झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11वीं, 12वीं और 13वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा तथा फूड सेफ़्टी ऑफिसर परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि परीक्षा देकर चयनित उम्मीदवारों को सरकार बाहर नहीं कर सकती, भले ही उनमें से कुछ पर सवाल उठे हों। कोर्ट ने सरकार से विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और इस मामले की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने का आदेश भी दिया है। अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

इस मामले में डिप्टी कलेक्टर सोनम कुमारी और सौरभ सिंह ने याचिका दायर की थी। सोनम कुमारी ने बताया कि उन्होंने जेपीएससी परीक्षा में चयनित होने के बाद बिहार में शिक्षक की नौकरी छोड़कर झारखंड में योगदान दिया था। उन्हें नवंबर 2025 में नियुक्ति पत्र मिला और वे हजारीबाग जिले में डिप्टी कलेक्टर के रूप में कार्यरत थीं। याचिका में कहा गया कि सरकार ने अधिसूचना संख्या 5404/18.8.2026 के माध्यम से परीक्षा रद्द कर दी, जो अनुचित है।

सरकार के इस फैसले से करीब 200 नव नियुक्त उप समाहर्ताओं की ट्रेनिंग बीच में ही रोक दी गई है। श्रीकृष्ण लोक प्रशासन प्रशिक्षण संस्थान से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें जिलों में प्रोबेशन पर भेजा गया था। देवघर स्थित बाबा धाम में 40 और दुमका के बासुकीनाथ में 23 प्रोबेशन उप समाहर्ताओं को विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात किया गया था। परीक्षा रद्द होने के बाद तकनीकी रूप से उनकी नियुक्ति समाप्त हो गई और उन्हें ड्यूटी से हटा दिया गया है। अब सभी उप समाहर्ता असमंजस की स्थिति में हैं और रांची पहुंचकर अपनी नौकरी को लेकर स्पष्टता चाहते हैं।