Last Updated on April 14, 2026 10:23 pm by INDIAN AWAAZ

AMN / पटना
Bihar की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आते हुए दिखाई दे रहा है। वरिष्ठ भाजपा नेता Samrat Choudhary अब राज्य की कमान संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। Bharatiya Janata Party ने मंगलवार को घोषणा की कि वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं और वे Nitish Kumar की जगह लेंगे। इसके साथ ही वे बिहार के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रचेंगे।
यह फैसला बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जहां अब तक भाजपा गठबंधन सरकारों में सहयोगी की भूमिका निभाती रही है। यह कदम पार्टी के स्वतंत्र राजनीतिक विस्तार और राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीतिक विरासत से शीर्ष तक का सफर
सम्राट चौधरी एक मजबूत राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी छह बार विधायक रहे, जबकि उनकी माता पार्वती देवी भी विधायक रह चुकी हैं। इस पारिवारिक पृष्ठभूमि ने उन्हें राजनीति में शुरुआती बढ़त दिलाई।
उन्होंने 1999 में Rashtriya Janata Dal के साथ अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की और 2000 में खगड़िया के परबत्ता सीट से विधायक चुने गए। इसके बाद उन्होंने Rabri Devi की सरकार में मंत्री के रूप में काम किया, जिससे उन्हें प्रशासनिक अनुभव मिला।
दल-बदल और भाजपा में तेज उभार
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर कई महत्वपूर्ण मोड़ों से गुजरा है। 2014 में वे Janata Dal (United) में शामिल हुए और बाद में 2017 में भाजपा में आ गए। भाजपा में आने के बाद उनका राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा।
उन्हें 2023 में बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया और जनवरी 2024 में वे उपमुख्यमंत्री बने। एक प्रमुख ओबीसी चेहरे के रूप में उन्होंने बिहार में भाजपा के सामाजिक आधार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राजनीतिक महत्व और आगे की चुनौतियाँ
सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत पार्टी हिंदी पट्टी के राज्यों में अपनी सीधी पकड़ मजबूत करना चाहती है। उनकी संगठन क्षमता और जमीनी पकड़ पार्टी के लिए बड़ा फायदा साबित हो सकती है।
हालांकि, उनके सामने चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। विपक्ष ने उनके खिलाफ चुनावी हलफनामे में कथित गड़बड़ियों और पुराने आपराधिक मामलों को लेकर सवाल उठाए हैं। आने वाले समय में ये मुद्दे राजनीतिक बहस का हिस्सा बने रह सकते हैं।
बिहार की राजनीति में नया अध्याय
अगर सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार हुआ, तो सम्राट चौधरी का शपथ ग्रहण बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत करेगा। अब नजर इस बात पर होगी कि वे शासन, गठबंधन संतुलन और राज्य की जटिल सामाजिक समीकरणों को कैसे संभालते हैं।
