AMB BIZ DESK

घरेलू शेयर बाजारों ने नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत सोमवार को सुस्त रुख के साथ की। कमजोर वैश्विक संकेतों, निवेशकों के घटते जोखिम लेने के रुझान और चुनिंदा शेयरों में बिकवाली के दबाव के चलते प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी—दोनों में करीब 0.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 324.17 अंक या 0.39 प्रतिशत गिरकर 83,246.18 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी50 108.85 अंक या 0.42 प्रतिशत टूटकर 25,585.5 पर आ गया।

वैश्विक और मैक्रो संकेत

वैश्विक मोर्चे पर निवेशकों की धारणा कमजोर बनी रही। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा कई यूरोपीय देशों पर टैक्स लगाने की धमकी—ग्रीनलैंड के अधिग्रहण के उनके प्रस्ताव का विरोध करने के बाद—से अनिश्चितता बढ़ी। घरेलू स्तर पर, भारत-अमेरिका संभावित व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, खासकर अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की कमजोर भागीदारी भी बाजार पर भारी पड़ी। आंकड़ों के मुताबिक 2025 भर एफपीआई भारतीय शेयरों में शुद्ध विक्रेता रहे, जिससे बीते कुछ महीनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है।

चुनिंदा शेयरों में दबाव

सोमवार की गिरावट में दिग्गज शेयरों की भूमिका अहम रही। तिमाही नतीजों के बाद Reliance Industries, ICICI Bank और HDFC Bank सबसे बड़े गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे, जिससे प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ा।

सेक्टरवार प्रदर्शन

सेक्टरों के लिहाज से बाजार में मिलाजुला रुख देखने को मिला:

  • निफ्टी रियल्टी में 1.99 प्रतिशत की तेज गिरावट रही, जो ब्याज दरों और मांग को लेकर चिंताओं को दर्शाती है।
  • निफ्टी मीडिया 1.84 प्रतिशत लुढ़का।
  • निफ्टी ऑयल एंड गैस में 1.56 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

वहीं, कुछ सेक्टरों में मजबूती भी दिखी:

  • निफ्टी एफएमसीजी 0.67 प्रतिशत चढ़ा, जहां रक्षात्मक खरीदारी देखने को मिली।
  • निफ्टी ऑटो में 0.13 प्रतिशत की मामूली बढ़त रही।

ब्रॉडर मार्केट का हाल

ब्रॉडर बाजार में भी कमजोरी बनी रही। निफ्टी मिडकैप 100 0.37 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 0.99 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ, जो निवेशकों की सतर्कता और जोखिम से बचाव की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

पिछले वर्षों से तुलना

अब तक 2026 में सेंसेक्स और निफ्टी करीब 2 प्रतिशत गिर चुके हैं। इसके मुकाबले 2025 में दोनों सूचकांकों ने 8–10 प्रतिशत का रिटर्न दिया था, हालांकि यह हाल के वर्षों की तुलना में कम रहा।
2024 में बाजार ने लगभग 9–10 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की थी, जबकि 2023 में रिटर्न 16–17 प्रतिशत तक मजबूत रहा। 2022 में दोनों सूचकांकों में लगभग 3 प्रतिशत की सीमित बढ़त देखी गई थी।

आगे की राह

विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, व्यापार संबंधी अनिश्चितता, एफपीआई प्रवाह और तिमाही नतीजों पर निवेशकों की नजर रहेगी। स्पष्ट संकेत मिलने तक बाजार में चयनात्मक और सतर्क रुख बने रहने की संभावना है।

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