Last Updated on January 10, 2026 9:49 pm by INDIAN AWAAZ

ढाका से ज़ाकिर हुसैन

बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने शनिवार को ढाका के गुलशन स्थित पार्टी कार्यालय में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारीक़ रहमान से शिष्टाचार मुलाक़ात की। तारीक़ रहमान को व्यापक रूप से बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री के संभावित दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।

स्थानीय समयानुसार शाम करीब 5 बजे हुई इस बैठक की पुष्टि बीएनपी के सत्यापित फेसबुक पेज पर साझा की गई पोस्ट और वीडियो के ज़रिये की गई। बैठक के दौरान बीएनपी के महासचिव मिर्ज़ा फ़ख़रुल इस्लाम आलमगीर और स्थायी समिति के सदस्य सलाउद्दीन अहमद भी मौजूद थे। बीएनपी मीडिया सेल के सदस्य शाइरुल कबीर खान ने बताया कि यह बैठक बीएनपी अध्यक्ष के कार्यालय में हुई, जहां भारत–बांग्लादेश के द्विपक्षीय हितों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की गई। हालांकि, बातचीत के एजेंडे का आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया गया।

इस मुलाक़ात को बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी सहित देश के अहम राजनीतिक हितधारकों के साथ भारत की निरंतर कूटनीतिक संवाद प्रक्रिया के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। हाल के वर्षों में बीएनपी और भारतीय अधिकारियों के बीच संपर्कों की एक श्रृंखला में यह बैठक एक और महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है।

मार्च 2023 में बीएनपी के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने ढाका में उच्चायुक्त प्रणय वर्मा द्वारा आयोजित रात्रिभोज में भाग लिया था। इसके बाद सितंबर 2024 में प्रणय वर्मा और बीएनपी के वरिष्ठ नेताओं के बीच कई बैठकें हुईं, जो दोनों पक्षों के बीच निरंतर राजनीतिक संपर्क का संकेत देती हैं। भारत ने बीएनपी नेतृत्व के प्रति कई सद्भावना संकेत भी दिए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी प्रमुख खालिदा ज़िया की बीमारी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके परिवार के प्रति समर्थन व्यक्त किया था, जबकि विदेश मंत्री एस. जयशंकर को खालिदा ज़िया के अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए नामित किया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने तारीक़ रहमान को शोक संदेश भी भेजा था, जिससे नई दिल्ली की बीएनपी नेतृत्व के साथ सक्रिय भागीदारी रेखांकित होती है।

यह ताज़ा बैठक ऐसे समय में हुई है जब बांग्लादेश में हाल के महीनों में भारत-विरोधी प्रदर्शनों में वृद्धि देखी गई है। कुछ प्रदर्शनकारी समूहों और राजनीतिक संगठनों ने भारत पर बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप का आरोप लगाया है। शासन, चुनाव और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर चल रही बहसों के बीच भारत का नाम अक्सर सड़क प्रदर्शनों और राजनीतिक बयानबाज़ी में सामने आया है, विशेषकर युवा नेता उस्मान हादी की हत्या से जुड़े आरोपों के बाद तनाव और बढ़ गया।

इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं, जिनमें राजशाही और चटगांव में स्थित भारतीय कूटनीतिक प्रतिष्ठानों पर हमले शामिल हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बांग्लादेशी नागरिकों के लिए वीज़ा सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित करनी पड़ीं, जिससे दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के संपर्क पर भी असर पड़ा।

ऐसे संवेदनशील राजनीतिक माहौल में प्रणय वर्मा और तारीक़ रहमान की मुलाक़ात को बांग्लादेश की सभी प्रमुख राजनीतिक ताक़तों के साथ संवाद बनाए रखने के भारत के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक अस्थिरता के इस दौर में यह संपर्क भारत–बांग्लादेश संबंधों के भविष्य के लिहाज़ से खास महत्व रखता है।