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इंडियन आवाज़     25 May 2017 06:52:34      انڈین آواز

“लिबरल हिन्दू की ख़ामोशी से हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं”

मुसलमानों के सभी वर्गों को एक साथ चलने की ज़रूरत : फराह नकवी

AMN

पटना: मुसलमान जब तक इस देश में अपना राजनीतिक और शैक्षिक कार्यसूची तय नहीं करेंगे तब तक उनके हालात में कोई बदलाव नहीं होने वाला है। स्वतंत्रता मिलने के बाद जब संविधान निर्माण का काम हो रहा था तो उस समय हमारे नेतृत्व ने केवल विश्वास की रक्षा की बात और लेबरल हिन्दू का साथ दिया उसके विपरीत उन्होंने न किसी राजनीतिक अधिकारों पर बात की और न किसी और विकास पर ही उनकी नज़र थी परिणाम यह हुआ है स्वतंत्रता के 70 वर्षों के बाद लेबरल डेमोक्रेसी ने मेजोटरीन डेमोक्रेसी की शक्ल अख्तियार कर ली जो न केवल मुसलमान बल्कि इस पूरे भारत के लिए खतरा है। इन ख़्यालात का इज़हार बिहार कलक्टिव के बैनर तले वार्तालाप “भारतीय मुसलमान: नई परिस्थितियों, नई मंज़िलें” विषय पर प्रसिद्ध पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता फराह नकवी ने किया।

FARAH NAQVIउन्होंने बातचीत शुरू इस तरीके से किया कि नार्थ इंडिया में बिहार एक ऐसी जगह है जहां लोकतंत्र और राय व्यक्त की स्वतंत्रता प्राप्त है। जबकि नार्थ इंडिया की दूसरी राज्यों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध है हद तो यह हमारे विश्वविद्यालयों में प्रतिरोध आवाज को रोकने के लिए सरकार सर्वोपरि होती जा रही है। ठीक इसी तरह से इस देश में मुसलमानों के लिए मार्ग तंग करती है। जिस देश में गाय बदले इंसान की जान को कुछ न समझा जाए वैसे देश का कुछ भी नहीं किया जा सकता। जबकि इस देश की स्वतंत्रता में मुसलमानों ने भी अपने खून बहाए हैं अपने लोगोन ए.आर. बलिदान हैं। अब मुसलमानों पर सीधे हमले किए जा रहे हैं।

नक़वी मुसलमानों के हालात ज़ार पर उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने अब तक कोई एजेंडा तय नहीं किया। सरकार के सामने तलाक, समान नागरिक संहिता, धार्मिक अधिकारों पर बातें होती हैं उसकी जगह शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य एजेंडे भी तय किए जाने चाहिए।

उन्होंने यहूदी राष्ट्र का हवाला देते हुए कहा कि किस तरह से उन्होंने बुरी परिस्थितियों में भी अपने लोगों को धर्म के साथ शिक्षा और विज्ञान जोड़ी आज उसकी वजह यह है कि वह राष्ट्र दुनिया के सबसे सफल लोगों में शुमार की जाती है हम अपने धर्म को ही सब कुछ समझ लिया है, जबकि इसके अलावा भी हमारे कोशिशें होनी चाहिए। आज देश में जिस तरह से लेबरल डेमोक्रेसी का तानाबाना टूट रहा और उसके प्रभाव यह रहे हैं एक खास वर्ग पूरी तरह से गोलबनद रहा है और ऐसे में हमारे लेबरल हिंदू की ख़ामोशी से हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. उन्होंने मुसलमानों के सभी वर्गों को एक साथ चलने की अपील की और भविष्य में अपना राजनीतिक और शैक्षिक कार्यसूची तय करने का सुझाव ह दिया।

आज उनकी वजह से राष्ट्र हर मोर्चे पर पिछड़े होती जा रही है। उन्होंने मुस्लिम नेतृत्व के लिए आलिमों भूमिका पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि उन्हें धार्मिक मामलों तक अपने अपने आप को सीमित रखना चाहिए और मुसलमानों का नेतृत्व के लिए बुद्धिजीवी वर्गों को आगे आना चाहिए और मजबूत रणनीति के साथ राजनीतिक और शैक्षिक अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए।
इस मौके पर कई अहम शख्सियतें मौजूद थीं

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