Last Updated on November 6, 2026 8:08 pm by INDIAN AWAAZ

नई दिल्ली। ब्यूरो रिपोर्ट

वैश्विक बाजारों में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को शानदार प्रदर्शन किया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की जोरदार खरीदारी, रुपये में मजबूती, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी की उम्मीद और दिवाली से पहले सकारात्मक माहौल ने घरेलू बाजार को मजबूती प्रदान की। बैंकिंग और टेलीकॉम शेयरों में खरीदारी के दम पर सेंसेक्स 1,700 अंकों से अधिक उछल गया, जबकि निफ्टी एक बार फिर 25,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार पहुंच गया।

इस तेजी के साथ दोनों प्रमुख सूचकांकों ने लगातार सातवें कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज की। पिछले सात सत्रों में बीएसई सेंसेक्स 10.62 प्रतिशत और एनएसई निफ्टी 10.27 प्रतिशत मजबूत हुआ है। बाजार में इस तेजी को घरेलू निवेशकों के भरोसे और विदेशी पूंजी की वापसी का संकेत माना जा रहा है।

शुक्रवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,718.01 अंक यानी 2.17 प्रतिशत की छलांग लगाकर 81,028.02 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 भी 493.75 अंक यानी 2.01 प्रतिशत बढ़कर 25,030.35 पर पहुंच गया।

बाजार की तेजी में निजी क्षेत्र के बड़े बैंकों की प्रमुख भूमिका रही। आईसीआईसीआई बैंक के शेयर में 4.75 प्रतिशत और एचडीएफसी बैंक में 3.72 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। भारती एयरटेल का शेयर भी 2.45 प्रतिशत मजबूत हुआ। इन प्रमुख कंपनियों के शेयरों में खरीदारी से निफ्टी को ऊपर ले जाने में मदद मिली।

हालांकि, व्यापक बाजार में तेजी का असर दिखाई नहीं दिया। निफ्टी मिडकैप 150 सूचकांक 0.09 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 250 सूचकांक 0.85 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। इससे स्पष्ट हुआ कि बाजार की तेजी मुख्य रूप से चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित रही।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर कुल 2,141 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 1,438 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। 127 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। बाजार की इस कमजोर चौड़ाई से संकेत मिलता है कि बेंचमार्क सूचकांकों में जोरदार उछाल के बावजूद छोटे और मझोले शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा।

इस बीच, बाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला इंडिया विक्स 13.35 प्रतिशत बढ़कर 17.66 पर पहुंच गया। विक्स में यह तेजी बताती है कि बाजार में मजबूत बढ़त के बावजूद निवेशकों की चिंता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड खरीदारी से मिला सहारा

घरेलू शेयर बाजार में तेजी का एक प्रमुख कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों की जोरदार वापसी रही। विदेशी निवेशकों ने गुरुवार को भारतीय शेयरों में 14,975 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। यह करीब छह वर्षों में किसी एक कारोबारी दिन में उनकी सबसे बड़ी खरीदारी बताई गई है।

विदेशी पूंजी के इस बड़े प्रवाह से खासकर बड़ी कंपनियों के शेयरों को समर्थन मिला। पिछले कुछ समय से वैश्विक अनिश्चितताओं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण भारतीय बाजार दबाव में था। ऐसे में विदेशी निवेशकों की इस बड़ी खरीदारी ने बाजार की धारणा को मजबूत किया है।

हालांकि, बाजार की आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि विदेशी निवेशकों की खरीदारी कितनी निरंतर बनी रहती है। अमेरिकी ब्याज दरों का रुख, डॉलर की चाल, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे विदेशी निवेश के प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं।

रुपये में मजबूती ने भी बाजार को सहारा दिया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 93.90 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 94.41 पर बंद हुआ था। रुपये की यह मजबूती छह महीने का उच्च स्तर बताई गई है। इससे आयात लागत और विदेशी पूंजी से जुड़ी चिंताओं में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी की संभावना भी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक रही। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की उत्पादन लागत पर दबाव कम हो सकता है।

बैंकिंग और टेलीकॉम शेयरों में जोरदार खरीदारी

शुक्रवार की तेजी में निजी क्षेत्र के बैंक सबसे बड़े सहायक साबित हुए। आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक में मजबूत खरीदारी से बाजार को दिशा मिली। टेलीकॉम क्षेत्र की प्रमुख कंपनी भारती एयरटेल के शेयर में भी तेजी रही।

बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी ने छोटे और मझोले शेयरों में जारी कमजोरी के असर को काफी हद तक कम कर दिया। इससे यह भी संकेत मिला कि अनिश्चित वैश्विक माहौल में निवेशक फिलहाल मजबूत वित्तीय स्थिति और बेहतर आय संभावनाओं वाली बड़ी कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में गिरावट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में जोखिम लेने की प्रवृत्ति अभी व्यापक स्तर पर नहीं लौटी है और निवेशक चुनिंदा शेयरों में ही पैसा लगा रहे हैं।

वैश्विक बाजारों में टेक्नोलॉजी शेयरों की भारी बिकवाली

भारतीय बाजार के मजबूत प्रदर्शन के विपरीत वैश्विक शेयर बाजारों में शुक्रवार को दबाव बना रहा। अमेरिका से शुरू हुई टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों की बिकवाली एशियाई और यूरोपीय बाजारों तक फैल गई।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के ऊंचे मूल्यांकन, डेटा सेंटर पर भारी निवेश की लाभप्रदता और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर संभावित नियामकीय निगरानी को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है। इसके चलते टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली हुई।

अमेरिकी बाजार में गुरुवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। एसएंडपी 500 सूचकांक 4.36 प्रतिशत टूटकर 7,353.73 पर आ गया। अप्रैल 2025 के बाद यह इसकी सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट थी। डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 1,833 अंक यानी 3.44 प्रतिशत गिरकर 51,523.06 पर बंद हुआ। वहीं, नैस्डैक कंपोजिट में 5.52 प्रतिशत की भारी गिरावट आई और यह 24,315 पर आ गया।

नैस्डैक में गिरावट के कारण सूचकांक अक्टूबर में दर्ज अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से 10 प्रतिशत से अधिक नीचे आ गया। इस तरह यह तकनीकी रूप से करेक्शन के दायरे में पहुंच गया।

सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली देखने को मिली। एनवीडिया का शेयर 9 प्रतिशत से अधिक गिर गया, जबकि क्वालकॉम में भी 9 प्रतिशत की गिरावट आई। क्वालकॉम के चौथी तिमाही के स्मार्टफोन चिप कारोबार से संबंधित बिक्री अनुमान बाजार की उम्मीदों से कमजोर रहे।

सैंडिस्क के शेयर में 22.3 प्रतिशत, ल्यूमेंटम में 18.7 प्रतिशत और माइक्रोन टेक्नोलॉजी में 17.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, ऐपलविन के शेयर ने बाजार के रुख के विपरीत करीब 31 प्रतिशत की छलांग लगाई। कंपनी ने तिमाही मुनाफे के बेहतर नतीजे पेश किए थे।

एशियाई बाजारों में भी टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों पर दबाव रहा। यूरोपीय बाजारों में भी शुक्रवार को गिरावट का सिलसिला जारी रहा। अमेरिकी बाजार के वायदा कारोबार में डाउ जोंस फ्यूचर्स 438 अंक नीचे था, जो अमेरिकी शेयर बाजारों में कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहा था।

कच्चा तेल, रुपया और सोने की कीमतें

कमोडिटी बाजार में ब्रेंट क्रूड का दिसंबर 2026 वायदा भाव 70 सेंट यानी 0.71 प्रतिशत गिरकर 97.59 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में नरमी महत्वपूर्ण है। इससे महंगाई, चालू खाते के घाटे और कंपनियों की लागत पर दबाव कम हो सकता है।

विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 93.90 पर पहुंच गया। हालांकि, डॉलर इंडेक्स 0.41 प्रतिशत बढ़कर 102.01 पर था। डॉलर इंडेक्स दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाता है।

सोने की कीमतों में भी गिरावट रही। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर 4 दिसंबर 2026 की डिलीवरी वाला सोना वायदा 1.29 प्रतिशत गिरकर 1,42,242 रुपये पर आ गया।

भारत सरकार की 10 वर्षीय बेंचमार्क प्रतिभूति का प्रतिफल पिछले सत्र के 7.192 प्रतिशत से घटकर 7.185 प्रतिशत पर आ गया। वहीं, अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल 0.23 प्रतिशत बढ़कर 4.841 प्रतिशत पर पहुंच गया।

भारती एयरटेल और टाइटन के शेयर चमके

कंपनियों के तिमाही नतीजों के कारण शुक्रवार को कई शेयरों में उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

भारती एयरटेल का शेयर 2.45 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है। असाधारण मदों से पहले कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 32.7 प्रतिशत बढ़कर 9,015 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 6,792 करोड़ रुपये था।

कंपनी का समेकित राजस्व भी 16.7 प्रतिशत बढ़कर 60,878 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 52,145 करोड़ रुपये था। जून तिमाही के 58,539 करोड़ रुपये के मुकाबले सितंबर तिमाही में राजस्व में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

टाइटन कंपनी का शेयर 3.42 प्रतिशत मजबूत हुआ। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ दूसरी तिमाही में 113.66 प्रतिशत बढ़कर 2,393 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 1,120 करोड़ रुपये था। कंपनी का परिचालन से राजस्व भी 23.55 प्रतिशत बढ़कर 20,337 करोड़ रुपये पहुंच गया।

साई लाइफ साइंसेज के शेयर में 11.95 प्रतिशत की जोरदार तेजी दर्ज की गई। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर 98 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, परिचालन से राजस्व 22.7 प्रतिशत बढ़कर 659 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 537 करोड़ रुपये था।

थर्मैक्स और रुबिकॉन रिसर्च में गिरावट

दूसरी ओर, थर्मैक्स का शेयर 17.27 प्रतिशत टूट गया। कंपनी के तिमाही नतीजों में मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई। दूसरी तिमाही में उसका समेकित शुद्ध लाभ 4.28 प्रतिशत घटकर 114.54 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 119.66 करोड़ रुपये था।

हालांकि, कंपनी का परिचालन से राजस्व 11.4 प्रतिशत बढ़कर 2,755.87 करोड़ रुपये पहुंच गया। राजस्व में वृद्धि के बावजूद मुनाफे में गिरावट से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।

रुबिकॉन रिसर्च का शेयर 4.67 प्रतिशत गिर गया। इससे पहले पिछले पांच कारोबारी सत्रों में कंपनी के शेयर में 11.51 प्रतिशत की तेजी आई थी। कंपनी ने दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय नतीजे पेश किए। उसका समायोजित समेकित शुद्ध लाभ 68 प्रतिशत बढ़कर 90.48 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 53.85 करोड़ रुपये था।

कंपनी का परिचालन से राजस्व भी 39.9 प्रतिशत बढ़कर 576.38 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 412.02 करोड़ रुपये था। जून तिमाही के 534.34 करोड़ रुपये के मुकाबले सितंबर तिमाही में राजस्व 7.9 प्रतिशत बढ़ा। मजबूत नतीजों के बावजूद शेयर में गिरावट को हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली से जोड़कर देखा जा रहा है।

अमेरिकी रोजगार आंकड़ों और फेडरल रिजर्व पर नजर

आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिका के अक्टूबर महीने के रोजगार आंकड़ों पर रहेगी। ये आंकड़े अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं।

इसके अलावा फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की महंगाई और ब्याज दरों पर टिप्पणियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगी। क्लीवलैंड फेड की अध्यक्ष बेथ हैमैक ने कहा है कि महंगाई को केंद्रीय बैंक के लक्ष्य तक लाने के लिए ब्याज दरों को प्रतिबंधात्मक स्तर पर बनाए रखना जरूरी है।

इससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती को लेकर जल्दबाजी करने के पक्ष में नहीं है। ऊंची ब्याज दरों का असर वैश्विक पूंजी प्रवाह और शेयर बाजारों के मूल्यांकन पर पड़ सकता है।

भारतीय बाजार के लिए आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के तिमाही नतीजे महत्वपूर्ण रहेंगे। इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि मौजूदा तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित रहती है या मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी लौटती है।

8 नवंबर को मुहूर्त कारोबार

इस बीच, दिवाली के अवसर पर लक्ष्मी पूजन के दिन रविवार, 8 नवंबर को भारतीय शेयर बाजारों में विशेष मुहूर्त कारोबार आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही संवत 2083 की शुरुआत होगी।

एक्सचेंजों द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, प्री-ओपन सत्र दोपहर 2:05 बजे से 2:20 बजे तक चलेगा। इसके बाद दोपहर 2:20 बजे से 3:30 बजे तक विशेष मुहूर्त कारोबार होगा।

मुहूर्त कारोबार भारतीय शेयर बाजार की पुरानी परंपरा है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में निवेशक नए संवत की शुरुआत शुभ निवेश के साथ करते हैं। लगातार सात कारोबारी सत्रों की तेजी के बाद निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बाजार नए संवत में किस रुख के साथ प्रवेश करता है।

अस्वीकरण: यह समाचार केवल सूचना और शैक्षणिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इसे किसी शेयर या वित्तीय उत्पाद में निवेश की सलाह अथवा खरीद-बिक्री की सिफारिश नहीं माना जाना चाहिए। निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।