Last Updated on January 21, 2026 8:53 pm by INDIAN AWAAZ

AMN / BIZ DESK

भारतीय शेयर बाजार बुधवार को लगातार तीसरे सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 91.70 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों ने बाजार की धारणा को कमजोर बनाए रखा।

बीएसई सेंसेक्स 270.84 अंक या 0.33% की गिरावट के साथ 81,909.63 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 75 अंक या 0.30% फिसलकर 25,157.50 पर बंद हुआ। हालांकि, दोनों सूचकांकों ने दिन के निचले स्तर से आंशिक रिकवरी दिखाई—निफ्टी अपने इंट्राडे लो 24,920 से करीब 237 अंक संभला।

रुपये की कमजोरी बाजार के लिए प्रमुख चिंता बनी रही। विश्लेषकों के अनुसार, एफपीआई आउटफ्लो, वैश्विक जोखिम से बचाव की प्रवृत्ति, अमेरिका–भारत व्यापार तनाव और निर्यातकों की ओर से डॉलर की कम बिक्री ने USD/INR को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

विदेशी निवेशकों ने करीब ₹2,938 करोड़ के शेयर बेचे, जिससे घरेलू बाजारों पर दबाव बढ़ा। बाजार की चौड़ाई नकारात्मक रही—गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने के साथ बड़ी संख्या में स्टॉक्स ने 52-सप्ताह का निचला स्तर छुआ, जो निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।

सेक्टरवार प्रदर्शन:

बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं सबसे ज्यादा प्रभावित रहीं। निफ्टी बैंक 1.02% और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 0.87% गिरा।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1.6% की गिरावट दर्ज हुई, जबकि रियल्टी और पीएसयू शेयर भी कमजोर रहे।

इसके विपरीत, मेटल सेक्टर 0.6% चढ़ा और ऑयल एंड गैस 0.3% की बढ़त के साथ बंद हुआ।

स्टॉक्स में, आइशर मोटर्स और इंडिगो ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि आईसीआईसीआई बैंक और ट्रेंट प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे।

आगे चलकर, बाजार की नजरें वैश्विक संकेतों, डावोस में अमेरिकी राष्ट्रपति के संबोधन और आने वाले तिमाही नतीजों पर बनी रहेंगी।

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