हमारे विशेष संवाददाता से

राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को हाल के वर्षों के सबसे बड़े राजनीतिक प्रदर्शनों में से एक देखने को मिला, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़े हजारों प्रदर्शनकारी कथित नीट (NEET) पेपर लीक और देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी।

हालांकि पहले से घोषित ‘संसद चलो’ मार्च संसद भवन तक नहीं पहुंच सका, लेकिन प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ ने मध्य दिल्ली के बड़े हिस्से को अपने कब्जे में ले लिया। इससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई स्थानों पर हिंसक झड़पें हुईं, जिनमें लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले, बड़ी संख्या में घायल और कई लोगों की हिरासत जैसी घटनाएं सामने आईं।

मौके पर मौजूद संवाददाताओं के अनुसार, करीब 50,000 प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर, संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में एकत्र हुए। यह राजधानी में इस वर्ष हुए सबसे बड़े जन आंदोलनों में से एक माना जा रहा है। प्रदर्शन में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से आए छात्र, अभिभावक, शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। सोमवार को यह आंदोलन एक माह पूरा कर चुका है।

यह आंदोलन कथित परीक्षा अनियमितताओं, विशेष रूप से नीट पेपर लीक, के लिए जवाबदेही तय करने तथा शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग को लेकर चल रहा है। इस आंदोलन को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के लंबे समय से जारी अनिश्चितकालीन अनशन ने और गति दी है।

मध्य दिल्ली में सुरक्षा का अभूतपूर्व घेरा

प्रस्तावित संसद मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली के संवेदनशील क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी थी।

संसद मार्ग, पटेल चौक, टॉल्स्टॉय मार्ग तथा अन्य सरकारी भवनों के आसपास कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए गए थे। दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) तथा अर्द्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई थी, जबकि दंगा नियंत्रण वाहन भी प्रमुख स्थानों पर मौजूद थे।

दिल्ली पुलिस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि संसद मार्च के लिए न तो कोई अनुमति मांगी गई थी और न ही कोई अनुमति दी गई थी। पुलिस ने लोगों से निषेधाज्ञा का पालन करने की अपील भी की थी।

इन प्रतिबंधों के बावजूद सोमवार सुबह से ही हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर एकत्र होने लगे और बाद में संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों में तीखी झड़प

जब प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्ग और पटेल चौक के निकट लगाए गए बैरिकेड्स को पार करने का प्रयास किया, तो पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव शुरू हो गया।

पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई बार लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विभिन्न मार्गों को बंद कर दिए जाने के कारण प्रदर्शनकारी कई समूहों में बंट गए और मध्य दिल्ली के अलग-अलग स्थानों पर जमा हो गए।

दिनभर हुई बारिश भी प्रदर्शनकारियों के उत्साह को कम नहीं कर सकी। वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के लिए न्याय की मांग करते हुए नारे लगाते रहे।

घटनास्थल से सामने आए दृश्य में संसद मार्ग पर आंसू गैस के धुएं के बीच प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए सुरक्षा बलों को मोर्चा संभाले देखा गया।

पुलिस का आरोप—प्रदर्शनकारियों ने की हिंसा

दिल्ली पुलिस ने बाद में जारी एक विस्तृत बयान में आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने हिंसा की और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।

पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने बार-बार चेतावनी देने के बावजूद निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया और सुरक्षा कर्मियों पर पथराव किया।

पुलिस ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया, सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की और सार्वजनिक संपत्ति को व्यापक नुकसान पहुंचाया।

पुलिस के अनुसार, इस झड़प में 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें विशेष पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त और सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। कई महिला पुलिसकर्मी भी घायल हुईं।

पुलिस का यह भी कहना है कि झड़प के दौरान करीब 60 प्रदर्शनकारी भी घायल हुए।

अधिकारियों के अनुसार, हिंसा में 15 से 20 सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा।

पुलिस ने बताया कि करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है तथा भारतीय न्याय संहिता और अन्य संबंधित कानूनों के तहत दंगा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सहित विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की जा रही है।

सीजेपी ने पुलिस के आरोपों को किया खारिज

सीजेपी नेताओं ने पुलिस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और पुलिस ने बिना उकसावे के बल प्रयोग किया।

पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सरकार पर लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने का आरोप लगाया।

रांका ने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक में उन्होंने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं—

  • सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई।
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
  • कथित रूप से आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा।

हालांकि बैठक के कई घंटे बाद रांका ने कहा कि सरकार की ओर से इन मांगों पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

सीजेपी नेता अभिजीत दिपके ने घोषणा की कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा और पुलिस कार्रवाई से आंदोलन नहीं रुकेगा।

सरकार ने बातचीत का रास्ता खोला

तनावपूर्ण हालात के बीच केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पुष्टि की कि सरकार और सीजेपी प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई।

उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि प्रदर्शनकारियों की पहल पर सरकार ने बातचीत की और चर्चा दोपहर से पहले शुरू होकर कई घंटों तक चली।

इसी दौरान संसद भवन के भीतर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक की। इस बैठक में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल सहित अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बाहर सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए थीं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संसद भवन के कई प्रवेश द्वार अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए।

सोनम वांगचुक ने अनशन जारी रखने की घोषणा की

तीन सप्ताह से अधिक समय से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार की घटनाओं के बाद अपना अनशन जारी रखने की घोषणा की।

सफदरजंग अस्पताल से जारी संदेश में उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई की आलोचना की।

इससे पहले वांगचुक ने कहा था कि यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं, विशेषकर परीक्षा पत्र लीक की घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार करे अथवा विभिन्न दलों के सांसद संसद में यह मुद्दा उठाने का भरोसा दें, तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे।

उन्होंने यह भी कहा था कि यदि स्वास्थ्य कारणों से वह स्वयं उपस्थित न हो सकें तो सांसद अस्पताल आकर उन्हें यह आश्वासन दे सकते हैं।

सोमवार की घटनाओं के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अनशन फिलहाल जारी रहेगा।

आंदोलन में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी

सोमवार का प्रदर्शन केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा। इसमें अभिभावक, शिक्षक, पेशेवर, सेवानिवृत्त नागरिक और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

कई लोग पड़ोसी राज्यों से रातभर यात्रा कर दिल्ली पहुंचे थे।

हरियाणा के झज्जर से आई महिलाओं ने कहा कि वे अपने बच्चों के भविष्य के लिए इस आंदोलन का समर्थन करने आई हैं।

प्रदर्शनकारियों के हाथों में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, युवाओं के भविष्य और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ संदेश लिखी तख्तियां दिखाई दीं।

हालांकि कुछ समूहों ने अन्य राजनीतिक मुद्दे भी उठाए, लेकिन पूरे प्रदर्शन का मुख्य केंद्र शिक्षा सुधार और नीट विवाद ही बना रहा।

संसद सत्र के पहले दिन बढ़ा राजनीतिक दबाव

यह प्रदर्शन संसद के मानसून सत्र के पहले दिन हुआ, जिससे इसका राजनीतिक महत्व और बढ़ गया।

विपक्षी दल पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वे परीक्षा अनियमितताओं, युवाओं से जुड़े मुद्दों और शिक्षा व्यवस्था को संसद में प्रमुखता से उठाएंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोमवार का यह विशाल प्रदर्शन आने वाले दिनों में संसद के भीतर होने वाली बहसों को प्रभावित कर सकता है, विशेषकर यदि सरकार और आंदोलनकारी नेताओं के बीच बातचीत से कोई समाधान नहीं निकलता।

फिलहाल स्थिति नियंत्रण में, लेकिन आंदोलन जारी

देर शाम तक पुलिस ने संसद मार्ग और आसपास के अधिकांश क्षेत्रों को खाली करा दिया था, हालांकि पूरे इलाके में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती जारी रही।

पुलिस हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल लोगों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच कर रही है।

दूसरी ओर, सीजेपी नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें स्वीकार नहीं की जातीं, आंदोलन जारी रहेगा। इससे संकेत मिलते हैं कि मानसून सत्र के दौरान राजधानी में आगे भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं।

सोमवार की घटनाओं ने संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्मा दिया है। सरकार और आंदोलनकारी संगठन एक-दूसरे पर हालात बिगाड़ने का आरोप लगा रहे हैं।