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इंडियन आवाज़     14 Nov 2018 07:40:00      انڈین آواز
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संसद के सेंट्रल हॉल में जेटली और माल्या के बीच 15-20 मिनट की मुलाकात, दोनों में हुई डील, वित्त मंत्री स्तीफा दें- राहुल गांधी

Rahul_Gandhi

प्रदीप शर्मा

विजय माल्या और वित्त मंत्री अरुण जेटली की मुलाकात को लेकर शुरू हुआ हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस मुद्दे पर आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विजय माल्या की भागने में मदद की. राहुल गांधी ने वित्त मंत्री का इस्तीफा मांगते हुए कहा कि वो बताएं कि उन्होंने ये खुद से किया या फिर उन्हें ऊपर से ऐसा करने का ऑर्डर मिला था. प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने पीएल पुनिया के हवाले से आरोप लगाया कि वित्त मंत्री गलत जानकारी दे रहे हैं. संसद के सेंट्रल हॉल में एक मार्च को वित्त मंत्री जेटली और विजय माल्या की बाकायदा 15-20 मिनट तक बैठकर बातचीत हुई थी.

इसके बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस नेता पीएल पुनिया को माल्या-जेटली मुलाकात के गवाह के तौर पर पेश किया. राहुल गांधी ने कहा, ”कल अरुण जेटली ने कहा कि विजय माल्या ने ससंद में अनौपतारिक रूप से मिलने की कोशिश की थी. लंबे ब्लॉग लिखते हैं लेकिन पता नहीं क्या कारण था कि उन्होंने अपने किसी बयान में, किसी ब्लॉग में इस मीटिंग के बारे में कुछ नहीं कहा. जो अरुण जेटली ने कहा कि माल्या उनके पीछे आकर दो-तीन शब्द कहकर चले गए. तो इसके लिए हम आपके सामने सबूत लगाए हैं. पुनिया जी ने अपनी आंखों से अरुण जेटली और विजय माल्या की मीटिंग अपनी आंखों से देखी है.”

पीएल पुनिया ने कहा, ”यह 2016 बजट सत्र की बात है, 29 तारीख को बजट पेश हुआ. एक मार्च को मैं सेंट्रल हॉल में बैठा था. तभी मैंने देखा अरुण जेटली और विजय माल्या कोने में खड़े होकर बात कर रहे हैं. दोनों ऐसे बात कर रहे थे जैसे अंतरंग बातें होती हैं. पांच-सात मिनट के बाद उन्होंने सेंट्रल हॉल में बेंच पर बैठकर भी बात करना शुरू किया. विजय माल्या उस सत्र में सिर्फ पहली मार्च को ही आए थे, वे अरुण जेटली से मिलने ही आए थे. जब तीन तारीख को मीडिया में ये छपा कि दो मार्च को वे लंदन चले गए तो यह खबर देखते ही मेरी प्रतिक्रिया थी कि दो पहले ही तो अरुण जेटली से मिले थे.”

पुनिया ने आगे कहा, ”इसके बाद मैंने जिनती भी बार मीडिया से बात, बहस में हिस्सा लिया हर जगह मैंने यह बात कही. इसके सबूत पूरी तरह से मौजूद है. यह ढाई साल तक इसे रहस्य बनाए रहे. इस बीच संसद में बहस में हुई, उन्होंने जवाब भी दिया. लेकिन कहीं भी उन्होंने जिक्र नहीं किया कि मेरी विजय माल्या से मुलाकात हुई. मेरी चुनौती है कि सेंट्रल हॉल में सीसीटीवी कैमरा लगे हैं, वो सीसीटीवी फुटेज निकाल लें. इससे सच पता चल जाएगा. अगर मैं गलत हुआ तो राजनीति छोड़ दूंगा नहीं तो वो राजनीति छोड़ दें.”

इसके बाद एक बार फिर राहुल गांधी ने कमान संभाली और सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाए. राहुल गांधी ने कहा, ”इस पर दो सवाल उठते हैं, पहला सवाल ये की वित्त मंत्री भघोड़े से बात करते हैं. भगोड़ा वित्त मंत्री को कहता है कि मैं लंदन जाने वाला हूं. वित्त मंत्री ने ना सीबीआई को बताया, ना ईडी को बताया और ना पुलिस को बताया. आखिर उन्होंने क्यों नहीं बताया. दूसरा सवाल है कि विजय माल्या के खिलाफ जो अरेस्ट नोटिस ता उसे इनफॉर्म नोटिस में किसने बदला. यह काम वही कर सकता है जिसके अंडर सीबी आई काम करती हो. अरुण जेटली ने अगर ये अपने काम किया है तो बताएं कि हां मैंने खुद से किया. अगर उन्हें ऊपर से ऑर्डर मिला था तो यह बता दें. लेकिन पूरी तरह कुला हुआ केस है.” राहुल गांधी ने कहा, ”यह पूरी तरह क्लीयर कट मामला है. वित्त मंत्री को बता देना चाहिए क्या डील थी. उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए.”

भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि मैं भारत छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिला था. बुधवार को लंदन के वेस्टमिन्स्टर मजिस्ट्रेट की अदालत के बाहर उन्होंने कहा, ”मैंने पूरे मामले को सुलझाने के लिए भारत छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की थी. मैं बैंकों का बकाया कर्ज चुकाने के लिए तैयार था, लेकिन बैंकों ने मेरे सेटलमेंट को लेकर सवाल खड़े किए.”

माल्या के आरापों को सफाई देते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने आरापों को निराधार बताया. उन्होंने कहा, “माल्या का बयान गलत है. साल 2014 के बाद से मैंने उन्हें मिलने का वक्त ही नहीं दिया. ऐसे उनसे मेरे मिलने का सवाल ही पैदा नहीं होता है.”

जेटली के मुताबिक राज्यसभा के सदस्य होने के नाते माल्या ने कभी कभी संसद की कार्यवाही में भी हिस्सा लिया. वित्त मंत्री ने लिखा है, “उसने एक बार इस विशेषाधिकार का गलत फायदा उठाया और जब मैं सदन से निकल कर अपने कमरे की तरफ बढ़ रहा था तो वह तेजी से पीछा कर मेरे पास आ गया. चलते-चलते उसने कहा कि उसके पास कर्ज के समाधान की एक योजना है.”

जेटली ने कहा, “उसकी पहले की ऐसी ‘झूठी पेशकश’ के बारे में पहले से पूरी तरह अवगत होने के कारण उसे बातचीत आगे बढ़ाने का मौका नहीं देते हुए मैंने कहा कि ‘मुझसे बात करने का कोई फायदा नहीं है और उसे अपनी बात बैंकों के सामने रखनी चाहिए.”

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