Last Updated on March 26, 2026 12:45 am by INDIAN AWAAZ

अशफाक कायममखानी / जयपुर

राजस्थान के Sikar जिले के गुहाला गांव में सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की एक अनूठी मिसाल सामने आई है। यहां मुस्लिम समुदाय के पास ईदगाह के लिए जमीन नहीं होने की समस्या को देखते हुए स्थानीय हिंदू भाइयों ने आगे आकर कीमती जमीन दान कर दी। इस पहल को क्षेत्र में गंगा-जमुनी तहजीब का जीवंत उदाहरण बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार गुहाला गांव के पास स्थित नरसिंहपुरी पंचायत की सवावाली ढाणी में मुस्लिम समुदाय के पास ईदगाह के लिए अलग से कोई जमीन नहीं थी। ऐसे में समुदाय के लोग वर्षों से एक छोटी मस्जिद में ही ईद और अन्य अवसरों की नमाज अदा करते आ रहे थे। त्योहारों के दौरान नमाज के समय जगह कम पड़ने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था।

स्थानीय हिंदू समाज ने जब इस समस्या को समझा तो माली (सैनी) समाज के चार भाइयों— लक्ष्मण राम सैनी, भोपाल राम सैनी, पूरणमल सैनी और जगदीश सैनी—ने ईद के पवित्र अवसर पर ईदगाह के लिए अपनी कीमती जमीन दान करने का फैसला किया। उनके इस कदम को गांव में भाईचारे और आपसी सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है।

ईद की नमाज के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने चारों सैनी भाइयों और इस पहल में सहयोग देने वाले अन्य ग्रामीणों का फूलमालाओं से स्वागत किया और आभार व्यक्त किया। समुदाय के बुजुर्गों ने कहा कि यह दान केवल जमीन का नहीं बल्कि इंसानियत और आपसी प्रेम का प्रतीक है, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी।

इस बीच पास के Jhunjhunu जिले में ईद की नमाज को लेकर कुछ विवाद की खबरें भी सामने आई थीं। वहां वर्षों से नमाज पढ़ी जाने वाली जगह पर नमाज रोकने की कोशिशों के बीच पूर्व मंत्री Rajendra Singh Gudha की मौजूदगी में नमाज अदा की गई। ऐसे माहौल में सीकर के गुहाला गांव से आई यह खबर सामाजिक सौहार्द की एक सकारात्मक मिसाल के रूप में देखी जा रही है।

दरअसल, शेखावाटी क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के लिए जमीन दान करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इस क्षेत्र में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग कई बार एक-दूसरे के धार्मिक और सामाजिक कार्यों में सहयोग करते रहे हैं।

उदाहरण के तौर पर Fatehpur, Sikar और Beswa में मुस्लिम समुदाय ने सरकारी स्कूल और अस्पताल के लिए कीमती जमीन दान की थी, जहां आज बालिका कॉलेज और अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इसी तरह Ladnun के पास लेड़ी गांव में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने माताजी का मंदिर बनवाने में भी योगदान दिया था।

गुहाला गांव में ईदगाह के लिए जमीन दान करने की यह पहल एक बार फिर यह साबित करती है कि शेखावाटी की धरती पर गंगा-जमुनी संस्कृति और आपसी भाईचारे की परंपरा आज भी जीवित है, जहां धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत और सामाजिक सद्भाव को महत्व दिया जाता है।