Last Updated on June 17, 2026 10:29 pm by INDIAN AWAAZ
Staff Reporter
वित्तीय बाजारों और राजनीतिक हलकों में इस समय अयोध्या के राम मंदिर दान कोष को लेकर चल रहा विवाद गरमा गया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। पार्टी ने दान कोष में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं को “संगठित लूट” करार दिया है। नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह तीखे आरोप लगाए गए।
प्रधानमंत्री मोदी पर सीधे आरोप; ‘बड़ी मछलियों’ को बचाने का दावा
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और यूपी कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने इस कथित घोटाले के लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इस पूरे मामले में कई रसूखदार और उच्च पदस्थ लोग शामिल हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल “छोटे अधिकारियों”, चालकों और लिपिकों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। अजय राय ने साफ तौर पर कहा कि चूंकि मंदिर से जुड़े ट्रस्ट के महत्वपूर्ण नीति-निर्माता सीधे तौर पर प्रधानमंत्री के करीबी हैं, इसलिए इसकी अंतिम जवाबदेही भी प्रधानमंत्री की ही बनती है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व पर तीखे सवाल
कांग्रेस ने अपने हमले के केंद्र में ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के प्रशासनिक ढांचे को रखा है। पार्टी ने विशेष रूप से ट्रस्ट के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की भूमिका पर सवाल उठाए, जो एक सेवानिवृत्त शीर्ष नौकरशाह हैं और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में पांच साल तक प्रधान सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा कांग्रेस ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राय जैसे ट्रस्ट के अन्य प्रमुख सदस्यों की विश्वसनीयता पर भी उंगली उठाई है। विपक्ष का कहना है कि भाजपा के ही एक पूर्व सांसद ने हाल ही में बयान दिया था कि यदि वह नाम उजागर करेंगे तो कई बड़े चेहरे बेनकाब हो जाएंगे, जिससे साफ है कि यह एक सुनियोजित हेरफेर है।
1400 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का सनसनीखेज दावा
इस प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस ने एक बड़ा वित्तीय दावा करते हुए सनसनी फैला दी। अजय राय ने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण की शुरुआत से पहले देश और दुनिया भर में चलाए गए भव्य धन संग्रह अभियान के दौरान करीब 1,400 करोड़ रुपये की भारी वित्तीय गड़बड़ी की गई। उनका दावा है कि दान में मिली इस विशालकाय राशि का कोई आधिकारिक ऑडिट या हिसाब-किताब सार्वजनिक नहीं किया गया है। कांग्रेस ने तीखे शब्दों में कहा कि आस्था के नाम पर आए पैसे की इस तरह की चोरी जनता के अटूट विश्वास के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात है।
एसआईटी (SIT) के गठन पर तंज और हाई कोर्ट के जज से जांच की मांग
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) ने अयोध्या में अपनी जांच शुरू कर दी है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने कहा कि एसआईटी का गठन ही इस बात का प्रशासनिक प्रमाण है कि दान कोष में भारी धोखाधड़ी हुई है। हालांकि, पार्टी ने मौजूदा जांच की समय-सीमा और पारदर्शिता पर असंतोष व्यक्त किया है। कांग्रेस ने मांग की है कि इस एसआईटी को महज एक सप्ताह (सात दिन) के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, इस पूरे मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने किसी उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश (Sitting High Court Judge) की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग भी दोहराई है।
