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इंडियन आवाज़     21 Aug 2018 09:57:42      انڈین آواز
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पटाखे बेचने पर प्रतिबंध मौलिक अधिकार का हनन – कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज़

Fire-crackers

AMN / NEW DELHI

पर्यावरण सुरक्षा पर उच्चतम न्यायालय की चिंता से सहमति रखते हुए कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज़ ने कहा की दिल्ली एन सीआर में इस दिवाली पटाखे बेचने पर प्रतिबंध एक तरह से व्यापारियों के व्यापार करने के संवैधानिक अधिकार का हनन है । पटाखों का व्यापार देश में सदियों से चला आ रहा है और पूर्ण रूप से क़ानून सम्मत होने के कारण भारतीय संविधान के अनुसार इसको इजाज़त है ।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा की उच्चतम न्यायालय ने पटाखे बेचने पर प्रतिबंध लगाया है लेकिन पटाखे फोड़ने पर नहीं और इसका लाभ उठाते हुए लोग दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों से पटाखे ख़रीदकर यहाँ आतिशबाजि कर सकते हैं और यदि ऐसा होता है तो यह दिल्ली के व्यापारियों के साथ अन्याय होगा क्योंकि उनका व्यापार अन्य राज्यों में चला जाएगा और पटाखों के मामले में दिल्ली का व्यापारी अन्य राज्यों के व्यापारियों के बीच एक अंतर हो जाएगा जो न्याय की दृष्टि से उचित नहीं है । इसके अतिरिक्त बड़ी मात्रा में पर्यावरण को हानि न पहुँचाने वाले पटाखे भी आते है लेकिन प्रतिबंध के कारण वो भी बेचे नहीं जा सकेंगे । बहुत से व्यापारियों ने इस दिवाली के लिए पटाखों का स्टॉक अब तक माँगा लिया होगा लेकिन अचानक प्रतिबंध लगने से उन व्यापारियों को बहुत बड़ी वित्तीय हानि होगी ।

देश में पटाखे फोड़ने का सिलसिला सदियों से चला आ रहा है । मान्यता के अनुसार भगवान श्री राम के वनवास के बाद अयोध्या लौटने पर दीप जलाए गए और आतिशबाज़ी की गयी वहीं दिवाली के मौक़े पर लक्ष्मी के आगमन और स्वागत में पटाखे फोड़े जाते हैं । वर्तमान में कोई भी बड़ा उत्सव हो या खेलों का आरम्भ या इसी प्रकार का कोई आयोजन हो तो पटाखे फोड़कर ख़ुशी का प्रदर्शन किया जाता है । पर्यावरण को नुक़सान केवल पटाखों से नहीं बल्कि अन्य अनेक कारणों से भी होता है इस दृष्टि से इस मुद्दे पर व्यापक अध्ययन कर एक नीति बनाई जाना समय की माँग है ।

इस मुद्दे को देखते हुए सरकार को उच्चतम न्यायालय में रिव्यू पिटिशन दाख़िल कर कम से कम इस दिवाली के लिए प्रतिबंध वापिस लेने का आग्रह करना चाहिए । व्यापारी न्यायालय का पूर्ण सम्मान करते हैं और न्यायालयों जो भी आदेश देगा उसका पालन करेंगे

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