
हमारे विशेष व्यापार प्रतिनिधि द्वारा
भारतीय शेयर बाजारों में बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, भारतीय रुपये में कमजोरी और हैवीवेट शेयरों में मुनाफावसूली के कारण घरेलू सूचकांकों पर गहरा दबाव देखा गया। बेंचमार्क निफ्टी 50 सूचकांक मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण 24,000 के स्तर से नीचे बंद हुआ, जो भू-राजनीतिक तनाव और नियामक अनिश्चितताओं के बीच बाजार में घबराहट को दर्शाता है।
कारोबार के अंत में, बीएसई सेंसेक्स (S&P BSE Sensex) 715.06 अंक यानी 0.92% की गिरावट के साथ 76,755.05 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 (Nifty 50) 191.45 अंक यानी 0.79% गिरकर 23,996.25 के स्तर पर आ गया। पिछले तीन सत्रों में सेंसेक्स कुल 1.78% और निफ्टी 1.38% टूट चुका है।
बाजार की चौड़ाई (Market Breadth) अत्यधिक कमजोर रही। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कारोबार करने वाले 4,431 शेयरों में से 2,780 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, 1,458 शेयर चढ़े और 193 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए। फ्रंटलाइन सूचकांकों की तुलना में स्मॉलकैप और मिडकैप सूचकांकों पर अधिक दबाव देखा गया—बीएसई 150 मिडकैप इंडेक्स 1.05% गिरा, जबकि बीएसई 250 स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.39% की गिरावट आई। निकट अवधि की अस्थिरता को मापने वाला भारत वीआईएक्स (India VIX) 5.49% बढ़कर 13.29 पर पहुंच गया।
हैवीवेट शेयरों में बिकवाली; एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर ने संभाला मोर्चा
वित्तीय और ऊर्जा क्षेत्र के दिग्गजों ने बाजार को नीचे खींचने में मुख्य भूमिका निभाई। बैंकिंग दिग्गज आईसीआईसीआई बैंक (1.60% नीचे) और एचडीएफसी बैंक (0.99% नीचे) के साथ-साथ दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (1.51% नीचे) निफ्टी में गिरावट के मुख्य कारक रहे।
सेक्टर के आधार पर, फार्मा, बैंक और आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई। हालांकि, एफएमसीजी और ऑटो जैसे रक्षात्मक क्षेत्रों (Defensive Sectors) ने विपरीत रुख अपनाते हुए बाजार को मामूली राहत देने का प्रयास किया।
अमेरिकी टैरिफ नीति से फार्मा शेयरों में हड़कंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयातित जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध टैरिफ योजना की घोषणा के बाद बुधवार को फार्मास्युटिकल शेयरों में भारी गिरावट आई। इस योजना के तहत:
- शून्य शुल्क: 1 अगस्त 2026 से दो साल की अवधि के लिए लागू रहेगा।
- 100% शुल्क: 1 अगस्त 2028 से एक साल के लिए लगाया जाएगा।
- 200% शुल्क: 1 अगस्त 2029 से प्रभावी होगा।
निफ्टी फार्मा सूचकांक 1.31% गिरकर 25,752.25 पर बंद हुआ, जिससे पिछले दो सत्रों की बढ़त खत्म हो गई। ल्यूपिन में सबसे ज्यादा 4.35% की गिरावट आई, जिसके बाद पिरामल फार्मा (-4.20%), अजंता फार्मा (-3.25%), और अरबिंदो फार्मा (-2.96%) का स्थान रहा। इसके अलावा डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज (-2.16%), सिप्ला (-1.15%), और सन फार्मा (-0.91%) जैसे प्रमुख शेयर भी लाल निशान में बंद हुए।
प्रमुख मैक्रो आंकड़े: कच्चा तेल उछला, रुपया टूटा और बॉन्ड यील्ड बढ़ी
पश्चिम मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक व्यापक आर्थिक परिदृश्य (Macroeconomic Backdrop) ने स्थानीय बाजार की धारणा को प्रभावित किया।
| बाजार संकेतक | वर्तमान स्तर / मूल्य | शुद्ध परिवर्तन |
| ब्रेंट क्रूड (सितंबर 2026) | $94.77 / बैरल | ▲ $3.76 (+4.13%) |
| USD/INR (रुपया) | 96.5900 | ▼ पिछले सत्र के 96.2500 से गिरावट |
| भारत 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड | 6.805% | ▲ 0.21% (पूर्व: 6.791%) |
| MCX गोल्ड फ्यूचर्स (अगस्त 2026) | ₹1,44,623 | ▲ 1.22% |
| यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) | 101.15 | ▼ 0.05% |
| यूएस 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड | 4.624% | ▼ 0.01% |
लाल सागर में हूती विद्रोहियों द्वारा हमले की धमकियों के बाद सऊदी अरब के दो क्रूड टैंकरों के मार्ग बदलने की खबरों से ब्रेंट क्रूड 4% से अधिक उछल गया। ऊर्जा लागत में इस वृद्धि ने भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया फिसलकर 96.5900 के स्तर पर आ गया।
वैश्विक संकेत: एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख, ब्रिटेन में महंगाई दर घटी
वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत देखने को मिले। ब्रिटेन में महंगाई दर घटने के आंकड़ों के बाद यूरोपीय बाजारों में तेजी दर्ज की गई। यूके में जून 2026 की मुद्रास्फीति दर घटकर 2.6% रह गई, जो मई में 2.8% थी। यह आंकड़ा बैंक ऑफ इंग्लैंड के 2% के लक्ष्य के करीब पहुंच गया है और यह यूरो क्षेत्र (2.8%) और अमेरिका (3.5%) की मुद्रास्फीति दर से काफी कम है।
एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला रुख रहा। इससे पहले वॉल स्ट्रीट पर रात के कारोबार में गिरावट दर्ज की गई थी, जहां डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.59% गिरकर 51,839.26 पर और एसएंडपी 500 0.19% गिरकर 7,443.28 पर बंद हुआ। अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बघाई द्वारा कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जताए जाने के बाद सत्र के अंतिम घंटों में निवेशक धारणा में थोड़ा सुधार हुआ।
तिमाही नतीजों और कॉर्पोरेट एक्शन से व्यक्तिगत शेयरों में हलचल
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजों और कॉर्पोरेट घोषणाओं के चलते व्यक्तिगत शेयरों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखा गया।
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| सुर्खियों में रहने वाले शेयर |
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| सबसे ज्यादा चढ़ने वाले (GAINERS) | सबसे ज्यादा गिरने वाले (LOSERS) |
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| एमपीएस लिमिटेड: +20.00% | बंधन बैंक: -16.63% |
| साइएंट डीएलएम: +11.72% | टिप्स म्यूजिक: -12.15% |
| एमएंडएम फाइनेंस: +7.60% | सनटेक रियल्टी: -7.94% |
| केनरा रोबेको एएमसी: +5.85% | भारत कोकिंग कोल: -6.82% |
| क्रिसिल: +4.22% | ल्यूपिन लिमिटेड: -4.35% |
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प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन:
- बंधन बैंक (-16.63%): बैंक द्वारा अपने FY27 एग्जिट रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) के अनुमान को 1.6%-1.8% से घटाकर 1.2%-1.4% किए जाने के बाद शेयर में भारी गिरावट आई। हालांकि, जून तिमाही में बैंक का शुद्ध लाभ 34.9% YoY बढ़कर ₹501.67 करोड़ रहा, लेकिन यह पिछली तिमाही से 6.1% कम था।
- नेस्ले इंडिया (+3.31%): घरेलू बिक्री में 25% की मजबूत वृद्धि के कारण कंपनी का Q1 FY27 का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ 47.92% YoY बढ़कर ₹975.12 करोड़ पर पहुंच गया।
- एमएंडएम फाइनेंशियल सर्विसेज (+7.60%): रिकॉर्ड पहली तिमाही के डिस्बर्समेंट और बेहतर मार्जिन के दम पर NBFC का शुद्ध लाभ 69.6% YoY बढ़कर ₹899 करोड़ हो गया।
- साइएंट डीएलएम (+11.72%) और एमपीएस लिमिटेड (+20.00%): साइएंट डीएलएम का Q1 नेट प्रॉफिट 118.23% YoY बढ़कर ₹16.28 करोड़ रहा। वहीं, पब्लिशिंग सॉल्यूशंस कंपनी एमपीएस का मुनाफा 42.99% बढ़कर ₹50.39 करोड़ होने से शेयर में अपर सर्किट लग गया।
- टिप्स म्यूजिक (-12.15%): कमजोर तिमाही नतीजों और बायबैक प्रस्ताव को 5 अगस्त 2026 तक टालने की घोषणा के बाद कंपनी के शेयरों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
- भारत कोकिंग कोल (-6.82%) और सनटेक रियल्टी (-7.94%): भारत कोकिंग कोल को Q1 FY27 में ₹68.09 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ। वहीं, राजस्व में 43.5% की गिरावट के कारण सनटेक रियल्टी का शुद्ध लाभ तिमाही आधार पर 33.68% गिरकर ₹42.28 करोड़ रह गया।
