Last Updated on December 27, 2024 6:21 pm by INDIAN AWAAZ

उदयपुर – 27 दिसंबर 2024
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को देश को प्रदत्त उनकी बहुआयामी सेवाओं के लिए सदैव याद रखा जाएगा। उन्होंने भेदभाव से ऊपर उठकर सभी वर्गों के हित में निर्णय किए। श्रमण डॉ. पुष्पेंद्र ने कहा कि डॉ सिंह के नेतृत्व और संवेदनशीलता ने देश के अल्पसंख्यक समुदायों के उत्थान में अहम भूमिका निभाई। उनके प्रधानमंत्रित्व काल में जैन समाज को 27 जनवरी 2014 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक का दर्जा दिया, जो कि जैन समाज की पहचान, अधिकारों और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था।
यह निर्णय उनके सभी समुदायों के प्रति समान दृष्टिकोण और सामाजिक न्याय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जैन समाज के प्रति उनकी यह ऐतिहासिक पहल सदैव याद रखी जाएगी। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर सहित अनेक उच्चतर पदों पर विनम्रता से सेवाएं देने वाले विख्यात अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी प्रामाणिकता के लिए भी जाना जाएगा। नैतिक व मानवीय मूल्यों के उन्नयन में उनके योगदान के लिए जैन समाज ने उन्हें प्रतिष्ठित अणुव्रत पुरस्कार (2021) से सम्मानित किया।
साहित्यकार डॉ. दिलीप धींग ने डॉ. मनमोहन सिंह के उस सारगर्भित और प्रभावी वक्तव्य को याद किया जो प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने 27 मई, 2006 को दिल्ली के विज्ञान भवन में जैनविद्या संस्थान द्वारा तैयार जैन पांडुलिपि कैटलॉग जारी करने के अवसर पर दिया था। डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा था कि जैन धर्म के तर्कपूर्ण सिद्धान्तों के आधार पर देश में वैज्ञानिक सोच का विकास हो सका। जैन विचारधारा ने भारत को रूढ़ियों तथा अंधविश्वासों से लड़ने के लिए शक्ति दी। जैन विचारधारा से सामाजिक, धार्मिक तथा आर्थिक समस्याओं से छुटकारा पाने में मदद मिली। जैन धर्म भारतीय बुद्धिजीविता का एक अभिन्न अंग है, जिसके जरिए भारत अतीत में भी काफी गौरव प्राप्त कर सका है। अहिंसा के प्रति इसके दृष्टिकोण में जीवन एवं प्रकृति के बीच तालमेल स्थापित करने वाली शैली विकसित की है। आज के भौतिकवादी युग में जैन धर्म की आध्यात्मिक धरोहर अधिक प्रासंगिक है।
