इंडियन आवाज़     20 Apr 2018 04:42:48      انڈین آواز

सरकार बनाने का मौका गंवाने से दिग्विजय पर भड़के, गोवा कांग्रेसी विधायक

प्रदीप शर्मा

गोवा में कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायकों और वरिष्‍ठ नेता दिग्विजय सिंह के बीच बैठक के दौरान तल्‍खी भरी बहस हुई। कांग्रेस विधायक इस बात से नाराज थे कि दिग्विजय सिंह जो कि गोवा कांग्रेस के इंचार्ज हैं उन्‍होंने छोटे दलों को साथ लेने में तेजी नहीं दिखाई। इसके चलते सरकार बनाने का मौका उनके हाथ से निकल गया। कांग्रेस को गोवा विधानसभा चुनावों में 17 सीटें मिली थी। 40 सदस्‍यों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 21 विधायक चाहिए होते हैं। इस तरह से कांग्रेस को केवल चार अन्‍य विधायकों के समर्थन की जरुरत थी लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाई।

सरकार बनाने के दावे को लेकर कांग्रेस की सुस्‍ती का फायदा बीजेपी ने उठाया। उसने 13 सीटें होने के बावजूद महाराष्‍ट्रवादी गोमांतक पार्टी, गोवा फॉरवर्ड पार्टी को साथ लेकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। साथ ही मनोहर पर्रीकर को मुख्‍यमंत्री पद का उम्‍मीदवार भी बना दिया। पर्रीकर के नाम पर निर्दलीय विधायक भी भाजपा के साथ आ गए। इस तरह से भाजपा के पास 22 विधायकों का समर्थन हो गया। इस पर राज्‍यपाल मृदुला सिन्‍हा ने मनेाहर पर्रिकर को मुख्‍यमंत्री नियुक्‍त कर उन्‍हें 15 दिन के अंदर बहुमत साबित करने को कहा।

इससे गुस्‍साए कांग्रेस विधायक विश्‍वजीत पी राणे ने कहा कि नेतृत्‍व की ओर से पूरी तरह से मामला बिगाड़ दिया गया। उन्‍होंने कहा, ”कभी कभी लगता है कि मैं गलत पार्टी में हूं। मेरे ऊपर सभी विधायकों का दबाव था कि मैं कुछ करूं लेकिन मैं सोनिया गांधी के चलते पीछे रहा।” राणे गोवा के पांच बार के मुख्‍यमंत्री प्रताप सिंह राणे के बेटे हैं। वे इस बार मुख्‍यमंत्री पद के दावेदार थे। एक अन्‍य विधायक जेनिफर मोनसराटे ने कहा कि जनता ने कांग्रेस पर भरोसा जताया और वोट दिया। 17 सीटें लाने के बावजूद सरकार नहीं बना पाए। इससे लोग हंसी उड़ा रहे हैं। कई विधायक तो यह आरोप भी लगाते दिखे कि दिग्विजय सिंह ने जानबूझकर नितिन गडकरी को मदद की।

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