Last Updated on February 6, 2026 5:55 pm by INDIAN AWAAZ

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सरकार ने कहा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना एक नीतिगत पहल से राष्ट्रीय आंदोलन में बदल चुकी है। इसमें सरकारी एजेंसियों, समुदायों, मीडिया, नागरिक समाज और आम जनता सहित विभिन्न हितधारकों को एकजुट किया गया है। लोकसभा में आज लिखित जवाब में महिला और बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंग अनुपात 2014-15 में 918 से बढ़कर 2024-25 में 929 हो गया है। माध्यमिक स्तर पर विद्यालयों में लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात 2014-15 में 75 दशमलव 51% से बढ़कर 2024-25 में 80.2% हो गया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के 2020-21 के एचएमआईएस आंकड़ों के अनुसार जिलों के जन्म के समय लिंग अनुपात-एसआरबी की स्थिति के आधार पर जिलों को धनराशि उपलब्ध कराई जाती है।

श्रीमती अन्‍नपूर्णा देवी ने कहा कि बाल लिंग अनुपात और जीवन चक्र के दौरान लड़कियों और महिलाओं के सशक्तिकरण से संबंधित मुद्दों को संबोधित करने में सहायता के लिए 22 जनवरी 2015 को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य न केवल लिंग अनुपात और लिंग आधारित भेदभाव से संबंधित तात्कालिक चिंताओं का समाधान करना है, बल्कि बालिका को महत्व देने और उसके अधिकारों और अवसरों को सुनिश्चित करने की दिशा में एक सांस्कृतिक बदलाव को बढ़ावा देना भी है।