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इंडियन आवाज़     27 May 2018 02:35:41      انڈین آواز
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मुसलमानो की टैक्टिल वोटिंग ने भाजपा की जीत में डाला खलल

विधानसभा चुनाव में 42 प्रतिशत वोट मिले थे जो कि इस बार घटकर मात्र 30 प्रतिशत रह गये जबकि निर्दलीयों प्रत्याशियों को मिले मतों का प्रतिशत भी 32 है यानि भाजपा को मिले मतों से दो प्रतिशत ज्यादा।

muslims-Rajasthan

शहजाद अख्तर / लखनऊ

उत्तर प्रदेश में हुए निकाय चुनाव में जीत को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं दुारा ऐसा प्रचार किया जा रहा है जैसे कि भाजपा ने पुरे प्रदेश की लगभग सभी सीटों पर भगवा झंडा लहरा दिया है लेकिन सच्चाई इसके बिलकुल उलट है यदि नगर निगम के चुनाव परिणामों को छोड़ दें तो नगर पालिका अध्यक्ष और नगर पंचायत अध्यक्ष और पाषर्दों के पदों पर भाजपा का प्रदर्शन बहुत बुरा रहा है। मत प्रतिशत के हिसाब से भी इस चुनाव में भाजपा को काफी नुकसान हुआ है और इसकी वजह है मुस्लिम मतदाताओं दुारा की गयी टैक्टिल वोटिंग।

एक दिसम्बर को जैसे ही उत्तर प्रदेश में हुए सम्पन्न हुऐ स्थानीय निकाय के चुनावों के परिणामों के रूझान आने शुरू हुए वैसे ही भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया और शाम होते होते पुरे उत्तर प्रदेश में ऐसा माहौल बन गया जैसे मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की सरपरस्ती में पूरे प्रदेश में जीत का परचम लहरा दिया है। यह तो सच है कि स्थानीय निकाय के चुनाव में भाजपा ने उत्तर प्रदेश की कुल 16 में से 14 नगर निगमों पर कब्जा कर लिया है।

YOGI ADITYANATHउत्तर प्रदेश की कुल 16 में से 14 नगर निगमों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा होना आधी सच्चाई है। नगर निगमों की कुल 16 सीटों के अलावा भी नगर पालिका अध्यक्ष की 198 सीटों और नगर पंचायत अध्यक्ष कह 438 सीटों और पाषर्दों की 5261 सीटों के लिये चुनाव सम्पन्न हुऐ थे और इन सभी पदों के लिये भाजपा का प्रदर्शन संतोशनजक भी नहीं बल्कि बहुत बुरा रहा है। नगर पालिका अध्यक्ष की 198 सीटों में से लगभग भाजपा ने 68 सीटों पर जीत दर्ज की है लेकिन नगर पंचायत अध्यक्ष कह 438 सीटों में से भाजपा ने मात्र 100 पर ही जीत पाई है इतना ही नहीं पाषर्दों की 5261 सीटों के लिये हुऐ मतदान में भाजपा को मात्र 914 सीटों पर ही विजय श्री प्राप्त हुई है। इसके अलावा पिछले आठ माह पहले विधानसभा चुनाव में 42 प्रतिशत वोट मिले थे वह भी घटकर मात्र 30 प्रतिशत ही रह गये जबकि निर्दलीयों को मिले मतों का प्रतिशत भी 32 है यानि भाजपा को मिले मतों से दो प्रतिशत ज्यादा।

भाजपा को हुऐ इस भारी नुकसान की वजह है मुस्लिम मतदाताओं दुारा की गयी टैक्टिल वोटिंग। इसका मतलब यह है कि मुस्लिम मतदाता उत्तर प्रदेश में इस हिसाब से वोटिंग करता है कि जिस भी पार्टी का कैंडिडेट भाजपा को हराने की हैसियत रखता है वो उसे ही वोटिंग करते है और यह निणर्य भी वो चुनाव से एक दो दिन पहले या मतदान होने की रात को लेते है। यही वजह है कि बहुत ही कम समय में अपनी रणनीति तय कर लेने की वजह से भाजपा और संघ परिवार के नेता मुस्लिम मतदाताओं की रणनीति की काट नहीं ला पाते है और भाजपा को नुकसान हो जाता है।

हालांकि चुनाव परिणामों के तुरंत बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा0 महेंद्र नाथ पाडेय ने कहा था कि 2012 के निकाय चुनाव में भाजपा ने 10 नगर निगमों पर जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार 14 में जीत मिली है। इसका मतलब है हम जीत की तरफ बढ़ रहे हैं और 2019 में भी हम यानि भाजपा ही जीतेगी। उन्होनें जीत की वजह उत्तर प्रदेश सरकार के कामकाज पर जनता की मोहर लगाना लेकिन अपने बयान में ना तो डा0 महेंद्र नाथ पाडेय ने यह बताया कि नगर पालिका अध्यक्ष, नगर पंचायत अध्यक्ष और पाषर्दों की सीटों के लिये हुऐ क्या परिणाम रहा और ना ही उन्होने यह बताने की जहमत उठाई कि भाजपा को मिले मतप्रतिशत में कितनी और क्यो गिरावट आई है और इसके लिये कौन जिम्मेदार है?

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