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नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh ने कहा कि भारत जल्द ही Russia के बाद दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा, जो वाणिज्यिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करेगा। यह भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

सांसदों और विधायकों के लिए आयोजित स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) पर कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि Kalpakkam स्थित 500 मेगावाट क्षमता वाला प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) 6 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक ‘फर्स्ट क्रिटिकलिटी’ हासिल कर चुका है।

इस रिएक्टर को Indira Gandhi Centre for Atomic Research (IGCAR) ने डिजाइन किया है और BHAVINI द्वारा इसका निर्माण किया गया है। यह भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत का प्रतीक है और यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड ईंधन का उपयोग करते हुए जितना ईंधन खर्च करता है, उससे अधिक उत्पन्न करता है।

डॉ. सिंह ने कहा कि इसके पूर्ण रूप से चालू होने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जिनके पास उन्नत फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक है। वर्तमान में इस क्षेत्र में रूस अग्रणी है, जबकि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, जर्मनी और चीन जैसे देशों ने अतीत में इस तकनीक पर काम किया, लेकिन उनके अधिकांश कार्यक्रम अब बंद हो चुके हैं।

उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि भारत को अपने विशाल थोरियम भंडार के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करेगी, जो परमाणु कार्यक्रम के तीसरे चरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

केंद्रीय मंत्री ने जोर दिया कि स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में परमाणु ऊर्जा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी और यह 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने तथा 2070 तक ‘नेट ज़ीरो’ लक्ष्य को पूरा करने में सहायक होगी। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों को भविष्य में निरंतर और विश्वसनीय स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता होगी, जिसमें परमाणु ऊर्जा अहम भूमिका निभाएगी।

उन्होंने स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) पर भी जोर देते हुए कहा कि सरकार की “न्यूक्लियर मिशन” योजना के तहत ₹20,000 करोड़ के निवेश से 2033 तक पांच SMR विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही SHANTI Act जैसे नीतिगत कदमों के जरिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

डॉ. सिंह ने कहा कि SMR औद्योगिक उपयोग, घनी आबादी वाले क्षेत्रों, दूरदराज के इलाकों और पुराने थर्मल पावर प्लांट्स के पुन: उपयोग के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित होंगे।

अंत में उन्होंने कहा कि परमाणु, नवीकरणीय और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का संतुलित मिश्रण ही भारत को सतत विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्यों तक पहुंचाने में सहायक होगा।