Last Updated on April 5, 2026 3:05 pm by INDIAN AWAAZ

एएमएन न्यूज़ डेस्क
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरान के नागरिक परमाणु प्रतिष्ठानों—खासतौर पर बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र—पर अमेरिका-इज़राइल के हवाई हमलों के गंभीर परिणामों को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे हमले पूरे क्षेत्र को रेडियोधर्मी प्रदूषण के खतरे में डाल सकते हैं।
शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों को भेजे गए समान पत्रों में अराघची ने कहा कि ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर अमेरिकी-इज़राइली हमले ऐसे समय किए गए हैं जब ये सुविधाएँ पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए समर्पित हैं और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की व्यापक निगरानी व्यवस्था के तहत संचालित हो रही हैं।
पत्र में कहा गया है, “ये गैरकानूनी हमले पूरे क्षेत्र को रेडियोधर्मी प्रदूषण के खतरे में डालते हैं, जिसके गंभीर मानवीय और पर्यावरणीय परिणाम हो सकते हैं। ऐसे हमलों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।”
अराघची ने कहा कि पिछले नौ महीनों में ईरान पर दो बार आक्रामक युद्ध थोपे गए—एक अमेरिका की ओर से, जो परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का संरक्षक देश है, और दूसरा इज़राइल की ओर से, जो इस संधि के ढांचे से बाहर है। उन्होंने बताया कि दोनों ही मामलों में ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले किए गए।
उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स और उसके महानिदेशक तक ने इन हमलों की निंदा करने या भविष्य में इन्हें रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।
ईरानी विदेश मंत्री ने लिखा, “अब अमेरिकी वरिष्ठ अधिकारी, जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून को ‘मूर्खतापूर्ण’ बताते हैं, खुले तौर पर कह रहे हैं कि परमाणु सुविधाएँ भी उनके संभावित लक्ष्यों में शामिल हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के स्थायी प्रतिनिधि ने यह तक कहा है कि बुशेहर परमाणु संयंत्र पर हमला “विकल्प से बाहर नहीं है।”
बुशेहर संयंत्र पर हमलों से ‘रेडियोधर्मी आपदा’ की चेतावनी
अराघची ने कहा कि बुशेहर के सक्रिय परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आसपास बार-बार किए जा रहे हमले बेहद चिंताजनक हैं। उनके अनुसार किसी सक्रिय परमाणु सुविधा के इतने करीब हमले करना खतरनाक उकसावे की स्थिति पैदा करता है और इससे रेडियोधर्मी रिसाव का गंभीर खतरा बन सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का बोर्ड ईरान की संरक्षित परमाणु सुविधाओं पर हुए इस स्पष्ट अवैध हमले पर भी निष्क्रिय बना रहता है, तो सदस्य देशों का इन संस्थाओं पर विश्वास कमजोर हो सकता है और वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था और भी कमजोर पड़ जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी निष्क्रियता के परिणाम केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी से ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया। इस अभियान के दौरान इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और नागरिकों की हत्या किए जाने का दावा किया गया है।
इस सैन्य कार्रवाई में ईरान के विभिन्न हिस्सों में सैन्य ठिकानों के साथ-साथ नागरिक प्रतिष्ठानों पर भी तीव्र हमले किए गए, जिससे भारी जनहानि और बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान हुआ।
इसके जवाब में ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी हितों और कब्ज़े वाले इलाकों में इज़राइली ठिकानों के खिलाफ बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।
