FreeCurrencyRates.com

इंडियन आवाज़     16 Jan 2019 05:40:24      انڈین آواز
Ad

विश्व उर्दू सम्मेलन में होगा विश्व शांति पर ज़ोर

शहज़ाद अख्तर / नई दिल्ली

Director NCPULभूमंडलीकरण के दौर में उर्दू को बढ़ावा देने के लिए पांचवां विश्व उर्दू सम्मेलन कल से यहां शुरू होने जा रहा है जिसमें 18 देशों के उर्दू अदीब ,शायर ,अखबार नवीस और विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की स्वायत्त संस्था राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के निदेशक इरतिजा करीम ने आज यहां एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि तीन दिवसीय इस सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह करेंगे और अध्यक्षता केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी करेंगे।

प्रोफेसर करीम ने कहा कि उर्दू भी एक ऐसी भाषा है जिसने अपना रिश्ता न केवल क्षेत्रीय या राष्ट्रीय समस्याओं तक ही सीमित रखा है बल्कि वैश्विक समस्याओं को भी केंद्र में रखा है। ग्लोबलाइजेशन ने संसार में जिन नई समस्याओं को जन्म दिया है उनपर भी उर्दू भाषा और साहित्य के फनकार चिंतन करते रहे हैं।

उर्दू शायरी हो या कथा साहित्य ,पत्रकारिता हो या नाटक सभी विधाओं में वैश्विक समस्याओं पर न केवल रचनाएं मौजूद हैं बल्कि उर्दू भाषा और साहित्य में इन समस्याओं पर बहुत ही गंभीरता से चर्चा की गई है। उर्दू में आतंकवाद के खिलाफ उपन्यास, कहानी और पत्रकारिता में प्रभावी लेखन मौजूद हैं। विश्व शांति भी उर्दू भाषा और साहित्य का एक केंद्रीय विषय रहा है जिसपर अधिकांश उर्दू साहित्यकारों ने अपने लेखन में बल दिया है। इस तरह देखा जाए तो उर्दू भाषा ने सभी वैश्विक समस्याओं को अपने अभिव्यक्ति क्षेत्र में स्थान दिया है। उर्दू की यही वैश्विक व सार्वभौमिक समझ है जिसने उर्दू को एक विशेष स्थान प्रदान किया है। कोई ऐसी वैश्विक समस्या नहीं है जिस पर उर्दू के विद्वानों और साहित्यकारों ने अपने विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त न किया हो। विशेष तौर पर लिंगभेद के खिलाफ महिला अधिकारों के समर्थन में उर्दू में बहुमूल्य लेखन अस्तित्व में आया है।

उन्होने कहा कि वर्तमान वैश्विक समस्याओं के संबंध में उर्दू भाषा का रोल बहुत ही सक्रिय और सकारात्मक रहा है और उर्दू भाषा ने वैश्विक समस्याओं की समझ के लिए एक नया दृष्टिकोण भी अपनाया है जो मानवीय मूल्यों पर आधारित है। मगर एक बड़ा वर्ग उर्दू के इस व्यापक रोल से परिचित नहीं है और उर्दू जबान को सिर्फ हुस्न और इश्क के मामलों तक सीमित समझता है जबकि वास्तविकता यह है कि उर्दू भाषा ने आज के दौर की अधिकतर वैश्विक समस्याओं को अपना विषय बनाया है।

इस सम्मेलन में सूफियाना कलाम मशहूर सूफी गायिका इंद्रा नाईक, मुंबई पेश करेंगी। 25 मार्च की शाम आलमी मुशायरा होगा जबकि 26 मार्च की शाम ड्रामा ‘मैं उर्दू हूं’ अतहर नबी,लखनऊ के निर्देशन में प्रस्तुत किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ad
Ad

SPORTS

Punjab, Goa in the Semi finals of Boys U-21 Football at KIYG

HSB / Pune Trailing 0-1 till the 56th Minute Punjab staged a fine recovery to down Goa 2-1 but both the teams ...

Odisha bag KIYG Under-21 men’s hockey gold

HSB / Mumbai Odisha thwarted Haryana from completing a hockey double as they beat them 4-2 in the Boys Under- ...

India wins 2nd ODI against Australia by 6 wickets

Virat Kohli made a sublime 104-run knock as India defeated Australia by six wickets in the second One-day Inte ...

Ad

MARQUEE

Major buildings in India go blue as part of UNICEF’s campaign on World Children’s Day

Our Correspondent / New Delhi Several monuments across India turned blue today Nov 20 – the World Children ...

US school students discuss ways to gun control

             Students  discuss strategies on legislation, communities, schools, and mental health and ...

CINEMA /TV/ ART

Noted Film actor Kader Khan passes away in Canada

Born in Kabul, Khan made his acting debut in 1973 with Rajesh Khanna's "Daag" and has featured in over 300 fil ...

Mortal remains of Mrinal Sen cremated in Kolkata

    Mortal remains of Legendary filmmaker Mrinal Sen, the last of the triumvirate of directi ...

Ad

@Powered By: Logicsart