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इंडियन आवाज़     27 May 2018 06:33:59      انڈین آواز
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राजस्थान मे भी ज़ोर पकड़ने लगी शराब बंदी की मांग

rajasthan sharb bandi2

अशफाक कायमखानी / जयपुर

जहाँ एक तरफ राजस्थान मे सरकारी स्तर पर शराब कारोबारियो को राहत देने के लिये उन्हे अलाट दुकानो को उनकी मनपसंद जगह लगाने के लिये स्टेट हाइवे को जिला सड़क बनाने की लगातार लिस्ट पर लिस्ट सरकार की तरफ से जारी करके शराब कारोबारियो को बडी राहत देने का सिलसिला बदस्तूर जा रही है। वही राज्य भर मे शराब दुकाने अपने इलाको मे नही खुलने देने व प्रदेश मे शराब बन्दी लागू करने के लिये महिलाऐ दिन रात सड़क पर आकर बडा आंदोलन छेड़ने की तरफ तेजी से अग्रसर हो रही है।

हालांकि शराब की दुकाने काफी तादात मे महिलाओ के नाम से लोटरी निकलने के बाद शुरु हुई है लेकिन शराब बंदी के समर्थन मे व शराब दुकानो को विरोध मे महिलाऐ ही पुरे स्टेट मे कड़ा विरोध करते हुये सरकार व शराब कारोबारियो को नाको तले चना चबा रही है। आंदोलन कर रही महिलाऐ कहती है कि शराब के प्रतिकूल प्रभावो की भुगतभोगी महिलाऐ ही अधिक होती है।

राजस्थान के चपे चपे पर शराब बदी की मांग को लेकर रेलिया व सभाऐ हो रही है वही करीब करीब सभी आवासीय बस्ती व मोहल्लो मे खुलने वाली शराब दुकानो के विरोध मे महिलाओ का धरना – प्रदर्शन व अनेक जगह हिंसक प्रदर्शन के साथ साथ लगी दुकानो मे तोडफोड़ करके उनको वहां से हटाने के लिये महिलाऐ हिंसक रुप भी धारण करने से चूक नही रही है। हालाकि इन शराब बंदी समर्थक महिलाओ को एकजुट करने मे पुनम व अंकूर छाबड़ा कोशिश तो कर रही है लेकिन ढंग से इस आंदोलन को गति व नेतृत्व देने मे अभी तक कोई मजबूत नेतृत्व प्रदेश स्तर पर उभर नही पाया है। प्रदेश मे लोटरी से निकली अधिकांश दुकाने डायरेक्ट या इनडायेक्ट रुप से प्रदेश के दबंग व माफिया एवं सियासी लोगो से सम्बंध बताते है जो जोर जबरदस्ती व दबंगाई से इन महिलाओ को अपने स्तर पर या मुकदमो मे फंसाने की कोशिश भी हर समय करते है लेकिन महिलाओ के दिल मे उपज रहा ज्वालामुखी विरोध के आगे इनका हर पाशा फेल होता जा रहा है।

निमकाथाना के गावो मे महिलाऐ दिन रात पहरा देकर दुकान खोलने देने से रोकने मे कामयाब हुई है तो उदयपुर वाटी के जमात इलाके मे शराब कारोबारियो के देर रात शराब दुकान खोलने पर सुबह सुबह आ़दोलनरत महिलाओ के झुंड ने शराब दुकान को नष्ट करके अपना जोहर दिखाकर दुकानदार को दुकान हटाने पर मजबूर कर ही डाला। यह दो नाम मात्र के उदाहरण है जबकि पुरे राजस्थान मे शराब बंदी लागू करने के समर्थन मे एवं खुल रही शराब दुकानो के खिलाफ महिलाऐ हर जगह हर समय सड़क पर उतर चुकी है लेकिन इस आंदोलन के केन्द्रीत करके ठोस नेतृत्व अभी तक ना मिलने से इस आंदोलन को वो गति नही मिल पाई है जो मिलनी चाहिये थी।यानि सरकार को झुका सके।

कुल मिलाकर यह है कि राज्य सरकार को शराब बंदी लागू करने पर सोचना होगा वरना महिलाओ के दिलो मे शराब के खिलाफ उठ रहे ज्वालामुखी का कभी भी बडा विस्फोट हो सकता है।

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