Last Updated on March 12, 2026 9:29 pm by INDIAN AWAAZ


Staff Reporter / New Delhi

विदेश मंत्री S. Jaishankar ने अपने ईरानी समकक्ष Seyed Abbas Araghchi के साथ हाल के दिनों में बातचीत कर समुद्री मार्गों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा जरूरतों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की है।

नई दिल्ली में मीडिया को जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने बताया कि दोनों मंत्रियों के बीच पिछले कुछ दिनों में तीन बार बातचीत हुई है। इन चर्चाओं में क्षेत्रीय हालात के बीच समुद्री जहाजरानी की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े विषय प्रमुख रहे।

जायसवाल ने बताया कि इस समय ईरान में लगभग 9,000 भारतीय नागरिक रह रहे हैं। भारत सरकार ने तेहरान से कुछ भारतीयों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। जो भारतीय वापस लौटना चाहते हैं, उन्हें पड़ोसी देशों Azerbaijan और Armenia के रास्ते भूमि सीमा पार कर वहां से वाणिज्यिक उड़ानों के जरिए भारत लौटने में सहायता दी जा रही है।

प्रवक्ता ने यह भी बताया कि क्षेत्र में तनाव शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi ने खाड़ी क्षेत्र के कई नेताओं से बातचीत की है। इन वार्ताओं में प्रधानमंत्री ने तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर दिया और जल्द से जल्द शांति बहाल करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और नागरिक हताहतों से बचने की जरूरत पर भी बल दिया।

बांग्लादेश को पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति के संबंध में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में जायसवाल ने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों को परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का एक बड़ा निर्यातक है। उन्होंने बताया कि Bangladesh ने भारत से डीजल आपूर्ति का अनुरोध किया है, जिस पर विचार किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि भारत 2007 से असम स्थित Numaligarh Refinery से बांग्लादेश को विभिन्न माध्यमों—जलमार्ग, रेल और बाद में India-Bangladesh Friendship Pipeline—के जरिए डीजल की आपूर्ति करता रहा है। अक्टूबर 2017 में नुमालीगढ़ रिफाइनरी और Bangladesh Petroleum Corporation के बीच हाई स्पीड डीजल की आपूर्ति के लिए एक बिक्री-खरीद समझौता भी हुआ था।

प्रवक्ता ने कहा कि डीजल निर्यात का निर्णय भारत की रिफाइनिंग क्षमता, घरेलू मांग और उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसी तरह के अनुरोध Sri Lanka और Maldives जैसे अन्य देशों से भी प्राप्त हुए हैं, जिन पर भारत की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विचार किया जा रहा है।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि विदेश सचिव Vikram Misri ने भारत सरकार की ओर से नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में शोक-पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने बताया कि यह हस्ताक्षर 5 मार्च को किए गए थे, जो शोक-पुस्तिका खुलने का पहला दिन था।

United Nations Security Council में खाड़ी सहयोग परिषद द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के संबंध में जायसवाल ने कहा कि भारत ने भी इस प्रस्ताव का सह-प्रायोजन किया है और कुल 135 देशों ने इसे समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव भारत के कई महत्वपूर्ण दृष्टिकोणों को दर्शाता है। खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं और उनकी सुरक्षा भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही खाड़ी क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी बेहद अहम है।

Pakistan की ओर से भारत-कनाडा समझौते पर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रवक्ता ने कहा कि भारत इस टिप्पणी को सख्ती से खारिज करता है। उन्होंने कहा कि परमाणु अप्रसार के मामले में भारत की साख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित है और गुप्त परमाणु प्रसार के इतिहास वाले देश को इस विषय पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान के बयान को ध्यान भटकाने की कोशिश बताया।