Last Updated on April 10, 2026 11:54 pm by INDIAN AWAAZ

पटना/नई दिल्ली:
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज देश की राजधानी में उच्च सदन (राज्यसभा) के सदस्य के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति द्वारा दिलाई गई इस शपथ के दौरान सत्ता पक्ष के कई वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री भी उपस्थित रहे। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना केवल एक पद परिवर्तन नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ और ऐतिहासिक उपलब्धि है।
इस शपथ के साथ ही नीतीश कुमार देश के उन चुनिंदा राजनेताओं की श्रेणी में शामिल हो गए हैं, जिन्हें चारों सदनों—लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद—का सदस्य रहने का गौरव प्राप्त है। उनकी यह नई पारी राष्ट्रीय राजनीति में उनके बढ़ते कद और भविष्य की बड़ी भूमिका का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली के इस सफर से अब वे राष्ट्रीय गठबंधन और नीति-निर्धारण में अधिक प्रभावी भूमिका निभाएंगे।
हालांकि, इस बड़े बदलाव ने बिहार की राजनीति में कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बिहार का अगला नेतृत्व कौन संभालेगा और क्या राज्य को जल्द ही नया मुख्यमंत्री मिलने वाला है? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राज्यसभा में उनकी मौजूदगी से बिहार के ज्वलंत मुद्दों को केंद्र के समक्ष और भी मजबूती से रखा जा सकेगा। मुख्यमंत्री के इस फैसले ने बिहार की भविष्य की राजनीति को एक नई दिशा में मोड़ दिया है, जहां जनता को अब नेतृत्व में बड़े फेरबदल और राज्य के विकास की निरंतरता को लेकर बड़ी उम्मीदें हैं।
