Last Updated on January 7, 2026 6:29 pm by INDIAN AWAAZ

आर. सूर्यमूर्ति

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा मंगलवार को जारी पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, मार्च 2026 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत की अर्थव्यवस्था के 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। यह FY25 में अस्थायी रूप से दर्ज 6.5 प्रतिशत की वृद्धि की तुलना में तेज़ रिकवरी को दर्शाता है और वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित करता है।

इन अनुमानों के साथ भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। वृद्धि को मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र की मजबूत गतिविधियों और सार्वजनिक व निजी निवेश के निरंतर प्रवाह से बल मिला है, जबकि कृषि और यूटिलिटी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत सीमित बढ़त दर्ज की गई है।

स्थिर 2011-12 कीमतों पर भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) FY26 में ₹201.90 लाख करोड़ रहने का अनुमान है, जो FY25 में ₹187.97 लाख करोड़ था। वहीं, नाममात्र GDP में 8.0 प्रतिशत की वृद्धि के साथ इसके ₹357.14 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो घटती महंगाई और स्थिर वास्तविक गतिविधियों को दर्शाता है।

सेवा क्षेत्र की अगुवाई

मूल कीमतों पर सकल मूल्य वर्धन (GVA) में FY26 के दौरान 7.3 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि का अनुमान है, जिसमें सेवा क्षेत्र की भूमिका सबसे अहम रही है। वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट, पेशेवर सेवाएं तथा लोक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाओं में 9.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि अनुमानित है। व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और प्रसारण से जुड़ी सेवाओं में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जो घरेलू मांग में मजबूती और यात्रा व लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सुधार को दर्शाता है।

कुल मिलाकर, तृतीयक क्षेत्र की गतिविधियों में वास्तविक रूप से 9 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि का अनुमान है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि महामारी के बाद भारत की आर्थिक वृद्धि लगातार सेवा क्षेत्र-आधारित होती जा रही है।

उद्योग, निर्माण और कृषि

द्वितीयक क्षेत्र के प्रमुख स्तंभ—विनिर्माण और निर्माण—दोनों में 7.0 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि का अनुमान है। इसे सरकारी बुनियादी ढांचा खर्च और कॉरपोरेट बैलेंस शीट में सुधार का समर्थन मिल रहा है। समग्र रूप से द्वितीयक क्षेत्र की GVA वृद्धि लगभग 7 प्रतिशत रहने की संभावना है।

कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों में 3.1 प्रतिशत की अपेक्षाकृत सीमित वृद्धि का अनुमान है, जो पिछले मजबूत वर्षों के बाद सामान्यीकरण और क्षेत्रवार असमान मानसून परिणामों को दर्शाता है। बिजली, गैस और जल आपूर्ति सहित यूटिलिटी क्षेत्र में 2.1 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है, जो ऊर्जा-प्रधान औद्योगिक मांग में नरमी का संकेत देता है।

निवेश और उपभोग

व्यय पक्ष से देखें तो सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF), जो निवेश का प्रमुख संकेतक है, FY26 में 7.8 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि के साथ बढ़ने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 7.1 प्रतिशत से अधिक है। यह सार्वजनिक क्षेत्र के साथ-साथ बड़े निजी उद्योगों द्वारा पूंजीगत व्यय जारी रहने का संकेत देता है।

निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE), जो GDP का आधे से अधिक हिस्सा बनाता है, में 7.0 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि का अनुमान है। हालांकि उपभोग वृद्धि मजबूत बनी हुई है, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह अभी भी असमान है, जहां शहरी मांग ग्रामीण मांग से बेहतर प्रदर्शन कर रही है।

सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (GFCE) में 5.2 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि का अनुमान है, जो राजकोषीय संतुलन के प्रयासों के बीच राजस्व व्यय की तुलना में बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता देने की नीति को दर्शाता है।

विदेश व्यापार और आय संकेतक

वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में 6.4 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि का अनुमान है, जबकि आयात में 14.4 प्रतिशत की तेज़ बढ़ोतरी अनुमानित है। विश्लेषकों के अनुसार, बढ़ता आयात FY26 में चालू खाते के घाटे पर दबाव डाल सकता है, विशेषकर यदि वैश्विक कमोडिटी कीमतें बढ़ती हैं।

प्रति व्यक्ति GDP FY26 में स्थिर कीमतों पर ₹1,42,119 रहने का अनुमान है, जो FY25 में ₹1,33,501 था। इससे प्रति व्यक्ति वास्तविक आय में लगभग 6.5 प्रतिशत की वृद्धि का संकेत मिलता है। प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है, जो औसत आय में धीरे-धीरे लेकिन स्थिर सुधार को दर्शाती है।

अर्थशास्त्रियों की राय

अर्थशास्त्रियों ने 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर का स्वागत करते हुए इसे हालिया अनुमानों के अनुरूप या उससे थोड़ा बेहतर बताया है। कई विश्लेषकों का कहना है कि FY26 की पहली छमाही में औसतन लगभग 8 प्रतिशत की GDP वृद्धि ने इस अनुमान को मजबूती दी है।

रेटिंग एजेंसियों और निजी अर्थशास्त्रियों ने मौजूदा दौर को भारत के लिए एक “गोल्डीलॉक्स चरण” बताया है, जिसमें स्थिर वृद्धि, घटती महंगाई और बेहतर राजकोषीय संकेतक शामिल हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक ने भी पहले FY26 के लिए अपने विकास अनुमान को बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया था।

NSO ने स्पष्ट किया है कि ये पहले अग्रिम अनुमान नवंबर 2025 तक उपलब्ध आंशिक आंकड़ों पर आधारित हैं और आगे और आंकड़े आने पर इनमें संशोधन किया जाएगा। दूसरा अग्रिम अनुमान और संशोधित GDP आंकड़े 27 फरवरी 2026 को जारी किए जाएंगे।

फिलहाल, FY26 के ये अनुमान केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए एक मजबूत आर्थिक पृष्ठभूमि तैयार करते हैं, जहां नीति-निर्माताओं के सामने विकास को समर्थन देने और राजकोषीय संतुलन बनाए रखने की दोहरी चुनौती रहेगी।