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इंडियन आवाज़     11 Dec 2017 03:09:03      انڈین آواز
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UN में सुषमा बोलीं, दहशतगर्द निर्यात करने वाला मुल्क हमें इंसानियत का पाठ न पढ़ाए

UN पाकिस्तान को सुषमा स्‍वराज का करारा जवाब

sushma at UN 2017

AMN / संयुक्‍त राष्‍ट्र

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए आज कहा कि हैवानियत की हदें पार करने वाला देश भारत को इंसानियत और मानवाधिकार का पाठ पढ़ा रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें अधिवेशन को संबोधित करते हुए स्वराज ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने अपने संबोधन में भारत पर तरह-तरह के निराधार आरोप लगाए हैं जबकि असलियत यह है कि भारत गरीबी से लड़ रहा है और पाकिस्तान भारत से लड़ रहा।

सुषमा ने पाकिस्तानी नेताओं से कहा कि वे इस पर आत्ममंथन करें कि भारत क्यों वैश्विक आईटी महाशक्ति के तौर पर जाना जाता है और पाकिस्तान की पहचान ‘आतंकवाद के निर्यात के कारखाने’ की है. स्वराज ने कहा कि भारत ने आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे संस्थान बनाए जबकि पाकिस्तान ने एलईटी, जेईएम, हिज्बुल मुजाहिद्दीन और हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकी गुट तैयार किए. उन्‍होंने कहा कि आतंकवाद मानव जाति के अस्तित्व पर खतरे जैसा है.

सुषमा स्वराज ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जिन समस्याओं का समाधान तलाश रहा है उनमें आतंकवाद सबसे ऊपर है. उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम अपने शत्रु को परिभाषित नहीं कर सकते तो फिर मिलकर कैसे लड़ सकते हैं? अगर हम अच्छे आतंकवादियों और बुरे आतंकवादियों में फर्क करना जारी रखते हैं तो साथ मिलकर कैसे लड़ेंगे? अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आतंकवादियों को सूचीबद्ध करने पर सहमति नहीं बना पाती है तो फिर हम मिलकर कैसे लड़ सकते हैं?’’

सुषमा सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य चीन का परोक्ष रूप से हवाला दे रही थीं जिसने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को प्रतिबंधित करने के भारत के प्रयास को बार-बार अवरुद्ध करने का काम किया है. उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस सभा से आग्रह करना चाहूंगी कि इस बुराई को आत्म-पराजय और निरर्थक अंतर के साथ देखना बंद किया जाए. बुराई तो बुराई होती है. आइए स्वीकार करें कि आतंकवाद मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा है. इस निर्मम हिंसा को कोई किसी तरह से उचित नहीं ठहरा सकता.’’

सुषमा ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से इसी साल अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि को लेकर समझौते पर पहुंचने के लिये नयी प्रतिबद्धता दिखाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि यद्यपि भारत ने 1996 में भी अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि (सीसीआईटी) का प्रस्ताव दिया था लेकिन दो दशक बाद भी संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद की परिभाषा पर सहमत नहीं हो सका है. उन्होंने कहा, ‘‘हम भयानक और यहां तक कि दर्दनाक आतंकवाद के सबसे पुराने पीड़ित हैं. जब हमने इस समस्या के बारे में बोलना शुरू किया तो दुनिया की कई बड़ी शक्तियों ने इसे कानून व्यवस्था का मुद्दा बताकर खारिज कर दिया. अब वे इसे बेहतर तरीके से जानते हैं. सवाल है कि हम इस बारे में क्या करें.’’ सुषमा ने कहा, ‘‘हम सबको आत्ममंथन करना चाहिये और खुद से पूछना चाहिये कि क्या हमारी चर्चा, जो कार्रवाई हम करते हैं कहीं से भी उसके करीब है. हम इस बुराई की निंदा करते हैं और अपने सभी बयानों में इससे लड़ने का संकल्प जताते हैं. सच्चाई यह है कि ये सिर्फ दस्तूर बन गए हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘तथ्य यह है कि जब हमें इस शत्रु से लड़ने और उसका नाश करने की जरूरत है तो कुछ का स्वहित उन्हें दोहरेपन की ओर ले जाता है.’’

सुषमा स्वराज के भाषण की खास बातें

– पाकिस्तान के सियासतदानों को इस बात पर विचार करना चाहिए कि दोनों देशों ने साथ-साथ आजादी हासिल की लेकिन भारत ने पूरे विश्व में सूचना -प्रौद्योगिकी हब के रूप मे अपनी पहचान बनाई जबकि पाकिस्तान की पहचान एक दहशतगर्द मुल्क के रूप में है।

– पाकिस्तान ने आतंकवादी संगठन और उनके ठिकाने बनाए जबकि भारत ने विशिष्ट शैक्षणिक संस्थाएं बनायीं।

– हमने आईआईटी, आईआईएम, एम्स जैसे संस्थान बनाए जबकि पाकिस्तान ने लश्करे-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन और हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकवादी संगठन बनाए।

– हमने स्कॉलर, डॉक्टर, वैज्ञानिक और इंजीनियर बनाए जबकि पाकिस्तान ने दहशतगर्द और जेहादी पैदा किए।

-भारत ने पाकिस्तान की आतंकवाद की चुनौतियों को घरेलू विकास के रास्ते बाधक नहीं बनने दिया।

– हैवानियत की हदें पार करने वाला पाकिस्तान हमें इंसानियत सिखा रहा है

– सभी देश आतंकवाद की निंदा तो करते हैं लेकिन कार्रवाई के लिए एकजुट नहीं होते

-पाकिस्तान को नसीहत-जो पैसा आतंकवाद पर खर्च कर रहे हो उसे मुल्क के आवाम के लिए खर्च करो

-. हम गरीबी से लड़ रहे हैं, पाक हमसे लड़ रहा है

– पाकिस्तान ने इंसानियत का मुद्दा उठाने का नाटक किया, जबकि यही वह देश है जो इंसानियत का खून बहा रहा है।

– भारत आंतकवाद का सबसे पुराना शिकार रहा है. आतंकवाद चारों ओर पैर पसार रहा है, हमें मिलकर इसके खात्मे के बारे में सोचना होगा।

-पाकिस्तान पर हमला बोलते हुए कहा- भारत ने आईटी, आईआईएम, इसरो, एम्स जैसे विश्व प्रसिद्ध संस्थान बनाए, जबकि पाकिस्तान ने जैश, हक्कानी जैसे आतंकवादी संगठन बनाए

– पाकिस्तान ने कभी सोचा है कि भारत-पाकिस्तान साथ-साथ आजाद हुए थे, लेकिन आज भारत की पहचान आईटी सुपर हब के तौर पर है, जबकि पाक की पहचान आतंकवाद के सरगना के रूप में होती है।

– चीन पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ देश अपने हितों के लिए आतंकवाद को पाल रहे हैं। यूएन जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद की निंदा करना रस्म सा बन गया है पर कितने देश इसे गंभीरता से ले रहे हैं। आतंकवाद की एक ही परिभाषा होनी चाहिए। मेरे-तेरे आतंकवाद की दृष्टि अलग न हो।

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