Last Updated on October 21, 2026 1:24 am by INDIAN AWAAZ

जेल में बंद प्रवक्ताओं को बताया ‘असली नेता’

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने त्योहारों के दौरान आंदोलन में विराम के संकेत देते हुए समर्थकों से कुछ दिनों तक अपने परिवारों के साथ समय बिताने की अपील की है। उन्होंने जेल में बंद पार्टी के प्रवक्ताओं आशुतोष रंका और सौरव दास के लिए दुआ करने तथा नफरत से दूर रहने का आग्रह करते हुए कहा कि आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत शांति, करुणा और आपसी प्रेम है।

दशहरा के अवसर पर जारी करीब 16 मिनट के वीडियो संदेश में दिपके ने रंका और दास को आंदोलन का ‘असली नेता’ बताया। उन्होंने दोनों के प्रति भावुकता जाहिर करते हुए कहा कि आंदोलन को दिशा देने और उसके फैसले लेने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। दिपके ने सीजेपी के विरोध प्रदर्शनों की तुलना नेपाल, बांग्लादेश और फ्रांस में हुई हिंसक घटनाओं से किए जाने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि आंदोलन ने तमाम मुश्किलों के बावजूद शांतिपूर्ण रास्ता अपनाया है।

दिपके ने अपने संदेश की शुरुआत आंदोलन और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों में शामिल लोगों का आभार जताते हुए की। प्रदर्शनकारियों ने निर्वाचन आयोग के कामकाज के कथित एकतरफा तरीके और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है।

10 अक्टूबर को प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और बैरिकेड लगाए गए थे। इस दौरान दिपके, दास और रंका समेत बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया था।

रंका और दास को कथित तौर पर शांति बांड की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप में 13 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था। 14 अक्टूबर को उन्हें पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। सोमवार को उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई।

दिपके ने कहा कि उन्होंने दोनों प्रवक्ताओं के परिवारों से बात की है और उनके परिजनों ने समर्थकों से चिंता नहीं करने को कहा है।

उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि आप सभी के लिए भी हालात उतने ही मुश्किल हैं, जितने सौरव और आशु (आशुतोष रंका) के लिए। मैंने देखा है कि हमारे कितने स्वयंसेवकों को सड़कों पर पीटा गया और हिरासत में लिया गया। लेकिन हमसे ज्यादा मुश्किल हमारे परिवारों के लिए है।”

समर्थकों से कुछ दिनों तक परिवार के साथ रहने की अपील करते हुए उन्होंने कहा, “इसलिए मैं अपने सभी कॉकरोचों से अनुरोध करता हूं कि कुछ दिनों तक अपने परिवारों के साथ समय बिताएं। त्योहार नजदीक हैं।”

दिपके ने कहा कि आंदोलन नफरत के खिलाफ लड़ रहा है और इसके समर्थकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वही नफरत उनके भीतर जगह न बना ले।

उन्होंने कहा, “हम नफरत के खिलाफ लड़ रहे हैं, हम उन लोगों के खिलाफ लड़ रहे हैं जिनके मन में नफरत के अलावा कुछ नहीं है। लेकिन हमें यह भी सुनिश्चित करना है कि वही नफरत हमारे भीतर न आने पाए।”

उन्होंने कहा कि एक-दूसरे के प्रति करुणा, प्रेम और दयालुता ही आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है।

‘रंका और दास ही आंदोलन के असली नेता’

जेल में बंद दोनों प्रवक्ताओं का जिक्र करते हुए दिपके ने कहा कि रंका को कई लोग नरम स्वभाव का मानते थे, लेकिन जेल में रहने और अदालत की कार्यवाही का सामना करने के बावजूद वह मुस्कुराते रहते हैं।

उन्होंने कहा, “उनके भीतर कोई डर नहीं है। मुझे हमेशा लगता है कि अगर किसी ने वास्तव में इस आंदोलन को बनाया है, तो वे आशु और सौरव हैं। उनकी बहुत बड़ी भूमिका रही है। मैं तो बस उनके निर्देशों का पालन कर रहा था।”

दिपके ने कहा कि बाहर के लोगों को भले ही वह आंदोलन का नेता दिखाई देते हों, लेकिन वास्तव में रंका और दास ही आंदोलन की दिशा तय करते रहे हैं।

उन्होंने कहा, “वे मुझे बताते थे कि मुझे कहां होना है और क्या करना है, और मैं चुपचाप वही करता था। क्योंकि मैं जानता हूं कि उनकी क्षमताएं और फैसले लेने का कौशल मुझसे बेहतर है।”

दोनों को अपना भाई बताते हुए दिपके भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उनके प्रति उनकी भावनाएं डर की वजह से नहीं, बल्कि लगाव और चिंता के कारण हैं।

उन्होंने कहा, “भावनाएं हमारी ताकत हैं।”

विदेशों में हुई हिंसा से तुलना पर जताई आपत्ति

दिपके ने सीजेपी के प्रदर्शनों की तुलना फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाओं से करने वालों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि रंका और दास का जेल जाना तथा प्रदर्शनकारियों का शांतिपूर्ण रवैया आंदोलन की अहिंसक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा, “जो लोग पिछले कुछ दिनों से फ्रांस में हो रही घटनाओं की बात कर रहे हैं और उनकी तुलना भारत के प्रदर्शनों से कर रहे हैं, उन्हें शर्म आनी चाहिए। यहां जो हो रहा है, उसे देखिए। सौरव दास और आशुतोष मुस्कुराते हुए जेल गए।”

दिपके ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने शांति का रास्ता चुना, जबकि वे मानते हैं कि उनके नेताओं को गलत तरीके से जेल भेजा गया है।

उन्होंने कहा, “हमारे लोगों को उकसाया नहीं जा सका है और वे अब भी महात्मा गांधी के आदर्शों का पालन कर रहे हैं। वे जेल से भी मुस्कुराते हुए बाहर आएंगे।”

दिपके का संदेश ऐसे समय आया है, जब आंदोलन के प्रमुख चेहरे जेल में हैं और समर्थक मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध कर रहे हैं। त्योहारों के दौरान कुछ समय के लिए संयम बरतने की अपील के साथ उन्होंने आंदोलन की शांतिपूर्ण रणनीति और उसके मूल सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।

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