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इंडियन आवाज़     23 Oct 2018 09:30:49      انڈین آواز
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सैन्य बलों को भी धार्मिक अपीलों से खुद को अछूता रखने की जरूरत है: मनमोहन सिंह

manmohan singh

AMN / NEW DELHI

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने सैन्य बलों को भी धार्मिक अपीलों से खुद को अछूता रखने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल देश के शानदार धर्मनिरपेक्ष स्वरूप का अभिन्न हिस्सा हैं. इसलिए यह बेहद जरूरी है कि सशस्त्र बल स्वयं को सांप्रदायिक अपीलों से अछूता रखें.

मनमोहन ने एक बार फिर धर्मनिरपेक्षता को संविधान का मौलिक स्वरूप बताते हुए कहा, ‘‘सबसे पहले एक संस्था के रूप में न्यायपालिका के लिए यह बेहद जरूरी है कि वह संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के स्वरूप का संरक्षण करने की अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी को नजरअंदाज न करे.’’

मनमोहन सिंह मंगलवार को कॉमरेड एबी वर्धन स्मृति व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा ‘‘संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप का संरक्षण करने के मकसद को पूरा करने की मांग पहले के मुकाबले मौजूदा दौर में और भी अधिक जरूरी हो गई है. राजनीतिक विरोध और चुनावी मुकाबलों में धर्मिक तत्वों, प्रतीकों, मिथकों और पूर्वाग्रहों की मौजूदगी भी काफी अधिक बढ़ गई है.’’

मनमोहन ने भाकपा द्वारा ‘‘धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र की रक्षा’’ विषय पर आयोजित दूसरे एबी बर्धन व्याख्यान को संबोधित करते हुए कहा ‘‘हमें निसंदेह यह समझना चाहिए कि अपने गणतंत्र के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को कमजोर करने कोई भी कोशिश व्यापक रूप से समान अधिकारवादी सोच को बहाल करने के प्रयासों को नष्ट करेगी.’’ उन्होंने कहा कि इन प्रयासों की कामयाबी सभी संवैधानिक संस्थाओं में निहित है.

पूर्व प्रधानमंत्री ने बाबरी मस्जिद मामले का जिक्र करते हुये कहा कि 1990 के दशक के शुरुआती दौर में राजनीतिक दलों और राजनेताओं के बीच बहुसंख्यक और अल्पसंख्यकों के सह अस्तित्व को लेकर शुरू हुआ झगड़ा असंयत स्तर पर पहुंच गया. उन्होंने कहा ‘‘बाबरी मस्जिद पर राजनेताओं के झगड़े का अंत उच्चतम न्यायालय में हुआ और न्यायाधीशों को संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को पुन: परिभाषित कर बहाल करना पड़ा.’’

डा. सिंह ने बाबरी मस्जिद ध्वंस को दर्दनाक घटना बताते हुए कहा ‘‘छह दिसंबर 1992 का दिन हमारे धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र के लिए दुखदायी दिन था और इससे हमारी धर्मनिरपेक्ष प्रतिबद्धताओं को आघात पहुंचा.’’ उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने एस आर बोम्मई मामले में धर्मनिरपेक्षता को संविधान के मौलिक स्वरूप का हिस्सा बताया.

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