
प्रो. डॉ. एस. एम. फ़याज़, सीनियर कंसल्टेंट – इंटरनल मेडिसिन, किम्स हॉस्पिटल्स, बेंगलुरु
उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर), जिसे कभी बुज़ुर्गों की बीमारी माना जाता था, अब तेजी से युवाओं को अपनी चपेट में ले रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि तनावपूर्ण जीवनशैली, अस्वस्थ खान-पान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और खराब नींद के कारण 20 से 30 वर्ष की आयु के लोगों में हाइपरटेंशन के मामले बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती है, जिससे इसका खतरा और बढ़ जाता है। समय पर नियंत्रण न होने पर यह हृदय, किडनी, मस्तिष्क और आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
तनाव और आधुनिक जीवनशैली बड़ी वजह
चिकित्सकों का कहना है कि नौकरी का दबाव, असुरक्षा, लंबे कार्य घंटे और मानसिक तनाव शरीर को लगातार “फाइट या फ्लाइट” की स्थिति में बनाए रखते हैं। इससे रक्तचाप बार-बार बढ़ता है और धीरे-धीरे स्थायी हाई बीपी का रूप ले सकता है।
बैठे-बैठे काम करने वाली जीवनशैली भी एक बड़ी समस्या बन चुकी है। कई युवा घंटों तक दफ्तरों या स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं और शारीरिक गतिविधि बहुत कम करते हैं। इससे मोटापा, धीमा मेटाबॉलिज्म और हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं।
जंक फूड और खराब नींद भी जिम्मेदार
विशेषज्ञों के अनुसार पैकेज्ड फूड, फास्ट फूड और रेस्तरां के खाने में छिपा हुआ अधिक नमक युवाओं में हाई बीपी बढ़ाने का प्रमुख कारण है। अधिक सोडियम शरीर में अतिरिक्त पानी रोकता है, जिससे रक्तचाप बढ़ जाता है।
इसके अलावा अनियमित नींद की आदतें भी स्थिति को खराब कर रही हैं। देर रात तक जागना और छह घंटे से कम सोना हार्मोनल असंतुलन और तनाव बढ़ाता है, जिसका सीधा असर रक्तचाप पर पड़ता है।
धूम्रपान, वेपिंग और एनर्जी ड्रिंक का खतरा
डॉक्टरों का कहना है कि धूम्रपान, वेपिंग, शराब और अत्यधिक एनर्जी ड्रिंक का सेवन भी युवाओं में हाई बीपी का जोखिम बढ़ा रहा है। निकोटीन रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है और हृदय गति बढ़ाता है, जबकि एनर्जी ड्रिंक तंत्रिका तंत्र को अत्यधिक उत्तेजित कर देते हैं।
कम उम्र में मोटापा, पेट की चर्बी, इंसुलिन रेजिस्टेंस और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं, जो भविष्य में हृदय रोग और हाई बीपी का खतरा बढ़ाती हैं।
पारिवारिक इतिहास भी महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों के परिवार में हाई बीपी, डायबिटीज या हृदय रोग का इतिहास है, उन्हें कम उम्र से ही नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए, क्योंकि आनुवंशिक कारण भी बड़ा जोखिम बन सकते हैं।
जीवनशैली में बदलाव से बचाव संभव
डॉक्टरों के अनुसार युवाओं में हाइपरटेंशन को काफी हद तक रोका जा सकता है। नियमित ब्लड प्रेशर जांच, रोजाना व्यायाम, कम नमक वाला भोजन, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद बेहद जरूरी हैं।
योग, ध्यान, गहरी सांस लेने के अभ्यास और स्क्रीन टाइम कम करने जैसी आदतें तनाव कम करने और रक्तचाप नियंत्रित रखने में मददगार हो सकती हैं।
विशेषज्ञ रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट शारीरिक गतिविधि करने, धूम्रपान से बचने, शराब सीमित मात्रा में लेने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह देते हैं।
डॉक्टरों का मानना है कि समय रहते जागरूकता और छोटी-छोटी जीवनशैली सुधारों से युवा गंभीर बीमारियों जैसे हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी संबंधी समस्याओं से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।
