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इंडियन आवाज़     15 Nov 2018 10:42:37      انڈین آواز
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मेरठ से दिल्ली तक राष्ट्रीय धरोहर बचाओ मार्च

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सोशलिस्ट पार्टी (भारत) और खुदाई खिदमतगार ने 1857 के बलिदानियों की याद में 10 मई 2018 को शहीद स्मारक मेरठ से लालकिला दिल्ली तक ‘राष्ट्रीय धरोहर बचाओ मार्च’ निकाला. मार्च में मेरठ और दिल्ली के नागरिकों ने उत्साह से हिस्सा लिया. 10 मई को सुबह चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई. शहर में स्थापित 1857 की क्रांति के स्थानीय नायक धनसिंह कोतवाल की प्रतिमा को नमन करके लोग शहीद स्मारक पहुंचे और 1857 के शहीदों को सलामी और श्रद्धांजलि दी.

मेरठ शहर के मशहूर ‘स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद मियाँ हाउस’ में ‘1857 की क्रांति को किसलिए याद करें’ विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया. गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ पत्रकार अरुण त्रिपाठी ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम एकता और साम्राज्यवाद विरोध के लिए 1857 की क्रांति को याद किया जाना ज़रूरी है. शेखुल हिन्द अकेडमी में भी चर्चा का आयोजन हुआ जिसमें कई वक्ताओं ने 1857 के क्रांतिकारियों और राष्ट्रीय धरोहरों को बचाने के महत्त्व पर प्रकाश डाला.

उसके के बाद लोग रास्ते में परचा बाँटते हुए और सभाएं करते हुए दिल्ली पहुंचे. दिल्ली में 11 मई को शाम 5 बजे खूनी दरवाजे से लालकिला तक मार्च किया गया. लालकिला के मुख्य गेट पर ‘राष्ट्रीय धरोहर बचाओ मार्च’ का समापन हुआ. इस मौके पर सोशलिस्ट पार्टी के अध्यक्ष डॉ. प्रेम सिंह ने बताया कि सोशलिस्ट पार्टी ने राष्ट्रपति को ज्ञापन देकर अपनी मांग दोहराई है कि बहादुरशाह ज़फर के अवशेष रंगून से दिल्ली लाये जाएँ और 1857 के बलिदानियों की याद में एक विशाल स्मारक बनाया जाए. उन्होंने कहा कि सोशलिस्ट पार्टी राष्ट्रीय धरोहरों को कार्पोरेट घरानों को बेचने के सरकार के निर्णय के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएगी. भारत छोड़ो आंदोलन दिवस के अवसर पर आगामी 9 अगस्त को दिल्ली में ‘धरोहर बेचने वाली सरकार सत्ता छोड़ो’ रैली का आयोजन करेगी.

मार्च में वितरित किया गया परचा और फोटो संलग्न हैं.

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