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इंडियन आवाज़     13 Nov 2018 11:24:05      انڈین آواز
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वाजपेयी की छवि और उसके के सियासी मायने

VAJPAYEE

संदीप ठाकुर / नई दिल्ली

काेई नेता कितना बड़ा युगपुरुष या महापुरुष था यह इस बात पर निर्भर करता है कि उस नेता का नाम इतिहास में कैसे दर्ज हाेता या कराया जाता है। दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की माैत के बाद उनके नाम काे जिस तरह से भुनाने के प्रयास शुरु हाे गए हैं उससे साफ पता चलता है कि उनकी छवि काे “लारजर देन लाइफ” बनाने की दिशा में पार्टी याेजनावद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है। दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियों के विसर्जन के साथ ही उनके निधन का राजनीतिक लाभ लेने का अभियान शुरू हो गया है ताकि आगामी चुनाव में इसका फायदा पार्टी काे मिल सके।

भाजपा ने अगले 15 दिन में सभी राज्यों की राजधानी में श्रद्धांजलि सभा का ऐलान किया है। उसके बाद प्रखंड और जिला स्तर पर भी श्रद्धांजलि सभाएं होंगी। उससे पहले देश की एक सौ नदियों को चुना गया है, जिनमें उनकी अस्थियां विसर्जित की जाएंगी। छवि काे भुनाने की शुरुआत उनकी शव यात्रा के साथ ही हाे गई थी जब उमस भरी गर्मी में प्रधानमंत्री सहित कई अन्य मंत्री कई किलाेमीटर पैदल चल स्मृति स्थल पहुंचे थे। उसके बाद अटलजी की अस्थियां गंगा में प्रवाहित करने के लिए हरिद्वार ले जाई गई। वहां भी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, राजनाथ सिंह, याेगी आदित्य नाथ, राज्य में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सहित कई नेता माैजूद थे। अस्थि कलश का जुलूस निकाला गया। जुलूस का रास्ता करीब 4 किलाेमीटर लंबा था जिसके दाेनाें आेर लाेगाें का हुजूम माैजूद था। दाेपहर तक हर की पाैड़ी काे जीराे जाेन घाेषित कर दिया गया था। यानी हर की पाैड़ी आम लाेगाें के लिए बंद कर दिया गया था। सुरक्षा के लिहाज से वहां एक हजार से अधिक पुलिस के जवान तैनात किए गए थे।

अस्थि विसर्जन के बाद अस्थिकलश दर्शन व श्रद्धांजलि सभा के आयाेजन का सिलसिला लंबा चलेगा। शुरुआत साेमवार काे दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित प्रार्थना सभा से हुई,जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी सहित कई केंद्रीय मंत्री,भाजपा व आरएसएस के नेताआें ने अटलजी काे लेकर अपने संस्मरण सुनाए आैर जिसका लाइव टेलीकास्ट देश विदेश के लाेगाें ने देखा। पीएम ने अटल बिहारी के योगदान को याद करते हुए कहा कि अटल ने अपने काम से देश को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाया। विदेश नीति से लेकर देश को मजबूत बनाने के लिए अटल ने वह सबकुछ किया जो जरूरी था।

भाजपा के लिए जीवन मरण के महत्व वाले राज्य उत्तर प्रदेश से लेकर इस साल के चुनाव वाले राज्यों मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ने वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने के बहाने अपनी अपनी योजनाएं घोषित कर दी हैं। वाजपेयी की अस्थियां अब मंगलवार को उत्तर प्रदेश लाई जाएंगी। इससे पहले दिवगंत नेता के 18 अस्थि कलशों को नई दिल्ली से हवाई जहाज से रविवार को तीन बजे लखनऊ लाने का कार्यक्रम था। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हवाईअड्डे पर मौजूद रहने वाले थे। पार्टी के जानकार सूत्रों ने बताया कि अब अस्थि कलशों को सड़क के रास्ते यहां ले जाया जा रहा है। रास्ते में जगह जगह पर लोग पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

भाजपा की योजना अस्थि कलशों को प्रदेश के विभिन्न जिलों में भेजने की है। हर कलश के साथ सरकार के एक मंत्री और पार्टी के पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। जिलों में लोग वाजपेयी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार ने दिवंगत वाजपेयी की अस्थियों को राज्य की 40 नदियों में भी प्रवाहित करने की योजना बनाई है। इसके अलावा लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेयी की याद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन भी होना है। यही नहीं उत्तरप्रदेश में वाजपेयी की कर्मभूमि के नाते चार शहरों में स्मारक का ऐलान भी हुआ है। यूपी सरकार ने तय किया है कि राज्य में चार शहरों में उनकी याद में स्मारक बनाया जाएगा। वाजपेयी पहली बार बलरामपुर से 1957 में सांसद बने थे। सो, वहां एक स्मारक बनेगा। इस तरह कानपुर में जहां उन्होंने पढ़ाई, लखनऊ में जहां से वे पांच बार सांसद बने और आगरा में जहां उनका परिवार रहता था, वहां सरकार स्मारक बनवाएगी।

मध्य प्रदेश सरकार ने उनकी याद में स्मारक बनाने का ऐलान किया है तो साथ ही स्कूल की किताबों में अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी शामिल कराने का फैसला किया है। उऩके नाम पर प्रदेश सरकार की आेर से तीन पुरस्काराें की भी घाेषणा की गई है। इनमें से एक पुरस्कार उदीयमान कवि,दूसरा पुरस्कार पत्रकारिता के लिए आैर तीसरा पुरस्कार सुशासन के लिए किसी अधिकारी काे दिया जाएगा। इनमें 5-5 लाख की राशि पुरस्कार में दी जाएगी। स्मार्ट सिटी के रुप में विकसित हाे रहे भाेपाल,इंदाैर,जबलपुर,ग्वालियर,उज्जैन,सागर व सतना में अटलजी के नाम पर विश्वस्तरीय पुस्तकालय की स्थापना की जाएगी। 21 अगस्त काे उनकी अस्थियां नर्मदा में विसर्जित करने के साथ साख भाेपाल के रविंद्र भवन में श्रद्धांजलि सभा भी हाेगी। 22 से 25 अगस्त के बीच जिला मुख्यालय व 25 से 30 इगस्त के बीच विकासखंड व ग्रामपंचायताें में भी श्रद्धांजलि सभा हाेगी।

मध्य प्रदेश से अलग छत्तीसगढ़ का निर्माण वाजपेयी ने कराया था, इस नाम पर राज्य सरकार ने उनका स्मारक बनाने का ऐलान किया है। ध्यान रहे इन दोनों राज्यों में इस साल के अंत में चुनाव होने वाले हैं। वाजपेयी का वैसे पश्चिम बंगाल से कोई खास जुड़ाव नहीं था, फिर भी बंगाल भाजपा ईकाई उनकी अस्थियां अपने यहां भी ले गई है और वहां भी कई जगहों पर इसका विसर्जन होगा। गौरतलब है कि वाजपेयी के दत्तक दामाद रंजन भट्टाचार्य बंगाली जरूर हैं पर वे बिहार के रहने वाले हैं लेकिन शायद पार्टी यह माैका भी खाेना नहीं चाहती है।

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