Last Updated on January 29, 2026 8:37 pm by INDIAN AWAAZ
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उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति सी पी राधाकृष्णन ने सदस्यों से आग्रह किया कि वे सशक्त संसदीय निगरानी रखने और उच्च सदन में सूचीबद्ध कार्यसूची का ठीक से संचालन करने के लिए उच्चतम संसदीय मर्यादा बनाए रखें। राज्यसभा सत्र के प्रारंभ में शून्यकाल के दौरान अपने आरंभिक भाषण में श्री राधाकृष्णन ने कहा कि देश का लोकतंत्र विचारों की विविधता और जीवंत चर्चा से सार्थक होता है। उन्होंने कहा कि विचारों का सम्मानपूर्वक आदान-प्रदान और रचनात्मक चर्चा हमारे संसदीय विमर्श का मानदंड होना चाहिए। सभापति ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में है और शीघ्र ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत का बढ़ता प्रभाव और कद राष्ट्र की आर्थिक दिशा निर्धारित करने में सांसदों के रूप में हमारी भूमिका को महत्वपूर्ण बनाता है। उन्होंने कहा कि कल संसद के दोनों सदनों को राष्ट्रपति के संबोधन ने हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के लिए निर्णायक दिशा तय की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण से प्रेरित होकर राज्यसभा भी अपने मूल विधायी और विचार-विमर्श के कर्तव्यों से अपना योगदान देगी। उन्होंने कहा कि 30 बैठकों के दौरान सदन केंद्रीय बजट 2026-27 और सरकार के विधायी प्रस्तावों की गहन चर्चा करेगा।
श्री राधाकृष्णन ने कहा कि वे इस सत्र को सार्थक बनाने तथा समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में एक ठोस कदम साबित करने के लिए सभी संसदीय दलों के नेताओं और सदस्यों से पूर्ण सहयोग की आशा करते हैं।
