Last Updated on March 12, 2026 10:19 pm by INDIAN AWAAZ

AMN / BIZ DESK

पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ दी है। युद्ध के गहराते बादलों और कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग से घबराए निवेशकों ने गुरुवार को जमकर बिकवाली की। इसके चलते सेंसेक्स 829.29 अंक लुढ़क कर 76,034.42 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 227.70 अंक गिरकर 23,639 के स्तर पर आ गया।

बाजार की इस गिरावट के बीच भारतीय मुद्रा में भी ऐतिहासिक गिरावट देखी गई। रुपया 92.19 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और विदेशी निवेशकों (FII) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने घरेलू बाजार पर दोहरा दबाव बनाया है।


सेक्टर का हाल: कहां दिखी हरियाली, कहां छाई मायूसी?

युद्ध की स्थिति ने ऑटो और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई है, जबकि एनर्जी सेक्टर के लिए यह संकट तेजी का कारण बना।

सेक्टरप्रदर्शनप्रमुख शेयर
ऑटो (Auto)🔴 -3%M&M (-4.39%), आयशर मोटर्स (-3.92%), मारुति (-3.72%), टाटा मोटर्स (-3.30%)
एनर्जी (Energy)🟢 +1.93%कोल इंडिया (+5.20%), NTPC (+2.91%), पावर ग्रिड (+1.74%)
बैंकिंग (Bank Nifty)🔴 -1.1%बैंक निफ्टी 55,100 पर बंद; बजाज फाइनेंस में 3.44% की गिरावट।
आईटी/फिनटेक🟢 बढ़तटेक महिंद्रा (+1.49%) और जियो फाइनेंशियल (+1.38%)।

कच्चे तेल ने बिगाड़ा गणित: $100 के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड

युद्ध के कारण परिवहन और तेल बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों ने ब्रेंट क्रूड को सुबह के कारोबार में $100 प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया। हालांकि, बाद में यह $90.63 के आसपास स्थिर हुआ, लेकिन एक दिन में 3.87% की यह बढ़त भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए चिंता का विषय है। इससे देश का आयात बिल बढ़ेगा, जिसका सीधा असर महंगाई और व्यापार घाटे पर पड़ेगा।

एक्सपर्ट्स की राय: अभी और बढ़ सकती है हलचल

अजीत मिश्रा (SVP, रेलिगेयर ब्रोकिंग): “पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मुद्रास्फीति (inflation) और मुद्रा की कमजोरी जैसी चुनौतियां पेश कर रही हैं।”

सतीश कुमार (MD, इनक्रेड रिसर्च): “युद्ध के कारण माल ढुलाई (logistics) में बाधा आ रही है। खासतौर पर फार्मा सेक्टर के लिए कच्चे माल (API) की कमी हो सकती है, जिससे दवाओं की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा।”


क्या है आगे का रास्ता?

तकनीकी चार्ट पर निफ्टी के लिए 23,300–23,500 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट है। अगर बाजार 23,500 के नीचे फिसलता है, तो गिरावट 23,000 तक जा सकती है। जानकारों का मानना है कि जब तक निफ्टी 23,850 के ऊपर नहीं जाता, तब तक किसी बड़े सुधार की उम्मीद कम है।

1. टाटा मोटर्स (Tata Motors): दबाव में दिग्गज

ऑटो सेक्टर गुरुवार को सबसे ज्यादा प्रभावित रहा और टाटा मोटर्स इसमें पीछे नहीं रहा।

  • गिरावट का मुख्य कारण: टाटा मोटर्स का बड़ा कारोबार अंतरराष्ट्रीय स्तर (खासकर JLR – Jaguar Land Rover) पर निर्भर है। पश्चिम एशिया में तनाव से रसद (Logistics) और सप्लाई चेन प्रभावित होने का डर है। साथ ही, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की डिमांड पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालती हैं।
  • तकनीकी स्तर: शेयर ₹324.30 पर बंद हुआ है। चार्ट पर यह अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल के करीब है।
  • चेतावनी: यदि सप्लाई चेन में और रुकावट आती है, तो मार्जिन पर असर पड़ सकता है।

2. रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries): दोधारी तलवार

रिलायंस के लिए मौजूदा स्थिति “मिले-जुले” परिणाम लेकर आती है:

  • फायदा (O2C Business): कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक स्तर पर रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) बढ़ने से रिलायंस के तेल-से-रसायन (O2C) कारोबार को फायदा हो सकता है। जब तेल महंगा होता है, तो रिफाइनरी कंपनियों का मुनाफा अक्सर बढ़ जाता है।
  • नुकसान (Market Sentiment): एक ‘इंडेक्स हैवीवेट’ होने के नाते, जब विदेशी निवेशक (FIIs) भारत से पैसा निकालते हैं, तो रिलायंस में भारी बिकवाली देखी जाती है। इसके अलावा, जियो फाइनेंशियल (Jio Financial) में आज 1.38% की बढ़त देखी गई, जो रिलायंस ग्रुप के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

तुलनात्मक चार्ट (Quick Glance)

स्टॉकमौजूदा स्थितिनिवेशकों के लिए सलाह
टाटा मोटर्स🔴 मंदी के संकेत₹315-320 के स्तर पर नजर रखें; लंबी अवधि के लिए “Buy on Dips” बेहतर।
रिलायंस🟡 न्यूट्रल/स्थिरकच्चे तेल की कीमतों के साथ इसमें उतार-चढ़ाव बना रहेगा।

अगला कदम: रणनीति क्या हो?

मौजूदा माहौल में ‘लंपसम’ (एक साथ भारी निवेश) के बजाय SIP मोड अपनाना बेहतर है। बाजार अभी किसी भी दिशा में मुड़ने के लिए न्यूज़ हेडलाइंस का इंतज़ार कर रहा है।