Last Updated on March 26, 2026 5:12 pm by INDIAN AWAAZ

AMN / नई दिल्ली

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने संकेत दिया है कि रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही मित्र देशों के लिए जारी रहेगी, जिनमें भारत भी शामिल है।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि भारत, चीन, रूस और अन्य मित्र देशों के जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के विरोधी देशों से जुड़े जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

अराघची ने कहा कि मौजूदा समय में यह क्षेत्र युद्ध जैसी परिस्थितियों से गुजर रहा है, इसलिए ईरान के दुश्मनों या उनके सहयोगियों के जहाजों को यहां से गुजरने देने का कोई कारण नहीं है। लेकिन मित्र देशों के लिए व्यापारिक गतिविधियां जारी रहेंगी।

भारत के लिए यह घोषणा बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि देश के कुल कच्चे तेल आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता है और इन जहाजों को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर ही गुजरना पड़ता है। यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाला दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के इस बयान से भारत सहित एशिया के कई देशों की आपूर्ति संबंधी चिंताएं कुछ हद तक कम हो सकती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि अगर क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार और परिवहन लागत पर पड़ सकता है।

भारत सरकार भी पश्चिम एशिया की स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए है, क्योंकि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री परिवहन लागत और अंततः घरेलू ईंधन कीमतों पर असर डाल सकता है।