Last Updated on March 25, 2026 1:48 pm by INDIAN AWAAZ

डॉ. प्रीति गद्दाद, कंसल्टेंट पीडियाट्रिशियन, किंडर वुमेन्स हॉस्पिटल, बेंगलुरु
अक्सर माता-पिता बच्चों के डॉक्टर से एक ही सवाल पूछते हैं— “मेरा बच्चा हमेशा थका-थका रहता है, किसी काम में रुचि नहीं लेता, क्या वह सिर्फ़ आलसी है?”
आज के तेज़ रफ़्तार दौर में बच्चों पर पढ़ाई, अतिरिक्त गतिविधियों और सामाजिक जीवन को संभालने का दबाव पहले से कहीं ज़्यादा है। ऐसे में अगर बच्चा थका हुआ या सुस्त दिखाई दे तो इसे अक्सर आलस्य समझ लिया जाता है। लेकिन कई बार यह केवल आलस नहीं बल्कि किसी छिपी हुई स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है।
आम तौर पर आलस्य को काम करने की इच्छा की कमी या प्रेरणा की कमी माना जाता है। लेकिन बच्चों के मामले में वास्तविक आलस्य अपेक्षाकृत कम पाया जाता है। अधिकांश बच्चे स्वभाव से जिज्ञासु, सक्रिय और ऊर्जावान होते हैं। यदि कोई बच्चा लगातार थका हुआ, उदासीन या अलग-थलग दिखे, तो यह संकेत हो सकता है कि समस्या कहीं और है और उसे ध्यान से समझने की आवश्यकता है।
पैटर्न को समझना है ज़रूरी
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि माता-पिता बच्चे के व्यवहार में आने वाले पैटर्न को पहचानें।
- क्या थकान लगातार बनी रहती है?
- क्या इससे स्कूल, खेलकूद या दोस्तों के साथ समय बिताने पर असर पड़ रहा है?
- क्या हाल ही में उसके व्यवहार या पढ़ाई में कोई बदलाव आया है?
ऐसे सवालों के जवाब यह समझने में मदद करते हैं कि मामला केवल व्यवहार का है या किसी चिकित्सीय कारण से जुड़ा हुआ है।
कम ऊर्जा के पीछे छिपे संभावित स्वास्थ्य कारण
बच्चों में कई स्वास्थ्य स्थितियाँ ऐसी होती हैं जो थकान या कम सक्रियता के रूप में दिखाई देती हैं।
1. पोषण की कमी
आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया बच्चों, खासकर किशोरावस्था में प्रवेश कर रहे बच्चों में थकान का एक आम कारण है। ऐसे बच्चों का चेहरा पीला लग सकता है, वे जल्दी थक जाते हैं और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई महसूस करते हैं।
2. थायरॉयड संबंधी समस्या
अंडरएक्टिव थायरॉयड (हाइपोथायरॉयडिज़्म) के कारण सुस्ती, वजन बढ़ना, त्वचा का सूखापन और पढ़ाई में गिरावट जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यह समस्या बहुत आम नहीं है, लेकिन लगातार थकान होने पर इसकी जाँच आवश्यक हो सकती है।
3. नींद से जुड़ी समस्याएँ
पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद न मिलना बच्चों में दिन भर की थकान का बड़ा कारण है। देर रात तक मोबाइल या टीवी देखना, अनियमित सोने-जागने का समय या स्लीप एपनिया जैसी समस्याएँ बच्चों की ऊर्जा पर गंभीर असर डाल सकती हैं।
4. बार-बार होने वाले संक्रमण या कमजोर प्रतिरक्षा
जो बच्चे बार-बार बीमार पड़ते हैं, उन्हें पूरी तरह ठीक होने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। इसका परिणाम लगातार थकान और कम सहनशक्ति के रूप में सामने आ सकता है।
5. दीर्घकालिक बीमारियाँ
अस्थमा, एलर्जी या कभी-कभी बिना पहचान की हृदय संबंधी समस्या भी बच्चों को अपने साथियों की तुलना में जल्दी थका सकती है।
आधुनिक जीवनशैली का प्रभाव
आज की जीवनशैली भी बच्चों की ऊर्जा और व्यवहार को प्रभावित करती है। अत्यधिक स्क्रीन टाइम, बाहर खेलने की कमी और अस्वास्थ्यकर खान-पान बच्चों में सुस्ती पैदा कर सकते हैं।
जो बच्चे घंटों मोबाइल, टैबलेट या कंप्यूटर पर बिताते हैं, वे कई बार इसलिए निष्क्रिय लगते हैं क्योंकि उन्हें डिजिटल थकान हो जाती है और शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है।
इसी तरह, यदि भोजन में पोषक तत्वों की कमी हो और प्रोसेस्ड फूड अधिक हो, तो यह भी बच्चे की ऊर्जा और समग्र स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
भावनात्मक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण
बच्चों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। आजकल बच्चों को पढ़ाई का दबाव, सामाजिक चुनौतियाँ और ऑनलाइन दुनिया से जुड़ा तनाव झेलना पड़ता है।
थकान, रुचि की कमी या अकेले रहना कई बार चिंता, तनाव या अवसाद के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। बच्चे अक्सर अपनी भावनाएँ शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते। इसके बजाय वे व्यवहार, नींद या भूख में बदलाव के माध्यम से अपने मन की स्थिति दिखाते हैं।
कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए
कभी-कभी थकान होना सामान्य है, लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है, जैसे—
- कई हफ्तों तक लगातार थकान रहना
- पढ़ाई या स्कूल के प्रदर्शन में अचानक गिरावट
- उन गतिविधियों में रुचि कम हो जाना जिन्हें बच्चा पहले पसंद करता था
- बिना कारण वजन बढ़ना या कम होना
- चेहरा पीला दिखना या बार-बार सिरदर्द की शिकायत
- नींद के पैटर्न में बदलाव
- जल्दी सांस फूलना या शारीरिक सहनशक्ति कम होना
यदि ऐसे लक्षण दिखाई दें तो बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित है।
माता-पिता क्या कर सकते हैं
अच्छी बात यह है कि कई मामलों में कुछ सरल कदमों से स्थिति में सुधार लाया जा सकता है।
- बच्चों को आयरन, प्रोटीन और विटामिन से भरपूर संतुलित आहार दें
- नियमित शारीरिक गतिविधि और बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें
- सोने का नियमित समय तय करें और सोने से पहले स्क्रीन टाइम सीमित रखें
- घर में ऐसा माहौल बनाएं जहाँ बच्चा अपनी बातें खुलकर साझा कर सके
- बच्चे को बिना कारण “आलसी” कहकर लेबल लगाने से बचें
सजगता ही समाधान की कुंजी
हर थका हुआ बच्चा बीमार नहीं होता और हर शांत चरण किसी गंभीर समस्या का संकेत भी नहीं होता। लेकिन यदि माता-पिता सतर्क और संवेदनशील रहें तो वे बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को समय रहते पहचान सकते हैं।
शारीरिक या मानसिक किसी भी समस्या की जल्दी पहचान होने से उसका इलाज आसान हो जाता है और परिणाम भी बेहतर होते हैं।
बाल रोग विशेषज्ञों के रूप में हम माता-पिता से यही कहते हैं कि अपने मन की आवाज़ पर भरोसा करें। यदि आपको अपने बच्चे के व्यवहार या ऊर्जा स्तर में कुछ अलग महसूस हो, तो उसे नज़रअंदाज़ न करें।
कई बार जो चीज़ हमें आलस लगती है, वह दरअसल बच्चे का मदद मांगने का तरीका होती है—बस वह उसे शब्दों में कह नहीं पाता।
