Last Updated on March 24, 2026 11:48 pm by INDIAN AWAAZ

राज्यसभा में प्रधानमंत्री का वक्तव्य: आगामी बुवाई सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सभी आवश्यक तैयारियां


एस एन वर्मा / नई दिल्ली

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने मंगलवार को West Asia में जारी संघर्ष के बीच क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए संवाद और कूटनीति को सबसे महत्वपूर्ण रास्ता बताया। उन्होंने कहा कि भारत तनाव कम करने और वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार अंतरराष्ट्रीय नेताओं से संपर्क में है।

राज्य सभा में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि कोविड-19 के दौरान जिस प्रकार विशेषज्ञों और एम्पॉवर्ड ग्रुप्स का गठन किया गया था, उसी तर्ज पर सरकार ने हाल ही में 7 नए एम्पॉवर्ड ग्रुप्स का गठन किया है। ये समूह सप्लाई चेन, पेट्रोल-डीजल, उर्वरक, गैस तथा महंगाई जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर त्वरित और दीर्घकालिक रणनीतियों के तहत कार्य करेंगे।

प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि साझा प्रयासों के माध्यम से देश वर्तमान परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकेगा। उन्होंने विशेष रूप से किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए कहा कि आगामी बुवाई सीजन में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सरकार ने सभी आवश्यक तैयारियां कर ली हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का निरंतर प्रयास है कि किसानों पर किसी भी प्रकार के संकट का बोझ न पड़े। उन्होंने देश के किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि हर चुनौती के समाधान के लिए सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और आजीविका सुनिश्चित करना भी भारत की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि दुनिया भर के कई जहाज स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ में फंसे हुए हैं और उनमें कई भारतीय चालक दल के सदस्य भी मौजूद हैं। संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित रूप से स्वदेश लौट चुके हैं, जिनमें ईरान से आए करीब 1,000 भारतीय भी शामिल हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार हर क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि भारत का 90 प्रतिशत से अधिक व्यापार विदेशी जहाजों के जरिए होता है, इसलिए सरकार ने ‘मेड इन इंडिया’ जहाज निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लगभग 700 अरब रुपये का निवेश किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने अपने ऊर्जा आयात के स्रोत 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिए हैं, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई है। सरकार तेजी से बदलती स्थिति पर नजर रखे हुए है और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है कि आगामी बुआई मौसम के लिए किसानों को पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध हों।