Last Updated on July 6, 2026 12:31 am by INDIAN AWAAZ
Staff reporter
भारत के लिए उर्वरक एवं कच्चा माल लेकर आने वाले कुल 15 जहाज़ सुरक्षित रूप से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। इन जहाज़ों के माध्यम से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भारत में उर्वरकों एवं कच्चे माल की आपूर्ति जारी है। उर्वरक एवं कच्चा माल लेकर आ रहे इन जहाजों के भारतीय तटों पर पहुंचने के साथ ही भारत के उर्वरक भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। पश्चिम एशिया में हाल ही में उत्पन्न संघर्ष के दौरान हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात प्रभावित होने के बावजूद भारत सरकार ने समयबद्ध रणनीति, प्रभावी समन्वय तथा निरंतर निगरानी के माध्यम से देश में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की है।
इस संकट के बावजूद भारत सरकार ने अपने कूटनीतिक एवं रणनीतिक प्रयासों के बल पर कई नए देशों से भी उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित की है और भारत की उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला पहले से अधिक मजबूत हुई है। इस पूरी प्रक्रिया में विदेशों में स्थित 28 भारतीय मिशनों (जैसे दूतावास और उच्चायोग) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन मिशनों ने संभावित उत्पादकों एवं आपूर्तिकर्ताओं से संपर्क स्थापित कर उर्वरकों की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने में उर्वरक विभाग को सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
यूरिया आपूर्ति के लिए ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की तथा नीदरलैंड सहित कई देशों से सफलतापूर्वक व्यवस्था की गई है। वहीं, डीएपी एवं एनपीके उर्वरकों के लिए लाल सागर समुद्री मार्ग के माध्यम से रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया तथा सऊदी अरब से आवश्यक व्यवस्था की गई है।
केंद्रीय रासायनिक एवं उर्वरक मंत्री श्री जेपी नड्डा ने कहा कि “पश्चिम एशिया में शुरु हुए संघर्ष की वजह से पूरी दुनिया की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई। उर्वरकों की कीमतें आसमान छूने लगीं और माल पहुंचने में लगने वाला समय भी बढ़ गया। भारत भी इस वैश्विक संकट से अछूता नहीं रहा। इससे कच्चे माल और उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति में चुनौतियां आईं, लेकिन मा. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में भारत सरकार शुरू से ही सतर्क और तैयार थी।’’
