Last Updated on August 27, 2026 3:44 pm by INDIAN AWAAZ
In his interview with News24 on Instagram, Aditya stated that after an IPS officer detained him, a Superintendent of Police (SP) beat his parent.

हमारे संवाददाता से
पटना: बिहार में सरकारी नौकरियों और भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच छह वर्षीय आदित्य कुमार अचानक चर्चा का केंद्र बन गए। 25 अगस्त को पटना में आयोजित प्रदर्शन में शामिल आदित्य ने बेरोजगारी, पुलिस कार्रवाई और सरकार की जवाबदेही को लेकर जिस बेबाकी से अपनी बात रखी, उसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
आदित्य पहली कक्षा के छात्र हैं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आते हैं। वह बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों और नौकरी के अभ्यर्थियों द्वारा आयोजित प्रदर्शन के दौरान मौजूद थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच तनाव बढ़ने के बाद पुलिस आदित्य को अपने साथ ले गई। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया कि बच्चे को गिरफ्तार नहीं किया गया था और उसे केवल उसकी सुरक्षा के मद्देनजर प्रदर्शन स्थल से हटाया गया था। बाद में उसे उसकी मां के हवाले कर दिया गया।
पुलिस ने गिरफ्तारी की खबरों को किया खारिज
सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि छह वर्षीय आदित्य को प्रदर्शन में शामिल होने के कारण गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, पुलिस ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि बच्चे को किसी आपराधिक मामले में गिरफ्तार नहीं किया गया था।
अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन स्थल पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी और पुलिस कार्रवाई के बीच बच्चे की मौजूदगी उसकी सुरक्षा के लिए चिंता का विषय थी। इसी वजह से उसे वहां से हटाकर पुलिस थाने ले जाया गया और बाद में उसकी मां को सौंप दिया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, आदित्य की मां घरेलू कामगार हैं। पुलिस ने माता-पिता को सलाह दी कि वे अपने बच्चे को ऐसे स्थानों से दूर रखें जहां हिंसा या पुलिस कार्रवाई की आशंका हो।
मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग
आदित्य उस समय सुर्खियों में आए जब उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस्तीफे की मांग की और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज का आदेश देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही।
छोटी उम्र में राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर उनकी बेबाक टिप्पणी ने प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया। देखते ही देखते उनका वीडियो इंटरनेट मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जाने लगा।
आदित्य की बातों ने जहां कई लोगों को प्रभावित किया, वहीं इस सवाल ने भी जोर पकड़ा कि छह साल का बच्चा आखिर ऐसे प्रदर्शन में क्यों मौजूद था, जहां बाद में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई।
गांधी मैदान से मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च
आदित्य की मौजूदगी उस समय हुई जब पटना में BPSC अभ्यर्थियों और अन्य छात्र संगठनों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने गांधी मैदान से मुख्यमंत्री आवास और राजभवन की ओर मार्च करने की कोशिश की।
प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड पार करने की कोशिश के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछार की और लाठीचार्ज किया। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। झड़प में कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी खबर है।
छात्र संगठनों और नौकरी के अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी मांगों को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी उनकी शिकायतों का समाधान किया जाना चाहिए।
शिक्षक भर्ती परीक्षा के प्रारूप पर विवाद
आंदोलन का एक प्रमुख मुद्दा शिक्षक भर्ती परीक्षा के प्रस्तावित प्रारूप को लेकर है। प्रदर्शनकारी शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण यानी TRE-4 में दो चरणों वाली परीक्षा व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं और एक ही चरण में लिखित परीक्षा आयोजित करने की मांग कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों की एक अन्य प्रमुख मांग परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर है। आंदोलनकारियों ने पिछली BPSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई है।
TRE-4 के तहत हजारों शिक्षक पदों पर भर्ती प्रस्तावित है। ऐसे में परीक्षा के प्रारूप, अधिसूचना और भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों के बीच काफी बेचैनी है।
बिहार में सरकारी नौकरी का सवाल
बिहार में सरकारी नौकरी लंबे समय से युवाओं के लिए रोजगार और सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम रही है। सीमित औपचारिक रोजगार अवसरों और सरकारी पदों के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण भर्ती परीक्षाओं में किसी भी तरह की देरी या अनियमितता का असर व्यापक होता है।
पेपर लीक, परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी, परिणाम में देरी और भर्ती कैलेंडर को लेकर छात्रों की शिकायतें समय-समय पर आंदोलनों का कारण बनती रही हैं।
इसी पृष्ठभूमि में मौजूदा आंदोलन को केवल एक परीक्षा से जुड़ा विवाद नहीं माना जा रहा। छात्र संगठन इसे भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की व्यापक मांग के रूप में पेश कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना
प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय पुलिस कार्रवाई का सहारा ले रही है।
विपक्ष का कहना है कि सरकार को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग करने के बजाय परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भर्ती से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए।
दूसरी ओर, सरकार की ओर से छात्रों की समस्याओं को संवाद और प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया गया है। राज्य सरकार ने छात्रों की शिकायतें सुनने के लिए नियमित छात्र सहायता शिविर आयोजित करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं।
वायरल वीडियो ने खड़ा किया बड़ा सवाल
आदित्य का मामला अब सिर्फ एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रह गया है। इसने बिहार में बेरोजगारी, सरकारी भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता और बच्चों की सुरक्षा जैसे तीन महत्वपूर्ण मुद्दों को एक साथ चर्चा में ला दिया है।
कुछ लोगों ने आदित्य के आत्मविश्वास और अपनी बात रखने की क्षमता की सराहना की है। वहीं, कई लोगों ने सवाल उठाया है कि इतनी कम उम्र के बच्चे को ऐसे प्रदर्शन में नहीं होना चाहिए था, खासकर तब जब वहां पुलिस कार्रवाई और झड़प की स्थिति पैदा हो सकती हो।
पुलिस के अनुसार, बच्चे को गिरफ्तार नहीं किया गया था और उसे केवल सुरक्षा कारणों से प्रदर्शन स्थल से हटाकर बाद में उसके परिवार को सौंप दिया गया।
फिर भी, छह साल के आदित्य की तस्वीर और उसके बेबाक बयान ने बिहार के मौजूदा छात्र आंदोलन को एक अलग मानवीय चेहरा दे दिया है। एक ओर हजारों युवा परीक्षा, नौकरी और अपने भविष्य को लेकर सड़कों पर हैं, वहीं दूसरी ओर एक छोटे बच्चे की आवाज ने इस बहस को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
आदित्य की घटना यह सवाल भी सामने रखती है कि जब बेरोजगारी और रोजगार की चिंता समाज के इतने बड़े हिस्से को प्रभावित करती है, तो उसकी गूंज बच्चों तक भी पहुंचने लगती है। बिहार में भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच अब असली चुनौती सरकार के सामने यह है कि वह छात्रों की शिकायतों का समाधान कितनी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ करती है।
