Last Updated on April 24, 2026 2:28 pm by INDIAN AWAAZ
क्या आप अपने लिवर पर ज़्यादा बोझ डाल रहे हैं?
डॉ. सोनल अस्थाना, लीड कंसल्टेंट – HPB एवं लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी, एस्टर आरवी हॉस्पिटल
आज के दौर में लोग त्वरित समाधान की ओर झुकते हैं—चाहे वह सिरदर्द के लिए दर्दनिवारक दवाएं हों या इम्यूनिटी बढ़ाने वाले सप्लीमेंट्स और हर्बल उत्पाद। ये चीजें देखने में सुरक्षित लगती हैं, लेकिन इनका अनियंत्रित और लगातार उपयोग शरीर के एक बेहद महत्वपूर्ण अंग, यानी लिवर (यकृत), को छिपा हुआ नुकसान पहुंचा सकता है। दवाओं से होने वाली लिवर क्षति अब एक बढ़ती हुई समस्या बन चुकी है, जो अक्सर स्वस्थ दिखने वाले लोगों को भी प्रभावित कर रही है और कई बार डॉक्टरों की नज़र से भी छूट जाती है।
लिवर शरीर में प्रवेश करने वाले हर पदार्थ—चाहे वह दवा हो या सप्लीमेंट—को प्रोसेस करता है। यह हानिकारक तत्वों को तोड़कर उन्हें निष्क्रिय करता है और सुरक्षित पदार्थों को रक्त में भेजता है। लेकिन जब हम जरूरत से ज़्यादा दवाएं या सप्लीमेंट्स लेने लगते हैं, तो लिवर की यह डिटॉक्स क्षमता अपनी सीमा तक पहुंच जाती है।
पैरासिटामोल दुनिया भर में सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली दवाओं में से एक है। निर्धारित मात्रा में इसका सेवन सुरक्षित माना जाता है, लेकिन अधिक मात्रा या लंबे समय तक इसका उपयोग गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। पैरासिटामोल की ओवरडोज़ दुनिया भर में तीव्र लिवर फेल्योर के प्रमुख कारणों में से एक है।
जोखिम तब और बढ़ जाता है जब लोग अनजाने में ऐसी कई दवाएं एक साथ लेते हैं जिनमें समान तत्व होते हैं, या फिर शराब और अन्य लिवर को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों का सेवन करते हैं। दर्दनिवारक दवाओं के अलावा डाइटरी सप्लीमेंट्स भी कम खतरनाक नहीं हैं। आमतौर पर लोग मान लेते हैं कि “नेचुरल” या हर्बल उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित होते हैं, लेकिन ऐसा हमेशा सही नहीं होता। सप्लीमेंट्स के क्षेत्र में सख्त नियमन की कमी के कारण कई उत्पादों में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। वजन घटाने वाले उत्पाद, बॉडीबिल्डिंग सप्लीमेंट्स और पारंपरिक हर्बल दवाएं कई बार लिवर टॉक्सिसिटी का कारण बनती हैं।
कुछ उत्पादों में भारी धातुएं या छिपे हुए रसायन भी मिल सकते हैं, जो लिवर के लिए और अधिक खतरनाक होते हैं। स्व-चिकित्सा (सेल्फ-मेडिकेशन) इस समस्या का एक बड़ा कारण है। लोग लंबे समय तक बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेते रहते हैं, यह सोचकर कि इससे उनकी समस्या हल हो जाएगी। लेकिन धीरे-धीरे यह आदत लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालती है। दवाओं से होने वाली लिवर क्षति अक्सर शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती है।
शुरुआती संकेतों में थकान, मतली, भूख में कमी और हल्का पेट दर्द शामिल हो सकते हैं। जब स्थिति गंभीर हो जाती है, तब पीलिया, गहरे रंग का पेशाब और पेट में सूजन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इस अवस्था तक पहुंचने का मतलब है कि लिवर को पहले ही काफी नुकसान हो चुका है।
अच्छी बात यह है कि दवाओं से होने वाली अधिकांश लिवर क्षति को रोका जा सकता है। इसके लिए जागरूकता और जिम्मेदार दवा उपयोग बेहद जरूरी है। हमेशा डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा और अवधि का पालन करें और बिना सलाह के दवाओं का संयोजन न करें।
बचाव और जिम्मेदारी
अच्छी खबर यह है कि दवाओं से होने वाले अधिकांश लीवर डैमेज से बचा जा सकता है।
- दवाओं का उपयोग केवल डॉक्टर की सलाह से करें।
- दवा के लेबल ध्यान से पढ़ें और सक्रिय तत्वों की पहचान करें।
- सप्लीमेंट्स की अधिक मात्रा या कई सप्लीमेंट्स का एक साथ सेवन न करें।
- नियमित स्वास्थ्य जांच और लीवर फंक्शन टेस्ट करवाएँ।
दवाओं के लेबल को ध्यान से पढ़ना चाहिए, ताकि उनमें मौजूद सक्रिय तत्वों—जैसे पैरासिटामोल—की पहचान हो सके। यह समझना भी जरूरी है कि ज्यादा सप्लीमेंट्स लेने से बेहतर परिणाम नहीं मिलते, बल्कि यह नुकसानदेह हो सकता है। खासकर जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी है या जो नियमित दवाएं लेते हैं, उन्हें किसी भी नए सप्लीमेंट की शुरुआत से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
नियमित स्वास्थ्य जांच भी बेहद महत्वपूर्ण है। लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) के जरिए शुरुआती चरण में ही लिवर की समस्या का पता लगाया जा सकता है, जिससे गंभीर स्थिति बनने से पहले इलाज संभव हो सके। जो लोग नियमित रूप से दवाएं या सप्लीमेंट्स लेते हैं, उनके लिए यह जांच विशेष रूप से जरूरी है।
दर्दनिवारक दवाएं और सप्लीमेंट्स अपने आप में फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन उनका उपयोग समझदारी और संतुलन के साथ करना चाहिए। लिवर में खुद को ठीक करने की अद्भुत क्षमता होती है, लेकिन यह असीमित नहीं है। सही जीवनशैली, जागरूक निर्णय और दवाओं के जिम्मेदार उपयोग के माध्यम से ही हम अपने लिवर को सुरक्षित रख सकते हैं और गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से बच सकते हैं।

