Last Updated on January 10, 2026 1:35 am by INDIAN AWAAZ

AMN कोलकाता/नई दिल्ली | समाचार डेस्क

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया कार्रवाई को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताते हुए सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई दी, जहां टीएमसी सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।

कोलकाता में ममता बनर्जी ने खुद एक बड़े विरोध मार्च का नेतृत्व करते हुए आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष को डराने और आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ईडी की कार्रवाई लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर हमला है। ममता ने दावा किया कि यह कदम राज्य सरकार और टीएमसी की राजनीतिक गतिविधियों को बाधित करने की साजिश का हिस्सा है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बंगाल की जनता पहले भी ऐसे दबावों का जवाब दे चुकी है और आगे भी देगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से शांतिपूर्ण लेकिन मजबूत संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।

इस बीच, दिल्ली में टीएमसी के कई सांसदों ने केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ सांसदों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया। टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव आगामी चुनावों से पहले केंद्र और राज्य के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है। जहां भाजपा इसे कानून के तहत की जा रही कार्रवाई बता रही है, वहीं टीएमसी इसे खुली राजनीतिक प्रतिशोध की नीति करार दे रही है।

ईडी कार्रवाई, सड़कों पर प्रदर्शन और दिल्ली में टकराव के साथ यह मुद्दा अब केवल कानूनी नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है, जिसने बंगाल से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक हलचल पैदा कर दी है।