एस एन वर्मा

लगभग प्रत्येक वर्ष मानसून दिल्ली एनसीआर ,मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों की पानी की निकासी की कुव्यवस्था का पोल खोल देता है।बरसाती पानी का जमाव इन हाईप्रोफाइल मेट्ो सिटी में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर देता है।ऐसी स्थिति में भारत सरकार की 100 स्मार्ट सिटी पर चल रहे कार्यों पर भी एक प्रश्न चिन्ह खड़ा कर देता है कि इन नगरों में पानी की निकासी की व्यवस्था कैसी की जा रही है।याद रहे कि भारत वह देश है जहां लगभग 3 हजार वर्ष ईसा पूर्व सिंधु घाटी सभ्यता जिसे हड़प्पा संस्कृति भी कहा जाता है की जल निकासी व्यवस्था बहुत प्रभावशाली थी।

हड़प्पा के शहरों की सबसे विशिष्ट विशेषता सावधानीपूर्वक नियोजित जल निकासी प्रणाली है।सिन्धु सभ्यता नगरों में चौड़ी-चौड़ी सड़कें, पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर थी। ये सड़कें एक दूसरे को प्रायः समकोण पर काटती थीं। इस प्रकार प्रत्येक नगर अनेक खण्डों (मुहल्लों) में बँट जाता था।क्या अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त 100 स्मार्ट सिटी में पानी की निकासी की व्यवस्था भी उन्नत होगी।अभी बरसाती पानी ने दिल्ली,गुरुग्राम और नोएडा जैसे एनसीआर के शहरों की क्या दुर्दशा कर दी ,यह किसी से छुपा हुआ नहंी है।हांलाकि ये सभी नियोजित शहर माना जाता है।सिर्फ उंची उंची अटटृालिकाएं खड़ी कर देने और उनमें संचार की अत्याधुनिक साधन प्रदान कर देने से क्या कोई शहर स्मार्ट सिटी नहीं बन जाता है।हमारे देश में जो 100 स्मार्ट सिटी बनने जा रहा है उस पर भी एक नजर डाल लेते हैं।25 जून 2015 को प्रारंभ किए गए स्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य स्मार्ट समाधान के एप्लिकेशन से अपने नागरिकों को प्रमुख अवसंरचना ढांचा, स्वच्छ तथा टिकाऊ पर्यावरण और जीवन की एक समुचित गुणवत्ता प्रदान करना है।

आवासीय और शहरी विकास मंत्रालय के अनुसार स्मार्ट सिटी की कोर बुनियादी सुविधाओं में पर्याप्त पानी की आपूर्ति,निश्चित विद्युत आपूर्ति ,ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सहित स्वच्छता,कुशल शहरी गतिशीलता और सार्वजनिक परिवहन ,किफायती आवास, विशेष रूप से गरीबों के लिए ,सुदृढ़ आई टी कनेक्टिविटी और डिजिटलीकरण ,सुशासन, विशेष रूप से ई-गवर्नेंस और नागरिक भागीदारी ,टिकाऊ पर्यावरण ,नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा, विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों की सुरक्षा, और स्वास्थ्य और शिक्षा शामिल हैं।मंत्रालय की ही एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत की वर्तमान जनसंख्या का लगभग 31 फीसदी आबादी शहरों में बसता है और इनका सकल घरेलू उत्पाद में 63 फीसदी (जनगणना 2011) का योगदान हैं। ऐसी उम्मीद है कि वर्ष 2030 तक शहरी क्षेत्रों में भारत की आबादी का 40 फीसदी रहेगा और भारत के सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान 75 फीसदी का होगा ।

इसके लिए भौतिक, संस्थागत, सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे के व्यापक विकास की आवश्यकता है। ये सभी जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने एवं लोगों और निवेश को आकर्षित करने, विकास एवं प्रगति के एक गुणी चक्र की स्थापना करने में महत्वपूर्ण हैं। स्मार्ट सिटी का विकास इसी दिशा में एक कदम है।इस लेख का उद्देश्य स्मार्ट सिटी की योजना का खिल्ली उड़ाना या आलाोचना करना नहीं है। देश की तरक्की के लिए सिटी का स्मार्ट होना बहुत जरूरी है। हमारा तो बस यह कहना है कि इन स्मार्ट सिटी में बरसाती पानी के निकास की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए ,वरना़ बरसात के महीनों में अभी के विकसित शहरों जैसा हाल उसका भी न हो जाए ,बस इसके लिए सरकार को आगाह करना है।बा़ढ़ व बरसाती पानी के जमाव से हुए नुकसान का आंकलन भी किया जाना चाहिए। साथ ही यातायात व्यवस्था का चरमरा जाना और इन सबके कारण जनजीवन पर प्रभाव पर भी विचार किया जाना चाहिए तभी भविष्य में इसकी भयावह अवस्था में सुधार लाया जा सकेगा।

( लेखक स्वतंत्र पत्रकार व टिप्पणीकार हैं )