स्वास्थ्य, आईटी और मेटल शेयरों में बिकवाली; बैंकिंग व रियल्टी ने संभाला मोर्चा

हमारे बिजनेस संवाददाता
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र गिरावट के नाम रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि बैंकिंग और रियल्टी शेयरों में खरीदारी के चलते बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आई, फिर भी स्वास्थ्य, आईटी और धातु क्षेत्र के शेयरों में दबाव बना रहा।
देश के प्रमुख शेयर सूचकांक दिन भर सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद निचले स्तर पर बंद हुए। निवेशक अमेरिका के आगामी मुद्रास्फीति आंकड़ों, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, वैश्विक बॉन्ड यील्ड तथा कच्चे तेल की चाल पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 48.78 अंक यानी 0.07 प्रतिशत गिरकर 72,480.29 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 सूचकांक 95.75 अंक यानी 0.42 प्रतिशत टूटकर 22,620.45 पर आ गया। निफ्टी का 22,650 के नीचे बंद होना निवेशकों के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पिछले तीन कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स लगभग 1.92 प्रतिशत और निफ्टी करीब 2.25 प्रतिशत कमजोर हुआ है, जिससे बाजार में अल्पकालिक दबाव साफ दिखाई दे रहा है।
स्वास्थ्य, आईटी और धातु शेयर बने गिरावट के प्रमुख कारण
बाजार की कमजोरी में सबसे बड़ा योगदान स्वास्थ्य सेवा, सूचना प्रौद्योगिकी और धातु क्षेत्र के शेयरों का रहा। निवेशकों ने कई दिग्गज कंपनियों में मुनाफावसूली की, जिसके चलते प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ा।
निफ्टी को सबसे अधिक नीचे खींचने वाले शेयरों में शामिल रहे:
- एटरनल, जिसमें 2.39 प्रतिशत की गिरावट आई।
- इंफोसिस, जो 2.10 प्रतिशत फिसला।
- एचडीएफसी बैंक, जिसमें 1.94 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक विकास दर को लेकर बढ़ती आशंकाओं और ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी ने आईटी कंपनियों सहित निर्यात आधारित क्षेत्रों के प्रति निवेशकों को सतर्क बना दिया है।
बैंकिंग और रियल्टी क्षेत्र ने दिखाई मजबूती
जहां अधिकांश सेक्टर दबाव में रहे, वहीं बैंकिंग और रियल्टी शेयरों में अच्छी खरीदारी देखी गई।
निजी क्षेत्र के बैंकों में निवेशकों ने चुनिंदा खरीदारी की। बाजार का मानना है कि हाल की गिरावट के बाद मजबूत बैलेंस शीट वाले बैंक आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध हैं। वहीं रियल्टी कंपनियों को आवासीय मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से जुड़ी सकारात्मक उम्मीदों का लाभ मिला।
विश्लेषकों का मानना है कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था अब भी वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में है, जिससे बैंकिंग जैसे घरेलू मांग आधारित क्षेत्रों को समर्थन मिल रहा है।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में सीमित असर
व्यापक बाजार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत संतुलित रहा।
बीएसई मिडकैप सूचकांक 0.17 प्रतिशत गिरा, जबकि स्मॉलकैप सूचकांक लगभग सपाट रहा। यह संकेत देता है कि खुदरा निवेशकों की भागीदारी अभी भी बनी हुई है और व्यापक बाजार में घबराहट की स्थिति नहीं है।
बीएसई पर बाजार की चौड़ाई मिश्रित रही:
- 2,077 शेयरों में बढ़त दर्ज हुई,
- 2,314 शेयरों में गिरावट आई,
- 223 शेयर अपरिवर्तित रहे।
हालांकि गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वालों से अधिक रही, लेकिन अंतर बहुत बड़ा नहीं था, जिससे यह स्पष्ट है कि बाजार में चुनिंदा खरीदारी भी जारी रही।
अस्थिरता बढ़ी, सतर्क हुए निवेशक
बाजार की चिंता का असर अस्थिरता सूचकांक पर भी दिखाई दिया।
इंडिया वीआईएक्स 0.61 प्रतिशत बढ़कर 13.50 पर पहुंच गया। यह संकेत है कि निवेशक निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका देख रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों को लेकर अनिश्चितता निकट अवधि में बाजार की दिशा तय करेगी।
बॉन्ड, मुद्रा और कमोडिटी बाजार
रुपये में हल्की मजबूती
विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले थोड़ा मजबूत हुआ। रुपया लगभग 95.8250 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि पिछले सत्र में इसका बंद स्तर 95.9475 था।
डॉलर इंडेक्स में नरमी और घरेलू बॉन्ड यील्ड में स्थिरता ने रुपये को समर्थन दिया।
सरकारी बॉन्ड यील्ड में मामूली गिरावट
भारत के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड घटकर 7.156 प्रतिशत रही, जो पिछले सत्र के 7.159 प्रतिशत की तुलना में थोड़ी कम है।
यह दर्शाता है कि घरेलू ऋण बाजार फिलहाल किसी बड़े मौद्रिक झटके की आशंका नहीं देख रहा।
सोना बना निवेशकों की पहली पसंद
वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों का रुख किया।
एमसीएक्स पर अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला सोना वायदा 0.83 प्रतिशत बढ़कर 1,47,448 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। विश्लेषकों का कहना है कि यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है और डॉलर कमजोर रहता है तो सोने में आगे भी मजबूती जारी रह सकती है।
डॉलर इंडेक्स में कमजोरी
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.19 प्रतिशत गिरकर 101.20 पर आ गया। सामान्यतः कमजोर डॉलर उभरते बाजारों की मुद्राओं और कमोडिटी कीमतों को समर्थन देता है।
100 डॉलर के ऊपर बना हुआ है ब्रेंट क्रूड
दूसरी ओर ऊर्जा बाजार निवेशकों की चिंता का विषय बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड नवंबर 2026 वायदा 1.21 प्रतिशत बढ़कर 103.83 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए ऊंची तेल कीमतें महंगाई, चालू खाते के घाटे और आर्थिक विकास पर दबाव बढ़ाने वाली साबित हो सकती हैं।
यूरोप में महंगाई ने बढ़ाई चिंता
यूरोपीय शेयर बाजारों में बुधवार को कमजोरी रही। जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और इटली में सितंबर महीने के प्रारंभिक मुद्रास्फीति आंकड़ों ने उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी दिखाई।
ऊर्जा कीमतों में तेज बढ़ोतरी और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने यूरो क्षेत्र में महंगाई दबाव बढ़ा दिया है।
इससे यह संभावना मजबूत हुई है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) को मुद्रास्फीति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए ब्याज दरों में एक और वृद्धि करनी पड़ सकती है।
एशियाई बाजारों में सकारात्मक रुख
यूरोप के विपरीत अधिकांश एशियाई बाजार बढ़त के साथ बंद हुए।
वैश्विक बॉन्ड यील्ड में कुछ नरमी और तेल कीमतों में अस्थायी स्थिरता ने निवेशकों की धारणा को बेहतर बनाया। कई एशियाई बाजारों में प्रौद्योगिकी और उपभोक्ता क्षेत्र के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
अमेरिकी बाजारों पर ऊंची बॉन्ड यील्ड का दबाव
वॉल स्ट्रीट मंगलवार को हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ।
- डॉव जोन्स 131.59 अंक गिरकर 51,349.92 पर बंद हुआ।
- एसएंडपी 500 सूचकांक 12.85 अंक टूटकर 7,670.84 पर आ गया।
- नैस्डैक कंपोजिट 22.84 अंक फिसलकर 26,797.54 पर बंद हुआ।
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में लगातार वृद्धि निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है।
30 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 5.62 प्रतिशत और 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.29 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो कई वर्षों के उच्चतम स्तरों में से एक है।
ऊंची यील्ड आमतौर पर शेयर बाजारों से निवेश का कुछ हिस्सा बॉन्ड बाजार की ओर मोड़ देती है।
फेड की अगली चाल पर नजर
न्यूयॉर्क फेड के अध्यक्ष जॉन विलियम्स के बयान के बाद बाजार की उम्मीदों में बदलाव देखने को मिला।
अक्टूबर बैठक में फेडरल रिजर्व द्वारा 25 आधार अंकों की दर वृद्धि की संभावना घटकर 51.5 प्रतिशत रह गई, जो पहले लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।
विलियम्स ने संकेत दिया कि केंद्रीय बैंक के पास आगामी आर्थिक आंकड़ों का मूल्यांकन करने के लिए पर्याप्त समय है।
इसी बीच अमेरिकी अर्थव्यवस्था से कुछ नरम संकेत भी मिले हैं। अगस्त में जॉब ओपनिंग्स घटकर 70.79 लाख रह गईं, जबकि उपभोक्ता विश्वास सूचकांक 2014 के बाद के सबसे निचले स्तर 81.9 पर पहुंच गया।
IPO बाजार में मिला-जुला रुख
SRIT India और Shah Investors’ Home पर टूटा निवेशकों का भरोसा
प्राथमिक बाजार में निवेशकों की रुचि बनी हुई है।
SRIT India के आईपीओ को 125.16 गुना और Shah Investors’ Home को 38.12 गुना सब्सक्रिप्शन प्राप्त हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक अब गुणवत्ता और संभावित विकास वाली कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
Nityas Gems और Vishal Nirmiti को कमजोर प्रतिक्रिया
इसके विपरीत Nityas Gems & Jewellery को केवल 0.20 गुना तथा Vishal Nirmiti को मात्र 0.05 गुना बोली प्राप्त हुई।
यह बताता है कि निवेशक अब मूल्यांकन और बिजनेस मॉडल को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं।
नई लिस्टिंग्स में मिला-जुला प्रदर्शन
Adroit Industries (India) ने सूचीबद्ध होते ही शानदार प्रदर्शन किया। कंपनी का शेयर अपने निर्गम मूल्य 134 रुपये की तुलना में लगभग 85 प्रतिशत प्रीमियम पर कारोबार करता दिखाई दिया।
दूसरी ओर Elevate Campus और ArMee Infotech अपने इश्यू मूल्य से नीचे कारोबार करते रहे, जिससे निवेशकों को निराशा हुई।
Swastika Infra ने अपेक्षाकृत बेहतर शुरुआत करते हुए लगभग 13 प्रतिशत प्रीमियम दर्शाया।
चर्चा में रहे प्रमुख शेयर
Sun TV Network में जोरदार उछाल
Sun TV Network के शेयर 7.73 प्रतिशत चढ़ गए। बाजार में यह चर्चा रही कि कंपनी अपने क्रिकेट फ्रेंचाइजी कारोबार को अलग इकाई के रूप में पुनर्गठित कर सकती है।
ब्रोकरेज आकलनों के अनुसार आईपीएल सहित क्रिकेट परिसंपत्तियों का मूल्य 13,000 से 14,000 करोड़ रुपये तक हो सकता है, जिससे शेयरधारकों के लिए मूल्य सृजन की संभावना बनती है।
हालांकि कंपनी ने एक्सचेंज को स्पष्ट किया कि उसके पास फिलहाल कोई अप्रकाशित मूल्य-संवेदनशील सूचना नहीं है।
KSB को मिला बड़ा निर्यात ऑर्डर
KSB के शेयरों में 4.28 प्रतिशत की तेजी आई। कंपनी को लगभग 118 करोड़ रुपये का अंतरराष्ट्रीय निर्यात ऑर्डर प्राप्त हुआ है।
Power Mech Projects को ₹549 करोड़ का अनुबंध
Power Mech Projects के शेयर 3.79 प्रतिशत चढ़े। कंपनी को 549.37 करोड़ रुपये का संचालन एवं रखरखाव (O&M) अनुबंध हासिल हुआ है।
Inox Green ने जुटाए लगभग ₹300 करोड़
QIP के माध्यम से करीब 300 करोड़ रुपये जुटाने की घोषणा के बाद Inox Green Energy Services के शेयरों में हल्की गिरावट दर्ज की गई।
HEG Advanced Materials की नई पहल
कंपनी की सहयोगी इकाई Replus Engitech ने Indus Towers के साथ भारत में दूरसंचार अवसंरचना के लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण समाधान विकसित करने हेतु समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
आगे की राह
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल कई वैश्विक और घरेलू चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। ऊंचे कच्चे तेल के दाम, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, बढ़ती वैश्विक बॉन्ड यील्ड और मध्य पूर्व से जुड़े भू-राजनीतिक जोखिम आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।
इसके विपरीत मजबूत घरेलू आर्थिक गतिविधियां, बैंकिंग क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा तथा चुनिंदा आईपीओ में मजबूत मांग बाजार को आधार प्रदान कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी दिनों में अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़े, फेडरल रिजर्व की टिप्पणियां, कच्चे तेल की चाल और विदेशी निवेश प्रवाह भारतीय बाजारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेतक साबित होंगे। जब तक इन मोर्चों पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव और क्षेत्र-विशेष आधारित निवेश रणनीतियां हावी रहने की संभावना है।
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