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इंडियन आवाज़     17 Feb 2019 11:15:09      انڈین آواز
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वॉल्मार्ट डील के ख़िलाफ़ कैट 2 जुलाई को करेगा देशव्यापी विरोध

वालमार्ट फ्लिपकार्ट के बीच हुए हाल ही के समझौते पर अब एक और मुसीबत

 

walmart-flipkart
AMN / AHEMDABAD

कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज अहमदाबाद में हुई देश भर के व्यापारी नेताओं की एक दो दिवसीय सम्मलेन में निर्णय लिया गया कीं आगामी 2 जुलाई को देश भर के विभिन्न राज्यों के विभिन्न शहरों में 1000 से विरोध धरने आयोजित किए जाएँगे । कैट की माँग है की सरकार वॉल्मार्ट डील को रद्द करे aur ई कामर्स के लिए नीति बनाए और एक रेग्युलटॉरी अथॉरिटी का गठन करे ।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.सी.भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा की इस बार हम ईडी और आरबीआई के साथ इस मुद्दे को आखिर तक लेकर जायेंगे जिसमें फ्लिपकार्ट और उसका नया मालिक वालमार्ट भी शामिल है सहित ई कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ जब तक कार्रवाई नहीं हो जाती हम चैन से नहीं बैठेंगे !

कैट ने कहा की जब तक ई कॉमर्स पालिसी न बन जाए तब तक एफडीआई पालिसी का प्रेस नोट न. 3 का कड़ाई से पालन करने के आदेश दिए जाएँ और उसको देखने के लिए अधिकारीयों सहित व्यापारियों एवं ई कॉमर्स कंपनियों की एक विशेष टास्क फाॅर्स बनाई जाए ! कैट ने यह भी मांग की है की ई कॉमर्स पालिसी बनाने में व्यापारियों को भी विश्वास में लिया जाए !

कैट ने कहा है की ई कॉमर्स कंपनियां खुले रूप से और धड्ड्ले से 29 मार्च 2016 को जारी सरकार के प्रेस नोट न 3 का उल्लंघन कर रही है ! उक्त प्रेस नोट में ई कॉमर्स कंपनियों पर यह स्पष्ट पाबंदी है की वो किसी भी प्रकार से कीमतों को प्रभावित नहीं करेंगी एवं बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बनाये रखेंगी !अनेक शिकायतें करने के बावजूद भी ये कंपनियां भारत को खुला मैदान मानते हुए अपने बनाये हुए नियम एवं कायदों से व्यापार कर रही हैं और सरकार एक मूक दर्शक बनी हुई है ! आज तक किसी कम्पनी के खिलाफ कोई कार्रवाई ही नहीं हुई !

कैट ने शिकायत करते हुए कहा की गत चार वर्षों में वाणिज्य मंत्रालय ने एक बार भी घरेलू व्यापार को मजबूत करने हेतु एक भी मीटिंग नहीं बुलाई जबकि बेहद तत्परता दिखाते हुए ई कॉमर्स एवं रिटेल में एफडीआई पर कदम उठाने में कोई कोताही नहीं बरती है ! इससे जाहिर होता है की रिटेल ट्रेड एक अनाथ बच्चे की तरह है जिसका कोई वली वारिस नहीं है ! वाणिज्य मंत्रालय को इसको देखना चाहिए था किन्तु इस दिशा में मंत्रालय ने आज तक एक भी कदम नहीं उठाया !

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कैट ने कहा की सरकार के इस रवैय्ये से देश भर के व्यापारी बेहद आक्रोश में है ! वाणिज्य मंत्रालय का रिटेल व्यापार के प्रति रूखापन उसकी विदेशी कंपनियों के प्रति आस्तिकता की मानसिकता को दर्शाता है जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है ! देश में कृषि के बाद रिटेल व्यापार सबसे ज्यादा रोजगार देता है और सरकारी खजाने में भी इसका योगदान बेहद महत्वपूर्ण है फिर भी इसको सदा उपेक्षित रखा जाता है ! सरकार को तुरंत ई कॉमर्स और रिटेल ट्रेड को अपनी प्राथमिकता पर लेकर उसकी समुचित वृद्धि हेतु

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