इंडियन आवाज़     22 Feb 2024 10:34:32      انڈین آواز
FreeCurrencyRates.com

फैसलाकुन मोड़ पर पहुुंचा मुलायम कुन्बे का टकराव

 

s-p-familyहिसाम सिद्दीक़ी/ लखनऊ

 समाजवादी पार्टी के आल इंडिया सदर मुलायम सिंह यादव के कुन्बे में पैदा हुआ टकराव अब अपने फैसलाकुन मोड़ पर पहुंच चुका है। पार्टी के कई पुराने लोगों ने जैसे-जैसे झगड़ा खत्म कराने की कोशिशें की वैसे-वैसे झगड़ा बढता ही रहा। नौबत यहां तक पहुंच गई कि अखिलेश यादव के इर्दगिर्द घूमने वाले नए नवेले यूथ लीडर कहे जाने वाले लोगों ने भी मुलायम सिंह यादव को खत लिखकर उन्हें सियासी नसीहत देने का काम शुरू कर दिया। मुलायम कुन्बे में कोई टकराव नहीं है जो थोड़ी बहुत गलतफहमियां हैं वह आपस में बैठकर तय कर ली जाएंगी। यह कहने और टकराव खत्म कराने की कोशिश मंे लगे पार्टी के सीनियर लीडरों को भी 19 अक्टूबर को उस वक्त जबरदस्त झटका लगा जब अखिलेश यादव के साथ रहकर पहली बार एमएलसी बने उदयवीर सिंह ने मुलायम सिंह यादव को एक ऐसा खत लिख दिया जो तमाम सीनियर लीडरों की नजर में गलत है। कई सीनियर लीडरों ने खुलकर कहा कि उदयवीर सिंह के नाम से जो खत मुलायम सिंह यादव को लिखा गया है उसकी ड्राफ्टिंग सालों से मुलायम सिंह यादव के भरोसेमंद रहे उनके चचेरे भाई और राज्य सभा मेम्बर राम गोपाल यादव ने की है और वजीर-ए-आला अखिलेश यादव की मंजूरी के बाद ही उदयवीर सिंह ने नेताजी (मुलायम ंिसंह यादव) को यह खत भेजा। अगर ऐसा नहीं है तो उम्र में अपने वालिद से भी बड़े मुलायम सिंह यादव को लिखे खत में उनपर जाती हमले करने वाले उदयवीर सिंह के खिलाफ अखिलेश यादव को सख्त तरीन कार्रवाई करनी चाहिए थी।

खुद वजीर-ए-आला अखिलेश यादव उदयवीर सिंह से पहले अपने वालिद और समाजवादी पार्टी के सदर मुलायम सिंह यादव को एक खत लिखकर अपने बगावती तेवर का एहसास करा चुके थे। समाजवादी पार्टी पंाच नवम्बर को अपना सिल्वर जुबली जलसा लखनऊ में कर रही है लेकिन अखिलेश यादव ने अपने वालिद को खत लिखकर कह दिया कि तीन नवम्बर से वह अकेले ही ‘विकास रथयात्रा’ पर निकल जाएंगे। मीडिया नुमाइंदों के बार-बार सवाल करने के बावजूद अखिलेश यादव ने यह नहीं बताया कि पंाच नवम्बर को पार्टी का जो सिल्वर जुबली जलसा हो रहा है उसमें वह शामिल होंगे या नहीं। 19 अक्टूबर को उदयवीर सिंह ने मुलायम सिंह यादव को जो इंतेहाई काबिले एतराज खत लिखा, उसपर अखिलेश यादव ने सिर्फ इतना कहकर अपना पीछा छुड़ा लिया कि उनके घरेलू मामले में कोई भी शख्स दखल न दे और न ही खत लिखे।
अखिलेश यादव के साथी मैनपुरी, एटा और मथुरा की लोकल बाडी सीट से पहली बार एमएलसी बने समाजवादी युवजन सभा और छात्रसभा के नेशनल सेक्रेटरी रह चुके उदयवीर सिंह ने मुलायम सिंह यादव को जो खत लिखा है उसे देखकर ऐसा लगता है कि जैसे बहुत सीनियर लीडर ने अपनी पार्टी के किसी मामूली वर्कर को उसकी तमाम कमियां गिनाने के लिए लिखा हो। उन्होने यह तक लिख दिया कि शिवपाल यादव अखिलेश यादव से जलन रखते हैं और आप की दूसरी बीवी अखिलेश यादव की सौतेली मां (साधना गुप्ता) अखिलेश यादव के खिलाफ जो साजिशें करती रहती हैं शिवपाल यादव उन साजिशों में शामिल रहते हैं। दरअस्ल वह अखिलेश यादव की सौतेली मां का सियासी चेहरा बनकर काम कर रहे है। उन्होने लिखा 2012 में जब आपने अखिलेश यादव को वजीर-ए-आला बनाने का फैसला किया आपकी बीवी उसी वक्त से अखिलेश यादव के खिलाफ साजिशें करने लगी। वह खुद तो सामने आने की हिम्मत न कर सकी लेकिन शिवपाल यादव फौरन ही उनका सियासी चेहरा बनकर सामने आ गए। उन्होने लिखा कि आपकी दूसरी बीवी, आपका बेटा और बहू कुछ रिश्तेदारों के साथ मिलकर अखिलेश यादव के खिलाफ मुसलसल साजिशें कर रहे हैं। इस ‘गैंग’ को एक चालाक चालबाज की जरूरत थी जो आपने अमर सिंह के जरिए खुद ही पूरी कर दी।

उदयवीर सिंह ने मुलायम सिंह को लिखा कि अब आप पार्टी की कौमी सदारत (राष्ट्रीय अध्यक्षता) छोड़ दें यह जिम्मेदारी अब अखिलेश यादव को सौंप कर आप पार्टी के राहबर (मार्गदर्शक) बन जाइए। उदयवीर ने डिसिप्लिन और छोटे बडे़ के लिहाज की तमाम हदें तोड़कर यह तक लिख दिया कि अखिलेश आपके सियासी वारिस हैं या नहीं यह बात भी वाजेह (स्पष्ट) कर दीजिए। अगर आप किसी मुगालते में हैं तो वाजेह (स्पष्ट) कर दीजिए ताकि हम और हमारे जैसे पार्टी वर्कर किसी कशमकश में न रहें। उदयवीर की हिम्मत इतनी बढ गई कि उन्होने शिवपाल यादव को सीधे-सीधे और मुलायम सिंह यादव को घुमा फिराकर डिसिप्लिनशिकन (अनुशासनहीन) बता दिया और लिखा कि 15 अगस्त को आपने कहा था कि अगर ‘आप और शिवपाल पार्टी से अलग हो गए तो पार्टी की ऐसी तैसी हो जाएगी, यह क्या है’ आपके बयान के बाद कुछ लोगों ने इसी तरह डिसिप्लिन तोड़ते हुए गैर मोहज्जब (अमर्यादित) बयानबाजी की, शिवपाल यादव के दरवाजे पर इकट्ठा होकर लोगों ने अखिलेश के खिलाफ नारेबाजी की उन लोगों के खिलाफ तो कोई कार्रवाई हुई नहीं लेकिन पार्टी के जिन यूथ लीडरों ने अखिलेश की हिमायत में नारेबाजी कर दी तो सभी को पार्टी से निकाल दिया गया। पार्टी चलाने का यह कौन सा तरीका है?

अखिलेश यादव को वजीर-ए-आला बने साढे चार साल से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन उनके हावभाव से ऐसा लगता है कि वह अभी तक सियासी एतबार से बालिग (परिपक्व) नहीं हो पाए हैं। वह अपने दोस्तों की जिस मंडली से घिरे हुए हैं उनमें भी सियासी शऊर की जबरदस्त कमी है। साबिक चीफ सेक्रेटरी आलोक रंजन और अखिलेश के नजदीकी एक आईएएस अफसर ने भी उन्हें चढाने और बर्बादी के रास्ते पर ले जाने मे काफी बड़ा रोल अदा किया है। साफ-साफ नजर आ रहा है कि अखिलेश यादव, आंध्र प्रदेश के मकबूल तरीन (अतिलोकप्रिय) वजीर-ए-आला रहे राजशेखर रेड्डी के बेटे जगन मोहन रेड्डी के रास्ते पर चल रहे हैं। जो सियासी एतबार से तबाही का रास्ता है। अखिलेश के अंदर अपने वालिद मुलायम सिंह यादव जैसी जुझारू सलाहियतें भी नहीं हैं। अगर उन्होने अपने को तब्दील नहीं किया तो प्रदेश में वजीर-ए-आला बनने का उनका शायद यह पहला और आखिरी मौका होगा। उन्हेे और उनके साथियों को यह गलतफहमी है कि अवाम में उनकी तस्वीर बहुत अच्छी है इसलिए वह अपने दम पर दुबारा जीत कर आ सकते हैं। उन्हें शायद इस बात का एहसास नहीं है कि अवाम में जब यह बात भी जाएगी कि अखिलेश अपने वालिद के ऐसे होनहार बेटे हैं जिनके साथियों ने वालिद की तौहीन की इसके बावजूद उन्होने अपने वालिद के बजाए दोस्तों को ही साथ रखने को तरजीह दी तो उनकी सारी की सारी तस्वीर दागदार होने में दो मिनट भी नहीं लगेगे।

खबर लिखे जाने तक मुलायम सिंह यादव या शिवपाल यादव की जानिब से उदयवीर सिंह के खत पर कोई रद्देअमल नहीं आया था। लेकिन जराए से यह खबर जरूर मिली थी कि उनकी इस हरकत से मुलायम सिंह यादव को काफी जेहनी तकलीफ पहुची, कुछ कर पाने में वह अपने आपको बेबस पा रहे थे। उन्हे इस बात का अफसोस जरूर है कि कुछ गैर जिम्मेदार और सियासत में नए-नए शामिल हुए लोेगों के चक्कर में पड़कर उनका इंतेहाई शरीफ और फरमांबरदार बेटा अखिलेश यादव बिगड़ गया है।
तमाम हालात का जायजा लेने के बाद एक बात साफ दिख रही है कि अगर फौरन नहीं तो ऐन एलक्शन के वक्त एक के बजाए दो-दो समाजवादी पार्टियां मैदान में उतरेंगी। एक मुलायम सिहं यादव और शिवपाल की समाजवादी पार्टी तो दूसरी अखिलेश और रामगोपाल यादव की होगी। इसका नतीजा भी अभी से दिखने लगा है। उत्तर प्रदेश में बीजेपी काफी मजबूत होकर उभरेगी शायद यादव कुन्बे में टकराव और लड़ाई कराने वालों की मंशा भी यही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

خبرنامہ

مسلم تعلیمی اداروں میں غیر مسلم طلبہ کی اکثریت، رپورٹ

جاوید اختر ایک تحقیقاتی رپورٹ کے مطابق ہندوستان میں مسلما ...

وزیر اعظم نریندر مودی نے دوحہ میں قطر کے امیر شیخ تمیم بن حمد الثانی کے ساتھ باہمی میٹنگ کی

وزیراعظم نریندرمودی نے آج دوحہ میں قطر کے امیر شیخ تمیم بن حم ...

MARQUEE

Singapore: PM urges married Singaporean couples to have babies during year of Dragon

@leehsienloong AMN / WEB DESK Prime Minister of Singapore Lee Hsien Loong has urged married Singaporean ...

Himachal Pradesh receives large number of tourists for Christmas and New Year celebrations

AMN / SHIMLA All the tourist places of Himachal Pradesh are witnessing large number of tourists for the Ch ...

Indonesia offers free entry visa to Indian travelers

AMN / WEB DESK In a bid to give further boost to its tourism industry and bring a multiplier effect on the ...

MEDIA

Provisions for Media Coverage, Media Facilities and Health Preparedness for Pran Pratishtha

WEB DESK Elaborate Arrangements are being made for the smooth and successful conduct of the consecratio ...

Former Principal Information Officer in PIB, N J Krishna passes away

AMN Former senior Indian Information Service officer N J Krishna passes away in Noida. She was 81. She ...

GOVERNMENT AWAAZ

Governments ‘s aim is to provide jobs to 10 Lakhs Youth in Government and PSU, says Prahlad Joshi

@JoshiPralhad Union Minister of Parliamentary Affairs Prahlad Joshi said governments 's aim is to prov ...

Prices of essential commodities are under control: Govt

AMN / WEB DESK The Government has said that prices of essential commodities like Sugar, Wheat, Rice and Edi ...

@Powered By: Logicsart