राहुल गांधी घायल छात्र को मीडिया के सामने लाए, शिक्षा मंत्री को हटाने, प्रधानमंत्री से माफी और कथित कार्रवाई की जांच की मांग

स्टाफ रिपोर्टर /नई दिल्ली
प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और छात्र आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को केंद्र सरकार के खिलाफ अपना हमला और तेज कर दिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से हटाने की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों से सार्वजनिक माफी मांगने और प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से बल प्रयोग करने वाले सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की।
संसद मार्ग स्थित कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ के बाहर आयोजित प्रेस वार्ता में राहुल गांधी अपने साथ साहिल नामक एक छात्र प्रदर्शनकारी को लेकर आए। राहुल ने दावा किया कि 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा चलाई गई कथित पेलेट गन से साहिल गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी एक आंख बुरी तरह प्रभावित हुई है।
पत्रकारों को चोट के निशान दिखाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यह केवल एक छात्र की कहानी नहीं है, बल्कि देश के हजारों युवाओं के साथ हो रहे व्यवहार की तस्वीर है।
उन्होंने कहा, “यह हमारे देश का भविष्य है। हजारों युवाओं पर लाठीचार्ज किया गया, उन पर पेलेट गन चलाई गई, जबकि वे केवल शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। सरकार को छात्रों पर हमला बंद करना चाहिए।”
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों का समाधान करने के बजाय छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वे देश की शिक्षा व्यवस्था के पतन का प्रतीक बन चुके हैं और उन्हें तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए।
राहुल ने कहा, “धर्मेंद्र प्रधान एक ‘आपराधिक शिक्षा मंत्री’ हैं। उनके कार्यकाल में लगातार पेपर लीक हो रहे हैं, लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है और अब विरोध करने वाले छात्रों पर कथित तौर पर गोलियां और लाठियां चलाई जा रही हैं।”
उन्होंने दावा किया कि साहिल ने पुलिस भर्ती परीक्षा दी थी, लेकिन कथित पेपर लीक के कारण उसका भविष्य प्रभावित हुआ। राहुल ने कहा कि छात्र के माता-पिता ने मेहनत की कमाई से उसे पढ़ाया और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराई, लेकिन सरकार ने उसके सपनों को ही कुचल दिया।
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल हटाया जाए, छात्रों पर कथित रूप से पेलेट गन चलाने और लाठीचार्ज करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
उन्होंने कहा, “जिस शिक्षा मंत्री की वजह से छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए, उन्हें हटाया जाना चाहिए। जिन लोगों ने हमारे भविष्य पर गोलियां चलाईं और छात्रों को पीटा, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो पूरे तंत्र का नेतृत्व करते हैं, उन्हें हजारों छात्रों से माफी मांगनी चाहिए।”
राहुल गांधी ने कहा कि चिकित्सकों को अभी तक यह भरोसा नहीं है कि साहिल की घायल आंख की रोशनी पूरी तरह लौट पाएगी या नहीं। उन्होंने सरकार से छात्रों को डराने-धमकाने और उनके खिलाफ बल प्रयोग बंद करने की अपील की।
प्रेस वार्ता में मौजूद साहिल ने कहा कि वह केवल न्याय चाहता है। उसके अनुसार, उसकी दाहिनी आंख में लगे पेलेट निकालने और आंख की मरम्मत के लिए एक सर्जरी हो चुकी है, जबकि एक और ऑपरेशन होना बाकी है।
साहिल ने बताया कि घटना के बाद उसे पहले लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, फिर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में 21 जुलाई को बेहतर इलाज के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया।
इस घटना के बाद 20 जुलाई के छात्र आंदोलन के दौरान कथित रूप से पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से स्पष्ट रूप से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ उसके किसी भी जवान ने पेलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया। वहीं, उस दिन सुरक्षा व्यवस्था में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और उसकी रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की ओर से इस संबंध में सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
कांग्रेस का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार करने और छात्रों की शिकायतें दूर करने के बजाय सरकार विरोध प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए थे और अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप निराधार हैं।
छात्र आंदोलनों, कथित पेपर लीक और प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कार्रवाई को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। माना जा रहा है कि संसद के मौजूदा सत्र में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा, जहां विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है।
